# क्रिप्टो पर रिजर्व बैंक का रुख बेहद सावधान, केंद्रीय बैंक गवर्नर ने टेक्नोलॉजी इनोवेशन और मौद्रिक संप्रभुता पर रखी स्पष्ट राय

> भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि भारत क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क बना हुआ है, जबकि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर और टोकन सिस्टम जैसी बुनियादी तकनीकों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की मौद्रिक नीति प्राथमिक तौर पर घरेलू विकास और महंगाई की परिस्थितियों पर केंद्रित है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/kripto-para-rbi-ka-rukha-behada-savadhana-kendriya-bainka-gavarnara-sanjay-malhotra-ne-teknoloji-inoveshana-aura-maudrika-snprabhu-42771 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरबीआई, संजय मल्होत्रा, क्रिप्टोकरेंसी, मौद्रिक नीति, सीबीडीसी, बॉन्ड यील्ड, टोकन सिस्टम, भारतीय अर्थव्यवस्था

देश के वित्तीय तंत्र को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक ने आभासी मुद्राओं यानी क्रिप्टोकरेंसी पर अपना सतर्क दृष्टिकोण कायम रखा हुआ है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि क्रिप्टो संपत्तियों के पीछे काम करने वाली तकनीकी प्रणालियों, जैसे कि विकेंद्रीकृत डिजिटल बहीखाता तकनीक और टोकन सिस्टम, के समर्थन और विकास में कोई कमी नहीं की जाएगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को इस रणनीति की विस्तृत रूपरेखा पेश करते हुए रेखांकित किया कि नवाचार को गति देना जरूरी है, मगर देश की आर्थिक स्थिरता और मौद्रिक संप्रभुता पर आंच नहीं आने दी जा सकती।

## तकनीकी नवाचार का स्वागत मगर आभासी परिसंपत्तियों पर संशय
केंद्रीय बैंक के प्रमुख संजय मल्होत्रा ने समझाया कि भारत क्रिप्टो एसेट्स से जुड़े तकनीकी ढांचों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इनमें मुख्य रूप से डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकन प्रणाली शामिल हैं। हालांकि, जब बात वास्तविक क्रिप्टोकरेंसी की आती है, तो नीति निर्माताओं के सामने मौद्रिक नीति के क्रियान्वयन, राष्ट्रीय पूंजी प्रवाह और मुद्रा की संप्रभुता से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। इन्हीं जोखिमों के चलते नियामक ने आभासी मुद्राओं को लेकर बेहद नपा-तुला और सावधान रुख अपनाया हुआ है।

## विकेंद्रीकृत बहीखाता और टोकन व्यवस्था की कार्यप्रणाली
वित्तीय तकनीकी बुनियादी ढांचे को विस्तार से समझाते हुए यह स्पष्ट किया गया कि विकेंद्रीकृत डिजिटल बहीखाता तकनीक असल में एक ऐसा साझा डिजिटल ढांचा है, जिसमें किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन अथवा आधिकारिक रिकॉर्ड एक केंद्रीय सर्वर पर नहीं रखे जाते। इसके विपरीत, यह जानकारी नेटवर्क से जुड़े कई सारे कंप्यूटरों के बीच समानांतर रूप से साझा और सुरक्षित की जाती है। दूसरी तरफ, टोकन सिस्टम एक ऐसी आधुनिक सुरक्षा पद्धति है जिसके जरिए किसी वास्तविक परिसंपत्ति के मालिकाना हक अथवा बेहद संवेदनशील निजी जानकारियों, जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड के नंबर, को एक अभेद्य डिजिटल कोड या टोकन में तब्दील कर दिया जाता है।

## मूलभूत टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर केंद्रीय बैंक की पहल
संजय मल्होत्रा ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण बुनियादी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने का रहा है और हम इनमें से कुछ का इस्तेमाल केंद्रीय बैंक के भीतर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बाहरी स्तर पर कर रहे हैं। लेकिन जहां तक क्रिप्टो का सवाल है, हमने सतर्क रुख अपनाया है।" गवर्नर के अनुसार, तकनीकी क्षमताओं को संस्थागत कामकाज और सार्वजनिक-निजी साझेदारी में जोड़कर दक्षता बढ़ाई जा रही है, परंतु सट्टेबाजी और अनियंत्रित डिजिटल मुद्राओं से तंत्र को सुरक्षित रखना भी उतना ही अनिवार्य है।

