खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में केंद्र ने की भारी कटौती, त्योहारी मौसम में घट सकते हैं दाम केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से ठीक पहले सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटा दी है, जिससे खुदरा कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। आगामी त्योहारी मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता सुधारने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल की प्रमुख श्रेणियों पर लागू बेसिक कस्टम ड्यूटी यानी मूल सीमा शुल्क में उल्लेखनीय कटौती की अधिसूचना जारी की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशी बाजारों से आने वाले खाद्य तेल के आयात खर्च को सीमित करना है, ताकि स्थानीय बाजारों में कीमतों का दबाव कम हो सके। हालांकि खुदरा स्तर पर मिलने वाली वास्तविक राहत काफी हद तक वैश्विक कमोडिटी दरों, विदेशी मुद्रा विनिमय दर और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध भंडारण स्थिति पर निर्भर करेगी। सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क में सबसे बड़ी छूट वित्त मंत्रालय द्वारा तय की गई नई दरों के अंतर्गत कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 10% से घटाकर सीधे शून्य कर दिया गया है। इसके अलावा परिष्कृत यानी रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर लागू शुल्क को 32.5% के स्तर से घटाकर 22.5% कर दिया गया है। कच्चे तेल पर शुल्क पूरी तरह समाप्त होने और रिफाइंड उत्पाद पर 10% की कटौती होने से तेल शोधन इकाइयों की लागत घटेगी, जिससे आने वाले हफ्तों में उपभोक्ताओं के लिए यह तेल अधिक किफायती हो सकता है। सोयाबीन और पाम तेल की नई शुल्क दरें मंत्रालय ने सोयाबीन और पाम तेल के आयातकों को भी शुल्क में रियायत दी है। कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल दोनों पर अब 10% के बजाय 5% की दर से बेसिक कस्टम ड्यूटी वसूली जाएगी। वहीं इन दोनों तेलों के रिफाइंड स्वरूप पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 32.5% से कम करके 27.5% निर्धारित किया गया है। दोनों ही श्रेणियों के कच्चे तेल पर 5% और रिफाइंड तेल पर 5% की राहत मिलने से घरेलू प्रसंस्करण मिलों के लिए कच्चे माल की लागत कम होगी। त्योहारी मांग के बीच उद्योग की प्रतिक्रिया त्योहारों के महीनों में आम घरों के साथ-साथ हलवाई की दुकानों, नमकीन बनाने वाली इकाइयों, रेस्टोरेंट और बड़े खानपान उद्योग में खाद्य तेल की खपत में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने बताया कि आयात शुल्क घटने से भारतीय बंदरगाहों पर आयातित तेल की लैंडेड लागत में गिरावट आएगी, जिससे आम खरीदारों को लाभ मिल सकता है। सुधाकर देसाई के अनुसार, सूरजमुखी तेल के आयात शुल्क में सबसे गहरी कटौती की गई है, जिसका अनुकूल असर विशेष रूप से दक्षिण भारत के बाजारों में दिख सकता है जहां इस तेल की खपत सर्वाधिक है। विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता और मूल्य निर्धारण की चुनौतियां भारत अपनी कुल खाद्य तेल की वार्षिक घरेलू खपत का करीब 60% हिस्सा दूसरे देशों से खरीदकर पूरा करता है। आयात पर इतनी भारी निर्भरता के चलते घरेलू खुदरा कीमतें वैश्विक बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई लागत और रुपये के मूल्य से सीधे प्रभावित होती हैं। भारत बड़े पैमाने पर पाम तेल की आपूर्ति मलेशिया और इंडोनेशिया से करता है, जबकि सोयाबीन तेल का प्रमुख आयात अर्जेंटीना और ब्राजील से होता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी शुल्क घटने के बावजूद खुदरा दुकानों तक तुरंत दाम कम होना संभव नहीं होता। अंतिम खुदरा कीमतें तय होने में वैश्विक कमोडिटी बाजारों की चाल, समुद्री परिवहन भाड़ा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और प्रसंस्करण कंपनियों के मौजूदा पुराने स्टॉक की लागत की भी बड़ी भूमिका रहेगी। इसका आप पर असर खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटने से त्योहारी सीजन के दौरान आम परिवारों के रसोई बजट और हलवाई व रेस्तरां