# लखीमपुर खीरी के रेशम की देश भर में मांग, बंगाल और बनारस से आ रहे व्यापारी, किसानों की हो रही बंपर कमाई

> उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान रेशम उत्पादन से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। पश्चिम बंगाल, बनारस, आजमगढ़ और मऊ के व्यापारी यहां से रेशम खरीदने पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों की साल में चार बार कमाई हो रही है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/lakhimpur-kheri-ke-resham-ki-maang-bengal-aur-banaras-se-aa-rahe-vyapaari-10890 · **Language:** Hindi
**Tags:** लखीमपुर खीरी, रेशम उत्पादन, उत्तर प्रदेश किसान, शहतूत की खेती, रेशम कोकून, कृषि व्यवसाय

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर रेशम उत्पादन के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। इस काम से जहां किसानों को बेहतरीन मुनाफा मिल रहा है, वहीं खीरी जिले को देश भर में एक नई पहचान भी हासिल हुई है। पश्चिम बंगाल, बनारस, आजमगढ़ और मऊ जैसे प्रमुख वस्त्र केंद्रों से व्यापारी सीधे यहां रेशम की खरीदारी करने के लिए आ रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों की अच्छी खासी कमाई हो रही है और वे आसानी से लाखों रुपये कमा रहे हैं।

## रेशम कीट पालन में पांचवें स्थान पर खीरी
रेशम कीट उत्पादन के मामले में खीरी जिला राज्य में पांचवें पायदान पर है। इस क्षेत्र में लगभग 4,000 लोग पूरी तरह से रेशम कीट उत्पादन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। यहां उत्पादित होने वाले रेशम का उपयोग मुख्य रूप से साड़ियां और अन्य बारीक कपड़े तैयार करने में किया जाता है, यही वजह है कि दूर-दूर से व्यापारी इस जिले का रुख करते हैं और यहां से कच्चा माल खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं।

## पारंपरिक गन्ने की खेती के मुकाबले चार गुना फायदा
रेशम विभाग के उपनिदेशक अरविंद कुमार ने जानकारी दी है कि लखीमपुर खीरी जनपद पारंपरिक रूप से बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। हालांकि, अब किसान गन्ने के साथ-साथ रेशम उत्पादन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि रेशम से साल भर में चार बार आसानी से कमाई की जा सकती है, जबकि गन्ने की फसल से साल में केवल एक ही बार मुनाफा हाथ लगता है।

पिछले वर्षों तक स्थिति यह थी कि यहां जितना भी रेशम उत्पादन होता था, उसका सारा हिस्सा पश्चिम बंगाल और आजमगढ़ के व्यापारी आकर खरीद लेते थे। लेकिन अब विभाग ने एक नई पहल की योजना बनाई है जिसके तहत स्थानीय स्तर पर ही रेशम के काम को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।

## कोकून की कीमतें और शहतूत की खेती का दायरा
बाजार में रेशम के कोकून की क्वालिटी के आधार पर अलग-अलग दाम तय किए जाते हैं। अच्छी क्वालिटी का रेशम कोकून 300 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकता है। वहीं, मध्यम क्वालिटी का रेशम कोकून 200 रुपये से लेकर 250 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है। खीरी जिले में मुख्य रूप से पीले और सफेद दोनों ही प्रकार के रेशम का उत्पादन किया जाता है। इस पूरे कारोबार को समर्थन देने के लिए जिले में लगभग 70 एकड़ भूमि पर शहतूत के पेड़ों की खेती की जा रही है, जो रेशम के कीटों का मुख्य आहार होते हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी फसलों के अलावा अन्य विकल्पों के महत्व को रेखांकित करता है।

**लखीमपुर खीरी में:** स्थानीय किसानों को साल में चार बार आय का नियमित स्रोत मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. लखीमपुर खीरी जिला रेशम उत्पादन में किस स्थान पर है?
खीरी जिला रेशम कीट उत्पादन के मामले में पांचवें स्थान पर है।

### 2. रेशम खरीदने के लिए किन राज्यों और शहरों से व्यापारी आ रहे हैं?
व्यापारी पश्चिम बंगाल, बनारस, आजमगढ़ और मऊ से रेशम की खरीदारी करने के लिए पहुंच रहे हैं।

### 3. अच्छी क्वालिटी का रेशम कोकून किस भाव पर बिक रहा है?
अच्छी क्वालिटी का रेशम कोकून 300 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकता है।

### 4. खीरी जिले में कितने एकड़ में शहतूत के पेड़ों की खेती होती है?
खीरी जिले में लगभग 70 एकड़ भूमि पर शहतूत के पेड़ों की खेती की जाती है।

## प्रेरणा और सबक
**विविधता अपनाएं:** पारंपरिक एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय ऐसी कृषि पद्धतियों को चुनें जो साल में कई बार मुनाफा दे सकें।

**स्थानीय संसाधनों का उपयोग:** शहतूत की खेती और कीट पालन जैसे क्षेत्रीय संसाधनों का सही उपयोग करके बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।

**बाजार की मांग पहचानें:** दूर-दराज के राज्यों के व्यापारियों की मांग को समझकर अपने उत्पाद की आपूर्ति उनके तक पहुंचाएं।

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