# उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आधुनिक कृषि उपकरणों पर पचास प्रतिशत तक सब्सिडी, बीस अक्टूबर तक करें आवेदन

> लखीमपुर खीरी में कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है। इच्छुक किसान आधिकारिक पोर्टल पर 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक जमानत राशि जमा कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/lakhimpur-kheri-men-adhunika-krishi-upakaranon-para-pachasa-pratishata-taka-sabsidi-bisa-aktubara-taka-karen-avedana-45174 · **Language:** Hindi
**Tags:** लखीमपुर खीरी, कृषि यंत्र अनुदान, कृषि विभाग उत्तर प्रदेश, सुपर सीडर सब्सिडी, कृषि ड्रोन योजना, किसानों के लिए योजना

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती की लागत घटाने और पैदावार की रफ्तार बढ़ाने के मकसद से कृषि विभाग ने एक अहम पहल शुरू की है। जिले के काश्तकारों को अब महंगे कृषि उपकरण खरीदने के लिए अपनी जेब से पूरी रकम नहीं चुकानी पड़ेगी। विभाग की अलग-अलग योजनाओं के तहत आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से लेकर 50 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसकी समय सीमा 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक तय की गई है। समय रहते प्रक्रिया पूरी कर लेने वाले किसान आधुनिक तकनीकी उपकरणों को बेहद कम खर्च में अपने खेतों तक ला सकेंगे।

## खेती में आधुनिक मशीनों से घटेगा खर्च और बचेगा समय
लखीमपुर खीरी जिले की कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गन्ना, धान, गेहूं और दलहनी-तिलहनी फसलों पर टिकी हुई है। पारंपरिक तरीकों से इन फसलों की जुताई, बुवाई, सिंचाई, रख-रखाव और कटाई करने में किसानों को भारी शारीरिक श्रम और समय लगाना पड़ता है। इसके अलावा मजदूरों की कमी और मौसम के बदलते मिजाज के कारण अक्सर कटाई या बुवाई में देरी हो जाती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से ये सभी काम कुछ ही घंटों में पूरे किए जा सकते हैं, जिससे श्रम और समय दोनों की भारी बचत होती है।

बाजार में आधुनिक कृषि मशीनों के दाम काफी ऊंचे होते हैं, जिसके कारण छोटे और सीमांत जोत वाले किसान अपनी सीमित पूंजी के चलते इन्हें सीधे खरीदने का साहस नहीं जुटा पाते। इसी वित्तीय अंतर को पाटने के लिए कृषि विभाग ने सब्सिडी व्यवस्था लागू की है। योजना के जरिए जब 40 से 50 फीसदी तक लागत सरकार वहन करेगी, तब साधारण किसान भी उन्नत मशीनरी खरीद सकेंगे। इससे न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि डीजल और मानव श्रम के खर्च में कटौती होने से खेती का कुल मुनाफा भी बढ़ जाएगा।

## ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और टोकन व्यवस्था
कृषि यंत्रों पर वित्तीय सहायता प्राप्त करने के इच्छुक किसानों को विभाग द्वारा तय की गई समय सीमा के अंदर ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन जनरेट करना होगा। इसके लिए किसानों को उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.agriculture.up.gov.in पर जाना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है ताकि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल होने से पहले किसानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका पूर्व पंजीकरण कृषि विभाग के पोर्टल पर सक्रिय है। इसके साथ ही, विभाग के डेटाबेस में दर्ज मोबाइल नंबर का चालू रहना अनिवार्य है, क्योंकि इसी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी और टोकन प्राप्त होगा। यदि मोबाइल नंबर बंद है या बदल गया है, तो आवेदन की प्रक्रिया अटक सकती है। ऑनलाइन पोर्टल पर किसानों को संबंधित यंत्र, योजना का नाम, पात्रता की शर्तें और अनुदान की विस्तृत दरें स्पष्ट रूप से दिखाई देंगी। आवेदन की अंतिम मियाद 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक निर्धारित है, इसलिए अंतिम पलों में सर्वर पर लोड बढ़ने की समस्या से बचने के लिए किसानों को पहले ही आवेदन निबटाने की सलाह दी गई है।

## यंत्रों की बुकिंग के लिए जमानत राशि के नए नियम
कृषि यंत्रों के आवंटन को पारदर्शी और गंभीर आवेदकों तक सीमित रखने के लिए शासन ने जमानत धनराशि जमा करने की व्यवस्था अनिवार्य की है। जमानत राशि का निर्धारण यंत्र पर मिलने वाले कुल अनुदान के आधार पर दो अलग-अलग श्रेणियों में किया गया है। पहली श्रेणी में वे कृषि यंत्र रखे गए हैं जिन पर 10,001 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक का अनुदान देय है। इन उपकरणों की बुकिंग के लिए किसान को 2,500 रुपये की जमानत धनराशि जमा करनी होगी।

