{
  "type": "article",
  "title": "क्यूंगहून किम का आकलन, सात फीसदी से अधिक रफ्तार के दम पर जल्द तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनेगा भारत",
  "summary": "कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के अर्थशास्त्री क्यूंगहून किम के अनुसार लगातार सात प्रतिशत से अधिक की मजबूत आर्थिक वृद्धि भारत को 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना देगी।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार को लगातार समर्थन मिल रहा है। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक जैसे दुनिया के प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने चालू वित्त वर्ष और आने वाले साल के लिए देश की विकास दर के अनुमानों को संशोधित करते हुए सात प्रतिशत से ऊपर पहुंचा दिया है। कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी में दक्षिण एशिया मामलों के प्रमुख क्यूंगहून किम ने इस निरंतर गति को ऐतिहासिक और असाधारण करार दिया है। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में भारत का आर्थिक प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला रहा है।\n\nमहामारी की मंदी के बाद दर्ज की गई तेज रफ्तार\nकोरोना वायरस महामारी के समय लगे झटकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत का संकुचन देखा गया था। इस तीव्र गिरावट के बाद वर्ष 2021 में देश ने जबरदस्त आर्थिक वापसी करते हुए 9.7 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की। इस तेज उछाल के बाद के चार वर्षों में भी अर्थव्यवस्था ने अपनी गति खोने नहीं दी और हर साल सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर बनाए रखी। क्यूंगहून किम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि तिमाही आंकड़ों के सामने आने के बाद कई वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने अपने वृद्धि अनुमानों में लगातार बढ़ोतरी की है, और वह खुद भी अपने आकलनों को बार-बार ऊपर की ओर संशोधित करने वाले विशेषज्ञों में शामिल रहे हैं।\n\n \n\nबीते दो दशकों के रिकॉर्ड के करीब पहुंचा प्रदर्शन\nलगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की गति से आगे बढ़ना भारतीय आर्थिक इतिहास का एक दुर्लभ पड़ाव है। इससे पहले भारत ने ऐसा असाधारण दौर 2003 से 2007 के बीच देखा था, जब देश ने ब्रिक समूह के प्रमुख सदस्य के रूप में पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। विश्लेषकों का मानना है कि यदि चालू अनुमान जमीनी हकीकत में बदलते हैं, तो भारत अपने उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत दर्ज की गई है। सन 1960 के बाद से पांच साल की अवधि के औसत को देखें, तो यह अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है, जो केवल 2003 से 2007 के 7.89 प्रतिशत के शिखर से मामूली रूप से पीछे है।\n\nचार ट्रिलियन डॉलर के आधार पर वृद्धि का व्यापक महत्व\nवर्तमान विकास दर की तुलना यदि दो दशक पुराने दौर से की जाए, तो अर्थव्यवस्था का आकार एक बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। वर्ष 2007 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी मात्र एक ट्रिलियन डॉलर से कुछ ही अधिक था, जबकि आज देश की अर्थव्यवस्था लगभग चार ट्रिलियन डॉलर के विशाल स्तर पर पहुंच चुकी है। बड़े आर्थिक आकार पर सात प्रतिशत की विकास दर हासिल करना छोटे आधार की तुलना में कहीं अधिक मूल्य जोड़ता है। इसका अर्थ यह है कि मौजूदा समय में प्रत्येक प्रतिशत की वृद्धि से वास्तविक उत्पादन, औद्योगिक विस्तार और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व पूंजी का प्रवाह हो रहा है।\n\nवर्ष 2030 तक हासिल हो सकता है तीसरा पायदान\nक्यूंगहून किम का विश्लेषण बताता है कि यह निरंतर गति भारत को 2030 के आसपास विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बना देगी। 1.4 अरब की आबादी वाले विकासशील देश के लिए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऐसी वृद्धि कायम रखना बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है। हालांकि रोजगार निर्माण, बुनियादी ढांचे के संतुलन और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़ी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं, लेकिन मौजूदा आर्थिक संकेतकों की दिशा पूरी तरह सकारात्मक बनी हुई है। आने वाली तिमाहियों के आंकड़े आने के बाद भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा भारत के विकास अनुमानों को और बेहतर किए जाने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।