क्या NSE सचमुच नोट छापने की मशीन है? जानें क्यों ज़ेरोधा के नितिन कामथ ने भारत के सबसे बड़े IPO को लेकर कही यह बड़ी बात लगभग 30,000 करोड़ रुपये के मेगा IPO की तैयारी के बीच ज़ेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने बताया कि क्यों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मुनाफे को बांटने वाला एक बेहतरीन जरिया है और उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स के गणित को भी समझाया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को लेकर नितिन कामथ का बड़ा बयान भारतीय शेयर बाजार के निवेशक इन दिनों नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आगामी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इस बीच देश की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म ज़ेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने इस एक्सचेंज को लेकर अपनी एक खास राय रखी है। नितिन कामथ ने कहा कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मुनाफे को कमाने और उसे बांटने वाली एक बेहद ताकतवर मशीन की तरह है। वित्त वर्ष FY26 में एक्सचेंज के शानदार प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस दौरान NSE ने 10,300 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया और अपने शेयरधारकों को 8,660 करोड़ रुपये का भारी-भरकम डिविडेंड दिया। इसका मतलब है कि वित्त वर्ष FY26 में इसका डिविडेंड पेआउट रेशियो 84% रहा है। नितिन कामथ के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद भी NSE द्वारा इसी तरह बड़ा डिविडेंड दिए जाने का सिलसिला जारी रहने की पूरी उम्मीद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अतिरिक्त मुनाफे का इस्तेमाल करने के लिए एक्सचेंज के पास सीमित विकल्प हैं। बाजार नियामक SEBI के कड़े नियमों के अनुसार, शेयर एक्सचेंजों को अपने मुनाफे को किसी दूसरी लिस्टेड या अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी में निवेश करने की अनुमति नहीं है। ऐसे में शेयरधारकों को डिविडेंड बांटना ही कंपनी के पास सबसे व्यावहारिक जरिया बचता है। टैक्स का गणित: क्यों कंपनियां मुनाफा बांटने से बचती हैं? नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि आखिर देश में NSE जैसे मुनाफे वाले और भी बिजनेस क्यों नहीं देखने को मिलते? उन्होंने खुद इसका जवाब देते हुए बताया कि इसके पीछे मुख्य वजह टैक्स आर्बिट्रेज का होना है। उन्होंने इसे एक आसान उदाहरण से समझाया: मान लीजिए कि कोई कंपनी 100 रुपये कमाती है। इस पर उसे लगभग 25% का कॉरपोरेट टैक्स देना पड़ता है, जिससे उसके पास 75 रुपये बचते हैं। यदि वह बचे हुए 75 रुपये को डिविडेंड के रूप में अपने शेयरधारकों में बांट देती है, तो निवेशकों को अपनी व्यक्तिगत टैक्स स्लैब के हिसाब से फिर से टैक्स देना होगा। सबसे ऊंची टैक्स श्रेणी में आने वाले निवेशकों के लिए यह टैक्स दर लगभग 36% तक हो सकती है। इस तरह अंत में निवेशक के हाथ में मूल 100 रुपये की कमाई में से केवल 48 रुपये ही बच पाते हैं। नितिन कामथ ने इसकी तुलना उस कंपनी से की जो अपने पूरे 100 रुपये के मुनाफे को दोबारा बिजनेस के विकास में लगा देती है। अगर इस निवेश की वजह से कंपनी के शेयर की कीमत बढ़ती है, तो निवेशकों को केवल शेयर बेचते समय ही कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा, जिसकी अधिकतम दर महज 14.5% है। इसके अलावा, चूंकि यह पैसा सीधे बिजनेस में लगा दिया जाता है, इसलिए इस पर कोई कॉरपोरेट प्रॉफिट टैक्स भी नहीं लगता। यह 14.5% बनाम 51% का भारी अंतर ही सफल और नए जमाने की कंपनियों को मुनाफा बांटने के बजाय उसे वापस आक्रामक रूप से निवेश करने के लिए प्रेरित करता है। कामथ ने कहा कि यही वजह है कि नए दौर के स्टार्टअप शुरुआत में मुनाफा कमाने को ज्यादा प्राथमिकता नहीं देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि अल्पकालिक तौर पर दोबारा निवेश करना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, लेकिन लंबे समय तक बिना मुनाफे के चलने वाले बिजनेस काफी कमजोर हो जाते हैं। बाजार का एक भी बुरा दौर उन्हें बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि कॉरपोरेट मुनाफे पर दोहरा टैक्स लगना एक बड़ा वैश्विक मुद्दा है। अमेरिका जैसे देश ज्यादातर लिस्टेड कंपनियों के डिविडेंड पर सामान्य इनकम टैक्स से कम दर पर टैक्स लगाते हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया में निवेशकों को कंपनी द्वारा पहले ही चुकाए जा चुके टैक्स के लिए क्रेडिट दिया जाता है। देश के सबसे बड़े IPO से जुड़ी हर अहम बात NSE का आगामी IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होने जा रहा है। एक्सचेंज ने SEBI के पास करीब 30,000 करोड़ रुपये के IPO के लिए दस्तावेज जमा किए हैं। यह पूरा IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी OFS पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि इस प्रक्रिया से मिलने वाली सारी