## घरेलू भुगतान का ढांचा मजबूत और किफायती
क्रिप्टोकरेंसी के पीछे अक्सर दिए जाने वाले भुगतानों के तर्कों को खारिज करते हुए गवर्नर ने रेखांकित किया कि यह मुद्दा पैसे के एक समान मूल्य यानी मुद्रा की एकरूपता और आर्थिक नीतियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से गहरा जुड़ाव रखता है। विशेषकर उन उभरते हुए बाजारों में, जहां सीमा पार पूंजी के प्रवाह पर कड़े नियामक प्रतिबंध लगे हैं, वहां अनियंत्रित क्रिप्टो करेंसी गंभीर अस्थिरता पैदा कर सकती है। गवर्नर ने कहा, "जिस समस्या को हल करने की कोशिश की जा रही है, वो मुख्य रूप से घरेलू भुगतान से जुड़ी नहीं है, क्योंकि हमारे देश और कई अन्य देशों में घरेलू भुगतान अब काफी तेज, सस्ता और सुविधाजनक है।"

## सीमा पार लेन-देन और वैश्विक कर्ज का बढ़ता दबाव
गवर्नर ने माना कि असल समस्या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार होने वाले भुगतानों में आती है, जो आज भी जटिल और महंगे बने हुए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय चुनौती से निपटने के लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) जैसे संप्रभु डिजिटल विकल्पों और अन्य मॉडलों पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे सरकारी कर्ज और बॉन्ड यील्ड में आ रहे उतार-चढ़ाव पर भी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बॉन्ड यील्ड में बदलाव मांग और आपूर्ति के मूलभूत संतुलन पर निर्भर करता है। वर्तमान में सरकारों के साथ-साथ निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र के खर्चों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसमें AI से जुड़ी तकनीकी जरूरतों पर हो रहे भारी निवेश की भी बड़ी भूमिका है।

संजय मल्होत्रा ने कहा, "पैसा सीमित है, खर्च बढ़ गया है। सरकार के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों का खर्च भी बढ़ा है, जिसमें एआई की भूमिका है। यही बॉन्ड यील्ड और डेट में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है।"

## घरेलू विकास और मुद्रास्फीति पर टिकी मौद्रिक नीति
केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों के संदर्भ में गवर्नर ने स्पष्ट किया कि भारत की मौद्रिक नीति का पूरा ध्यान मुख्य तौर पर देश के भीतर आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने पर ही केंद्रित रहता है। यद्यपि वैश्विक वित्तीय बाजार की ब्याज दरें देश के वास्तविक ब्याज दर ढांचे को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संजय मल्होत्रा ने कहा, "ये ऐसी चीज है जिसका हमें ध्यान रखना होगा।" इस तरह अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद घरेलू प्राथमिकताओं को ही नीतिगत निर्णयों के केंद्र में रखा जाएगा।

## इसका आप पर असर
भारतीय रिजर्व बैंक के सतर्क रुख से यह स्पष्ट है कि देश में अनियंत्रित निजी क्रिप्टोकरेंसी को मुख्यधारा की कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं मिलने वाली है, जिससे आम निवेशकों और उपभोक्ताओं की वित्तीय सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहेगी।

- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** निजी क्रिप्टोकरेंसी पर नियामक की कड़ी निगरानी और सतर्क रुख लगातार जारी रहेगा। निवेशकों को सट्टेबाजी से भरे टोकनों के बजाय सुरक्षित और विनियमित निवेश विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** घरेलू खुदरा भुगतान प्रणालियां बिना किसी क्रिप्टो हस्तक्षेप के तेज, सस्ती और पूरी तरह सुरक्षित बनी रहेंगी। क्रेडिट या डेबिट कार्ड टोकनाइजेशन से आपके बैंकिंग डेटा की साइबर सुरक्षा और मजबूत होगी।
- **अंतरराष्ट्रीय धन प्रेषण के लिए:** विदेशों में पैसे भेजने या मंगाने की लागत घटाने के लिए भविष्य में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा यानी सीबीडीसी का दायरा बढ़ाया जाएगा। इससे विदेशी लेनदेन में समय और कमीशन दोनों की बचत हो सकेगी।
- **कर्ज और ब्याज दरों के लिए:** आरबीआई की मौद्रिक नीति घरेलू विकास और महंगाई पर केंद्रित रहने से ब्याज दरों के फैसले देश की जमीनी स्थिति देखकर होंगे। होम लोन या पर्सनल लोन लेने वालों की ईएमआई पर अंतरराष्ट्रीय उठापटक का सीधा झटका सीमित रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
रिजर्व बैंक ने यह कड़ा और नपा-तुला रुख इसलिए अपनाया है क्योंकि अनियंत्रित आभासी संपत्तियां किसी देश की संप्रभु मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।

- **मौद्रिक संप्रभुता का संरक्षण:** जब कोई निजी डिजिटल मुद्रा व्यापक लेन-देन में इस्तेमाल होने लगती है, तो केंद्रीय बैंक का मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है। इसी मौद्रिक स्वतंत्रता और 'पैसे के एक समान मूल्य' को बनाए रखने के लिए यह सतर्कता बरती जा रही है।
- **पूंजी प्रवाह और वित्तीय जोखिम:** भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सीमा पार पूंजी के बेरोक-टोक आने-जाने पर कानूनी नियंत्रण होते हैं। अनियंत्रित क्रिप्टो करेंसी इन विदेशी मुद्रा प्रतिबंधों को तोड़कर पूंजी पलायन और वित्तीय अस्थिरता का जोखिम बढ़ा देती है।
- **घरेलू पेमेंट सिस्टम की सफलता:** देश में यूपीआई और डिजिटल बैंकिंग के जरिए स्थानीय लेन-देन पहले से ही बेहद सुगम, तीव्र और लगभग मुफ्त हैं। ऐसे में घरेलू बाजार में किसी निजी और अस्थिर क्रिप्टो मुद्रा की वास्तविक जरूरत ही नहीं बची है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्रिप्टोकरेंसी को लेकर रिजर्व बैंक का क्या दृष्टिकोण है?
रिजर्व बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा है, क्योंकि इससे देश की मौद्रिक संप्रभुता और पूंजी प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।

### 2. क्या केंद्रीय बैंक क्रिप्टो से जुड़ी टेक्नोलॉजी का भी विरोध कर रहा है?
नहीं, आरबीआई डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर और टोकन सिस्टम जैसी बुनियादी तकनीकों के नवाचार का पूरा समर्थन करता है और इनका उपयोग अपने कामकाज व सार्वजनिक-निजी भागीदारी में कर रहा है।

### 3. विकेंद्रीकृत डिजिटल बहीखाता तकनीक क्या होती है?
यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड किसी एक सर्वर पर रखने के बजाय नेटवर्क के कई कंप्यूटरों के बीच साझा और विकेंद्रीकृत रखा जाता है।

### 4. आरबीआई गवर्नर के अनुसार घरेलू और सीमा पार भुगतान में क्या अंतर है?
गवर्नर के अनुसार भारत में घरेलू भुगतान पहले से ही काफी तेज, सस्ते और सुविधाजनक हैं, जबकि असली चुनौती सीमा पार लेन-देन की है जिसके लिए सीबीडीसी जैसे विकल्पों पर काम हो सकता है।

### 5. वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कर्ज में बढ़ोतरी का क्या कारण बताया गया?
बॉन्ड यील्ड मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है, और वर्तमान में सरकारों व निजी कंपनियों का खर्च बढ़ा है जिसमें एआई की भी बड़ी भूमिका है।

### 6. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का मुख्य फोकस किन बातों पर रहता है?
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति मुख्य रूप से घरेलू विकास दर और महंगाई की परिस्थितियों पर केंद्रित रहती है।

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