\n\nइसका आप पर असर\nअर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि दर देश में व्यापार, रोजगार और निवेश के व्यापक अवसर तैयार करती है।\n\n• भारत में प्रभाव: सात प्रतिशत से अधिक की निरंतर जीडीपी वृद्धि से घरेलू उद्योगों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नई नौकरियों के सृजन को सीधा सहारा मिलेगा। मजबूत आर्थिक आधार से आम नागरिकों के लिए ऋण उपलब्धता और वेतन वृद्धि के अवसरों में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: दुनिया की सबसे तेज रफ्तार प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने से भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और संस्थागत पूंजी का प्रवाह तेज होगा। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में दीर्घकालिक पूंजी आवंटन करने वाली वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक शीर्ष निवेश केंद्र बना रहेगा।\n• घरेलू उपभोक्ताओं के लिए: लगभग चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में आय स्तर बढ़ने से उपभोक्ता खर्च और व्यक्तिगत वित्तीय संपत्तियों में स्थिरता आएगी। मजबूत विकास दर सरकार को सार्वजनिक सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं में अधिक राजस्व खर्च करने का अवसर देती है।\n• व्यावसायिक उपक्रमों के लिए: लगातार आर्थिक विस्तार से छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बाजार में मांग की निरंतरता बनी रहेगी। बढ़ती मांग व्यवसायों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई तकनीकी साझेदारियां विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह आर्थिक उपलब्धि कई घरेलू सुधारों, उपभोक्ता मांग और महामारी के बाद बुनियादी ढांचे पर भारी पूंजीगत व्यय के समन्वय के कारण संभव हुई है।\n\n• महामारी के बाद तीव्र सुधार: वर्ष 2020 में 5.8 प्रतिशत के संकुचन के बाद भारतीय बाजार ने 2021 में 9.7 प्रतिशत की जोरदार वापसी की। इस तेज बदलाव ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया और निर्माण तथा विनिर्माण क्षेत्रों में तुरंत नई गति भर दी।\n• बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय: सार्वजनिक अवसंरचना, राजमार्गों और डिजिटल नेटवर्क पर बढ़े हुए सरकारी व्यय ने निजी निवेश को बढ़ावा दिया। इसी पूंजीगत प्रवाह ने पिछले चार वर्षों में विकास दर को लगातार सात प्रतिशत के ऊपर बनाए रखने में मदद की।\n• वैश्विक एजेंसियों का विश्वास: विश्व बैंक, आईएमएफ और एशियाई विकास बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं ने देश की आंतरिक मांग और मजबूत सेवा निर्यात को देखते हुए अपने विकास अनुमानों को बार-बार बढ़ाया है। इसी आधार पर विश्लेषक 2030 तक दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की संभावना देख रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्यूंगहून किम के अनुसार भारत कब तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?\nकोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी के अर्थशास्त्री क्यूंगहून किम के अनुसार भारत 2030 के आसपास विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन जाएगा।\n\n2. किन प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत के विकास अनुमानों को सात प्रतिशत से अधिक किया है?\nविश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक ने चालू और आगामी वर्ष के लिए भारत के जीडीपी अनुमानों को बढ़ाकर सात प्रतिशत से ऊपर किया है।\n\n3. वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत विकास दर कितनी रही है?\nइस पांच साल की अवधि में भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत दर्ज की गई, जो 1960 के बाद से दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि दर है।\n\n4. वर्ष 2007 और वर्तमान में भारत की जीडीपी में क्या बड़ा अंतर है?\nवर्ष 2007 में भारत की जीडीपी एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी ही अधिक थी, जबकि वर्तमान में यह लगभग चार ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/kyunghoon-kim-ka-akalana-sata-phisadi-se-adhika-raphtara-ke-dama-para-jalda-tisari-bari-arthika-takata-banega-india-48827",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-17",
  "tags": [
    "भारतीय अर्थव्यवस्था",
    "जीडीपी वृद्धि",
    "विश्व बैंक",
    "आईएमएफ",
    "क्यूंगहून किम",
    "आर्थिक विकास दर"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}