खैरथल मंडी में सरसों के तेवर तीखे, महीने भर में क्विंटल पर 1000 रुपये तक का फायदा — किसान रोक रहे माल अलवर की खैरथल कृषि उपज मंडी में सरसों का भाव एक माह में करीब 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गया है, जिससे किसान बिक्री रोककर और तेजी का इंतजार कर रहे हैं और आवक तेजी से घट गई है। राजस्थान के अलवर जिले की खैरथल कृषि उपज मंडी इन दिनों सरसों के लगातार चढ़ते-उतरते भावों की चर्चा का केंद्र बनी हुई है। हर रोज कभी 50 तो कभी 100 रुपये प्रति क्विंटल की हलचल के बावजूद कुल मिलाकर भाव ऊंचे स्तर पर ही टिके हैं। इसी मजबूती ने किसानों के मन में और बेहतर दाम की उम्मीद जगा दी है, और बड़ी तादाद में किसान फिलहाल अपनी फसल को रोककर सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। इसका सीधा नतीजा यह है कि मंडी में आने वाली सरसों की मात्रा भी काफी सिमट गई है। एक महीने में कितना चढ़ा भाव आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते एक माह में खैरथल मंडी में सरसों करीब 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक महंगी हो चुकी है। मई में जहां यह फसल 6600 से 7100 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में हाथोंहाथ बिक रही थी, वहीं जून आते-आते 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का दाम उछलकर 7660 रुपये प्रति क्विंटल पर जा पहुंचा है। खास बात यह है कि जून के सिर्फ पहले 12 दिनों में ही करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त दर्ज हो चुकी है। तेल की कीमतों पर सीधी मार मंडी के कारोबारियों के मुताबिक पिछले एक महीने से सरसों का भाव 7600 से 7800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है। शुक्रवार को भी खैरथल मंडी में 42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों 7660 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी। दाने के दाम चढ़ने का असर रसोई तक पहुंच चुका है — सरसों के तेल की कीमत बढ़कर करीब 160 रुपये प्रति लीटर तक जा पहुंची है, जो आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त भार डाल रही है। आवक एक लाख कट्टे से सिमटकर ढाई हजार पर मंडी व्यापारी महेश खंडेलवाल, श्याम बिहारी, राजेंद्र सेठी, टीटू यादव, सुरेश गुप्ता और दयाराम का कहना है कि अप्रैल और मई में मंडी में रोजाना तकरीबन एक लाख कट्टों तक सरसों की आवक हो रही थी, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 2 से 2.5 हजार कट्टों पर आ गई है। व्यापारियों के अनुसार आवक इतनी घटने की बड़ी वजह यह है कि गोदाम पहले से ही स्टॉक से भरे पड़े हैं। साथ ही जो किसान आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वे भाव और चढ़ने की आस में अपनी उपज बाजार में लाने से बच रहे हैं। आगे क्या रुख रहेगा कारोबारियों का अनुमान है कि अगर मांग इसी तरह बनी रही और आवक सीमित रही, तो आने वाले दिनों में सरसों के भावों में और मजबूती आ सकती है। यही वजह है कि किसान फिलहाल बिक्री से दूरी बनाए हुए हैं और अनुकूल समय की राह देख रहे हैं। कुल मिलाकर खैरथल मंडी का सरसों बाजार इस वक्त किसानों के लिए उम्मीद और व्यापारियों के लिए सावधानी, दोनों का सबब बना हुआ है, और सबकी निगाहें आगे के रुख पर टिकी हैं। https://trendkia.com/business/khairathala-mndi-men-sarason-ke-tevara-tikhe-mahine-bhara-men-kvintala-para-1000-298 TrendKia — Har trend, sabse pehle.