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  "title": "खाद संकट टला: होर्मुज की अनिश्चितता के बीच 15 जहाज भारत पहुंचे, सालभर की आधी जरूरत का भंडार तैयार",
  "summary": "पश्चिम एशिया के तनाव और होर्मुज जलसंधि की अनिश्चितता के बावजूद उर्वरक और कच्चा माल लेकर 15 कमर्शियल जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गए हैं, जिससे खरीफ और रबी दोनों सीजन में खाद की कमी की आशंका लगभग खत्म हो गई है।",
  "content": "पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलसंधि पर छाई अनिश्चितता ने पिछले कुछ समय में पूरी दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था को हिला दिया था। कच्चे तेल से लेकर खेती में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों तक, कई जरूरी चीजों की सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया था। इसी उथल पुथल के बीच भारत ने खाद की उपलब्धता के मोर्चे पर एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी हासिल की है। सरकार ने वक्त रहते आयात के नए रास्ते खोले, घरेलू उत्पादन को रफ्तार दी और इतना भंडार जमा कर लिया कि अब खरीफ और रबी, दोनों सीजन के लिए खाद की किल्लत की चिंता काफी हद तक दूर हो गई है।\n\nताजा जानकारी के मुताबिक, उर्वरक और उससे जुड़ा जरूरी कच्चा माल लेकर कुल 15 कमर्शियल जहाज सुरक्षित तरीके से भारत के बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं। इन जहाजों के आने से देश के फर्टिलाइजर भंडार में बड़ा इजाफा हुआ है। इसका सबसे सीधा और बड़ा फायदा आने वाले महीनों में किसानों को मिलेगा, क्योंकि बुवाई के मौसम में खाद मिलने को लेकर बनी हुई घबराहट अब काफी कम हो गई है।\n\nनड्डा बोले, शुरू से तैयार थी सरकार\nकेंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने रविवार को इस पूरी स्थिति पर बात रखी। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष की वजह से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई। उर्वरकों की कीमतें आसमान छूने लगीं और माल पहुंचने में लगने वाला समय भी बढ़ गया। भारत भी इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा। इससे कच्चे माल और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति में चुनौतियां आईं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारत सरकार शुरू से ही सतर्क और तैयार थी।”\n\nमंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार ने संकट के शुरुआती संकेत मिलते ही कदम उठाने शुरू कर दिए थे, ताकि खेती का सीजन आते आते किसानों के सामने खाद की कमी न खड़ी हो जाए।\n\nविदेश में मौजूद दूतावासों ने संभाला मोर्चा\nइस पूरी रणनीति की रीढ़ बने विदेशों में मौजूद भारत के 28 दूतावास और उच्चायोग। जैसे ही पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने लगे, इन मिशनों ने दुनिया के अलग अलग देशों में बैठे उर्वरक उत्पादकों और सप्लायर्स से बातचीत शुरू कर दी। नतीजा यह निकला कि भारत को सिर्फ पुराने और पारंपरिक रास्तों पर टिके रहने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि उसने आपूर्ति के कई नए स्रोत खड़े कर लिए।\n\nयूरिया की सप्लाई पक्की करने के लिए ओमान, वियतनाम, रूस, मिस्र और नीदरलैंड समेत कुल 11 देशों से इंतजाम किया गया। वहीं DAP और NPK जैसे उर्वरकों के लिए मोरक्को, अमेरिका, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित आठ देशों से आयात का रास्ता तय किया गया। इतने बड़े दायरे में स्रोत तैयार होने का असर यह रहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ाई नहीं।\n\nगैस बहाल होते ही फैक्ट्रियां फुल स्पीड पर\nसंकट के दिनों में उर्वरक कारखानों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस घटकर करीब 65 प्रतिशत रह गई थी, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। अब सरकार ने इस आपूर्ति को दोबारा 100 प्रतिशत पर पहुंचा दिया है। पूरी गैस मिलते ही देश के सभी यूरिया संयंत्र फिर से अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करने लगे हैं।\n\nइसका असर उत्पादन के आंकड़ों में भी साफ दिखा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश में 71.