कारोबारियों की कच्ची लागत में कमी आ सकती है। • आम उपभोक्ताओं के लिए: आने वाले हफ्तों में खुदरा किराना दुकानों पर सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल के डिब्बे व पाउच कुछ सस्ते मिल सकते हैं। परिवार आगामी त्योहारों की खरीदारी के समय तेल की नई दरों का इंतजार कर सकते हैं। • दक्षिण भारत में: सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10% से शून्य किए जाने से दक्षिण भारतीय राज्यों के उपभोक्ताओं को सबसे तेज राहत मिलने के आसार हैं। वहां के खुदरा बाजारों में पैकेटबंद सूरजमुखी तेल के दाम अन्य तेलों की तुलना में जल्दी सुधर सकते हैं। • हलवाई और फूड सर्विस कारोबार: मिठाई, नमकीन, होटल और कैटरिंग कारोबारियों को त्योहारी सीजन में थोक रिफाइंड पाम और सोयाबीन तेल सस्ती दरों पर मिलने की उम्मीद है। इससे त्योहारों पर तैयार होने वाले व्यंजनों की लागत पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। • बाजार में असर का समय: खुदरा दुकानों पर भाव तुरंत घटने के बजाय नई आयातित खेप आने के बाद ही कम होंगे। उपभोक्ताओं को खुदरा पैकेटों पर नई एमआरपी दर्ज होने तक कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ सरकार ने यह कदम आगामी त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों की घरेलू मांग में तेज उछाल और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया है। • त्योहारी मांग का दबाव: त्योहारों के दौरान मिठाइयों, नमकीन और घरेलू व्यंजनों के कारण खाद्य तेलों की खपत अचानक बहुत बढ़ जाती है। मांग बढ़ने से कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को रोकने के लिए समय रहते शुल्क घटाया गया। • आयात पर भारी निर्भरता: भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरत का करीब 60% हिस्सा विदेशों से आयात करके पूरा करता है। आयातित माल महंगा होने से घरेलू बाजार में सीधे महंगाई बढ़ती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए लैंडेड लागत कम करना आवश्यक था। • कच्चे माल की लागत घटाना: कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क पूरी तरह शून्य करने और कच्चे पाम व सोयाबीन तेल पर शुल्क 5% करने से घरेलू रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। इससे स्थानीय तेल मिलें बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर तैयार तेल उपलब्ध करा सकेंगी। सवाल-जवाब 1. सरकार ने किन खाद्य तेलों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाई है? सरकार ने कच्चे और रिफाइंड सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल और पाम तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में कटौती की है। 2. सूरजमुखी तेल पर नई कस्टम ड्यूटी कितनी लागू की गई है? कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर शून्य कर दी गई है, जबकि रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर यह 32.5% से घटाकर 22.5% कर दी गई है। 3. सोयाबीन और पाम तेल पर शुल्क में कितना बदलाव हुआ है? कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटकर 5% हो गई है, तथा इनके रिफाइंड वेरिएंट पर यह 32.5% से घटकर 27.5% रह गई है। 4. भारत अपनी जरूरत का कितना खाद्य तेल आयात करता है? भारत अपनी कुल खाद्य तेल खपत का लगभग 60% हिस्सा आयात के माध्यम से विदेशों से खरीदता है। 5. भारत मुख्य रूप से किन देशों से खाद्य तेल का आयात करता है? भारत मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल तथा अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात करता है। 6. क्या खुदरा बाजार में तेल की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी? कीमतों में राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, लेकिन अंतिम खुदरा भाव अंतरराष्ट्रीय दरों, माल भाड़े, रुपये की विनिमय दर और कंपनियों के पास मौजूद पुराने स्टॉक पर भी निर्भर करेंगे। https://trendkia.com/business/khadya-telon-para-ayata-shulka-men-kendra-ne-ki-bhari-katauti-tyohari-mausama-men-ghata-sakate-hain-dama-37988 TrendKia — Har trend, sabse pehle.