रकम सीधे बेचने वाले शेयरधारकों के पास जाएगी, न कि एक्सचेंज के पास। इस OFS के तहत वर्तमान शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की पेशकश करेंगे। इन हिस्सेदारी बेचने वाले शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक, एमएस स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस), अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) पीटीई लिमिटेड, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया एश्योरेंस कंपनी और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं। इस मेगा आईपीओ का प्राइस बैंड और खुलने व बंद होने की तारीखें अभी घोषित नहीं की गई हैं। इस विशाल IPO की कमान संभालने वाले बुक रनिंग लीड मैनेजर्स की सूची में कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, डैम कैपिटल एडवाइजर्स, एचडीएफसी बैंक, आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज, एवेन्डस कैपिटल, मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, जेएम फाइनेंशियल, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, जेपी मॉर्गन इंडिया, पेंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स, आनंद राठी एडवाइजर्स, एक्विरस कैपिटल, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, एक्सिस कैपिटल और 360 वन वैम शामिल हैं। आखिर कैसे कमाई करता है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज? ज़ेरोधा के विश्लेषण के अनुसार, NSE के राजस्व के कई अलग-अलग स्रोत हैं। इसमें ट्रांजैक्शन चार्ज, लिस्टिंग सेवाएं, डेटा सेंटर चार्ज, डेटा कनेक्टिविटी शुल्क, लाइसेंसिंग और क्लियरिंग व सेटलमेंट सेवाएं शामिल हैं। वित्त वर्ष FY26 में एक्सचेंज ने परिचालन से कुल 16,600 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था। इस कुल कमाई का लगभग 79% हिस्सा केवल ट्रांजैक्शन चार्ज से ही आया था। इस ट्रांजैक्शन चार्ज के भीतर, इक्विटी ट्रांजैक्शन से 1,500 करोड़ रुपये और इक्विटी फ्यूचर्स से 1,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। लेकिन NSE की कमाई का सबसे बड़ा इंजन इक्विटी ऑप्शंस रहा है, जिससे लगभग 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो कुल कमाई का 60% है। इस बड़े मुनाफे का मुख्य आधार केवल एक इंस्ट्रूमेंट रहा है, जो कि निफ्टी 50 वीकली ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट है। लगभग एक दशक पहले न के बराबर रहने वाला यह कॉन्ट्रैक्ट आज भारतीय वित्तीय बाजार की मुख्य धड़कन बन चुका है। बाकी बचा 21% राजस्व मुख्य रूप से डेटा कनेक्टिविटी और को-लोकेशन सेवाओं से आता है। बड़े ट्रेडिंग संस्थान और फर्में सीधे NSE के मैचिंग इंजन से तेज कनेक्शन के लिए भारी भुगतान करती हैं। ये कंपनियां अपने सर्वर को NSE के डेटा सेंटर के अंदर स्थापित करती हैं ताकि उनके ऑर्डर्स माइक्रोसेकंड पहले पहुंच सकें। इस खास सेवा से एक्सचेंज को लगभग 1,100 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। इसके अतिरिक्त, पिछले वित्त वर्ष में लिस्टिंग सेवाओं से भी एक्सचेंज ने 350 करोड़ रुपये कमाए थे। इसका आप पर असर • निवेशकों के लिए: भारत के अब तक के सबसे बड़े IPO में निवेश करने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी खरीदने का अवसर प्राप्त होगा। • टैक्स और रिटर्न पर असर: कॉरपोरेट टैक्स और डिविडेंड टैक्स के गणित को समझकर खुदरा निवेशक अपने निवेश और मिलने वाले डिविडेंड पर लगने वाले भारी टैक्स के बारे में बेहतर वित्तीय योजना बना सकते हैं। सवाल-जवाब 1. एनएसई के आगामी आईपीओ का अनुमानित आकार क्या है? एनएसई के आईपीओ का अनुमानित आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये है, जो इसे भारतीय बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बना सकता है। 2. नितिन कामथ एनएसई को कैश मशीन क्यों कहते हैं? कामथ बताते हैं कि एनएसई का डिविडेंड पेआउट रेशियो 84% है। वित्त वर्ष FY26 में इसने 10,300 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया और 8,660 करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में बांटे। 3. एनएसई का पूरा आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में क्यों है? यह पूरा आईपीओ 14.89 करोड़ शेयरों का ओएफएस है, जिसका मतलब है कि मौजूदा संस्थागत शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और इसका सारा पैसा उनके पास जाएगा, न कि एक्सचेंज के पास। 4. एनएसई अपने राजस्व का अधिकांश हिस्सा कैसे कमाता है? वित्त वर्ष FY26 में एनएसई ने 16,600 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया, जिसमें से 79% ट्रांजैक्शन चार्ज से आया। इसमें मुख्य योगदान निफ्टी 50 वीकली ऑप्शंस का था जिससे 10,000 करोड़ रुपये मिले। https://trendkia.com/business/kya-nse-sachamucha-nota-chhapane-ki-mashina-hai-janen-kyon-zerodha-ke-nithin-kamath-ne-bharata-ke-sabase-bare-ipo-ko-lekara-kahi-y-2195 TrendKia — Har trend, sabse pehle.