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया बना, जो तय लक्ष्य से 3.69 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है। इसी दौरान DAP का उत्पादन भी लक्ष्य से 1.23 लाख मीट्रिक टन ऊपर रहते हुए 9.84 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इनके अलावा NPK का 20.77 लाख मीट्रिक टन और SSP का 13.50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया।\n\nबंदरगाहों की ओर बढ़ता माल\nअभी की स्थिति देखें तो आठ जहाजों के जरिए 3.32 लाख मीट्रिक टन यूरिया, चार जहाजों से 2.57 लाख मीट्रिक टन DAP और तीन जहाजों से 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर भारत पहुंच रहा है। इतना ही नहीं, पांच और बड़े जहाज भी रास्ते में हैं, जिनके आने के बाद देश का भंडार और मजबूत हो जाएगा।\n\nसालभर की आधी जरूरत पहले से जमा\nकृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पूरे साल के लिए देश में 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान लगाया है। इसके मुकाबले सरकार अभी से 197.56 लाख मीट्रिक टन खाद का भंडार सुरक्षित कर चुकी है। यानी सालभर की अनुमानित जरूरत का 51 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पहले से तैयार पड़ा है।\n\nइतना बड़ा एडवांस स्टॉक होने का मतलब है कि खरीफ और रबी, दोनों सीजन में किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही, अगर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा कोई उथल पुथल आती है, तब भी भारत के पास पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद रहेगा।\n\nकिसानों के लिए क्यों बड़ी बात है यह तैयारी\nभारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि प्रधान देशों में गिना जाता है और हर साल करोड़ों किसान समय पर खाद मिलने पर निर्भर रहते हैं। अगर ठीक बुवाई के वक्त उर्वरक की कमी हो जाए तो इसका सीधा असर फसल के उत्पादन और किसानों की कमाई पर पड़ता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट के बीच सरकार की यह रणनीति सिर्फ आयात बढ़ाने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आयात, घरेलू उत्पादन और मजबूत भंडारण, इन तीनों को साथ लेकर बनी यह व्यवस्था फिलहाल भारतीय खेती को किसी भी संभावित वैश्विक झटके से काफी हद तक बचा ले गई है।\n\nइसका आप पर असर\n• किसानों के लिए: बुवाई के मौसम में यूरिया, DAP और NPK मिलने की चिंता कम, क्योंकि सालभर की आधी से ज्यादा जरूरत का भंडार पहले से तैयार है।\n• आम लोगों के लिए: खाद की स्थिर आपूर्ति से फसल उत्पादन पर दबाव घटेगा, जिसका असर आगे चलकर खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत कितने जहाजों के जरिए खाद पहुंची है?\nउर्वरक और जरूरी कच्चा माल लेकर कुल 15 कमर्शियल जहाज सुरक्षित भारत के बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं।\n\n2. यूरिया की सप्लाई के लिए किन देशों से इंतजाम किया गया?\nयूरिया के लिए ओमान, वियतनाम, रूस, मिस्र और नीदरलैंड समेत कुल 11 देशों से व्यवस्था की गई।\n\n3. सरकार ने सालभर के लिए कितनी खाद की जरूरत का अनुमान लगाया है?\nकृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पूरे साल के लिए 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान लगाया है, जिसमें से 197.56 लाख मीट्रिक टन का भंडार पहले ही सुरक्षित है।\n\n4. पहली तिमाही में कितना यूरिया बना?\nवित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश में 71.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जो लक्ष्य से 3.69 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है।\n\n5. संकट के दौरान गैस आपूर्ति का क्या हुआ था?\nसंकट के समय उर्वरक कारखानों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस घटकर करीब 65 प्रतिशत रह गई थी, जिसे अब दोबारा 100 प्रतिशत कर दिया गया है।\n\n6. क्या आगे और जहाज आने वाले हैं?\nहां, अभी 15 जहाजों के अलावा पांच और बड़े जहाज रास्ते में हैं, जिनके आने से देश का भंडार और मजबूत होगा।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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    "उर्वरक आयात",
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