दूसरी श्रेणी में वे बड़े और भारी कृषि उपकरण आते हैं जिन पर सरकारी अनुदान की रकम 1,00,000 रुपये से अधिक है। ऐसे यंत्रों के लिए किसानों को 5,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी। यह राशि जमा कराने के पीछे का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक जरूरतमंद किसान ही बुकिंग करें और तय लक्ष्य निरर्थक आवेदनों से न भर जाएं। इसलिए आवेदन फॉर्म भरने से पहले किसानों को यह अच्छी तरह जांच लेना चाहिए कि वे जिस उपकरण का चयन कर रहे हैं, उस पर कितना अनुदान मिल रहा है और उसके अनुरूप कितनी जमानत राशि चालान या ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी है।

## इस बार ब्लॉक स्तर के बजाय जिला स्तर पर होगा चयन
कृषि विभाग ने इस सत्र में चयन प्रक्रिया के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया है। उप कृषि निदेशक गिरीशचंद्र के अनुसार, इस बार कृषि यंत्रों की बुकिंग और आवंटन का काम विकासखंड स्तर पर नहीं किया जाएगा। पहले ब्लॉक स्तर पर लक्ष्य बांटे जाते थे, लेकिन इस बार जिले के विभिन्न कार्यक्रमों में बचे हुए लक्ष्यों को एक साथ जोड़कर जिला स्तर पर ही सीधे बुकिंग और लाभार्थियों का चयन संपन्न किया जाएगा। इससे पूरे जिले के किसानों को समान अवसर मिलेगा और प्रक्रिया अधिक केंद्रीकृत एवं पारदर्शी बनेगी।

जिला स्तर पर होने वाली इस बुकिंग में विभिन्न कृषि गतिविधियों से जुड़े उपकरणों को शामिल किया गया है। इनमें जमीन तैयार करने वाले हल और टिलर से लेकर बुवाई, फसल की कटाई, पराली प्रबंधन, खाद का छिड़काव और पौध संरक्षण से जुड़े उपकरण शामिल हैं।

## सब्सिडी के दायरे में आने वाले कृषि यंत्रों की पूरी सूची
योजना के तहत सूचीबद्ध कृषि यंत्रों का दायरा काफी व्यापक है, जिसमें खेत की तैयारी से लेकर फसल कटाई के बाद के प्रबंधन तक की मशीनें मौजूद हैं

- **फसल अवशेष और पराली प्रबंधन उपकरण:** सुपर सीडर, स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर और टर्बो सीडर जैसे उपकरण इस सूची में प्रमुखता से शामिल हैं। ये मशीनें धान की कटाई के बाद बची पराली को बिना जलाए मिट्टी में मिलाकर अगली फसल की बुवाई को आसान बनाती हैं।
- **आधुनिक निगरानी और छिड़काव तंत्र:** कीटनाशकों और तरल उर्वरकों के सटीक छिड़काव के साथ-साथ फसलों की निगरानी के लिए आधुनिक कृषि ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही बूम टाइप स्प्रेयर और फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर भी अनुदान पर दिए जा रहे हैं।
- **कटाई और जुताई उपकरण:** स्वचालित रीपर और ट्रैक्टर चालित रीपर की मदद से फसलों की तेजी से कटाई संभव होती है। वहीं जमीन को भुरभुरा और समतल बनाने के लिए रोटावेटर की बुकिंग की जा सकती है।
- **बुवाई और अन्य विशेष मशीनें:** बीज और खाद को सटीक गहराई पर डालने के लिए सीड ड्रिल, मल्टीक्रॉप थ्रेशर, ब्रॉड बेड फरो-प्लांटर, रिजर और मिलेट पार्लर भी योजना में शामिल हैं। इसके अलावा गन्ने की खेती के लिए विशेष शुगरकेन रेटून मैनेजर और विभिन्न पादप रक्षा यंत्रों पर भी अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

## आवेदन करते समय किसान इन बातों का रखें विशेष ध्यान
कृषि विभाग की इस योजना का सुचारू लाभ लेने के लिए किसानों को कुछ बुनियादी सावधानियां बरतनी होंगी। सबसे पहले यह जांच लें कि उनका किसान पंजीकरण नंबर पोर्टल पर अद्यतन है और बैंक खाता आधार से लिंक है। जिस मोबाइल नंबर से टोकन बनना है, वह चालू होना चाहिए ताकि संदेश समय पर मिल सके। किसान जिस मशीन को चुन रहे हैं, उसकी तकनीकी क्षमता और अनुदान पात्रता के नियमों को भली-भांति पढ़ लें। 20 अक्टूबर की रात 12 बजे के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा, इसलिए अंतिम तिथि से पहले ही सारी कागजी और वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी कर लें।

## इसका आप पर असर
इस योजना से लखीमपुर खीरी के किसानों को महंगे आधुनिक कृषि उपकरण बाजार से आधी कीमत पर प्राप्त करने का सीधा अवसर मिलेगा।

- **भारत में:** आधुनिक कृषि उपकरणों को अपनाकर किसान पराली जलाने की समस्या को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर पर फसल अवशेष प्रबंधन की लागत घटती है और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहती है।
- **लखीमपुर खीरी में:** जिले के गन्ना, धान और गेहूं उगाने वाले किसानों की जुताई, बुवाई और कटाई में लगने वाले भारी श्रम खर्च में बड़ी कमी आएगी। पात्र किसान 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक 2,500 या 5,000 रुपये की जमानत राशि देकर 50 प्रतिशत तक की छूट का लाभ उठा सकते हैं।
- **छोटे किसानों के लिए:** सुपर सीडर, रोटावेटर और रीपर जैसी महंगी मशीनें अब सीमांत काश्तकारों की पहुंच में होंगी। उपकरण खरीदने के बाद किराए पर काम कराने का खर्च बचेगा और समय पर बुवाई होने से पैदावार बढ़ेगी।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** ब्लॉक के बजाय जिला स्तर पर केंद्रीकृत बुकिंग होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। किसानों को सीधे आधिकारिक पोर्टल से टोकन मिलेगा जिससे बिना किसी सिफारिश के वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
खेती में बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और फसल अवशेष प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि विभाग ने यह अनुदान कार्यक्रम शुरू किया है।

- **महंगी मशीनरी की पहुंच बढ़ाना:** सुपर सीडर, मल्चर और ड्रोन जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की बाजार कीमत आम किसानों की क्रय क्षमता से काफी अधिक होती है। 40 से 50 प्रतिशत तक वित्तीय अनुदान उपलब्ध कराकर सरकार छोटे और मझोले किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने में सक्षम बना रही है।
- **फसल अवशेष और पराली की समस्या:** धान और गन्ने की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाए बिना निपटाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर और सुपर सीडर जैसे यंत्र पराली को जमीन में ही मिलाकर खाद में बदल देते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण रुकता है।
- **पारदर्शिता और केंद्रीकृत वितरण:** पूर्व में ब्लॉक स्तर पर बुकिंग कराने में लक्ष्य सीमित रह जाते थे और कई विकासखंडों में लक्ष्य शेष बच जाते थे। उप कृषि निदेशक के अनुसार बचे हुए लक्ष्यों का पूरा उपयोग करने और निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के लिए इस बार जिला स्तर पर केंद्रीकृत बुकिंग का फैसला लिया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. लखीमपुर खीरी में कृषि यंत्रों पर कितना अनुदान मिल रहा है?
कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है।

### 2. सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख क्या है?
किसान 20 अक्टूबर की रात 12 बजे तक कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

### 3. आवेदन करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट कौन सी है?
आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और टोकन प्राप्त करने के लिए किसानों को www.agriculture.up.gov.in पर जाना होगा।

### 4. कृषि यंत्रों की बुकिंग के लिए कितनी जमानत राशि जमा करनी होगी?
10,001 से 1 लाख रुपये तक अनुदान वाले यंत्रों के लिए 2,500 रुपये और 1 लाख रुपये से अधिक अनुदान वाले यंत्रों के लिए 5,000 रुपये जमानत राशि तय की गई है।

### 5. इस बार बुकिंग प्रक्रिया में क्या प्रशासनिक बदलाव किया गया है?
उप कृषि निदेशक गिरीशचंद्र के अनुसार इस बार बुकिंग विकासखंड स्तर पर नहीं होगी, बल्कि जिला स्तर पर केंद्रीकृत रूप से की जाएगी।

### 6. योजना के तहत कौन-कौन से प्रमुख कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
सूची में सुपर सीडर, मल्चर, स्ट्रॉ चॉपर, कृषि ड्रोन, रोटावेटर, सीड ड्रिल, रीपर और शुगरकेन रेटून मैनेजर जैसे कई आधुनिक उपकरण शामिल हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._