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  "title": "सहारनपुर में मात्र 10 रुपये में सीखें शहद उत्पादन, 16 सितंबर से शुरू होगा 90 दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में उद्यान विभाग की ओर से युवाओं के लिए 90 दिवसीय मौनपालन प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। महज 10 रुपये के शुल्क में शुरू होने वाले इस कोर्स के लिए ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में शुमार सहारनपुर में कृषि आधारित व्यवसायों को नई दिशा देने के लिए एक विशेष पहल शुरू की जा रही है। यहां के औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र में वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खी पालन का हुनर सीखने का सुनहरा मौका युवाओं को मिलने जा रहा है। स्थानीय स्तर पर शहद उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण व शहरी युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोलने के मकसद से इस तीन महीने यानी 90 दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। यह पूरा सत्र आगामी 16 सितंबर से आरंभ होकर 15 दिसंबर तक अनवरत चलेगा, जिसमें भाग लेने वाले अभ्यर्थियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों प्रकार की जानकारियां दी जाएंगी।\n\n \n\nशहद उत्पादन का हब बनता सहारनपुर\n सहारनपुर जिला पहले से ही देश के नक्शे पर एक बड़े शहद उत्पादक केंद्र के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। यहां उत्पादित होने वाली शहद की मिठास न केवल देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी मांग बनी रहती है। इस खास कृषि और बागवानी आधारित कारोबार की संभावनाओं को और अधिक विस्तृत करने के लिए जिला प्रशासन और उद्यान विभाग लगातार सक्रिय हैं। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और यहां का कृषि बहुल वातावरण मधुमक्खियों के संवर्धन के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है, जिसके चलते पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय स्तर पर ऐसी कई इकाइयां स्थापित हुई हैं और लोगों को आजीविका का ठोस जरिया मिला है।\n\n \n\nप्रशिक्षण से जुड़ी जरूरी शर्तें और शुल्क\n इस बहुपयोगी कोर्स का हिस्सा बनने के इच्छुक युवाओं के लिए विभाग ने बेहद मामूली शुल्क निर्धारित किया है ताकि आर्थिक तंगी किसी के रास्ते में रुकावट न बने। केवल 10 रुपये का मामूली पंजीकरण शुल्क जमा करके कोई भी योग्य अभ्यर्थी इस प्रशिक्षण का लाभ उठा सकता है। हालांकि विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन के खानपान और ठहरने की व्यवस्था अभ्यर्थियों को अपने स्तर पर ही करनी होगी। मौन पालन प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कोर्स में हिस्सा लेने के लिए अंतिम तिथि 15 सितंबर तय की गई है, इसलिए इच्छुक लोग तय समय से पहले अपना पंजीकरण पूरा करवा लें।\n\n \n\nयोग्यता, चयन प्रक्रिया और आवेदन का तरीका\n इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए कुछ बुनियादी शैक्षणिक और आयु संबंधी शर्तें रखी गई हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन रखी गई है, जिसमें भाग लेने वाले की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और शैक्षिक योग्यता कम से कम कक्षा 8 पास निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र के साथ आवेदक को अपनी एक पासपोर्ट साइज फोटो और पहचान के लिए आधार कार्ड की कॉपी संलग्न करनी होगी। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखते हुए पहले आओ और पहले पाओ के नियम के आधार पर केवल शुरुआती 40 अभ्यर्थियों का ही इस विशेष बैच के लिए चयन किया जाएगा।\n\n \n\nप्रमाण पत्र और स्वरोजगार के नए अवसर\n नब्बे दिन का यह विशेष प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी सफल प्रतिभागियों को विभाग की तरफ से एक आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद प्रशिक्षु देश में कहीं भी मौनपालन से जुड़े आयोजनों, उपक्रमों या कार्यशालाओं में आधिकारिक तौर पर हिस्सा ले सकेंगे। इसके साथ ही सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाकर युवा बैंक से जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं और अपना खुद का मधुमक्खी पालन का व्यवसाय बड़े पैमाने पर शुरू कर सकते हैं। इससे न केवल उद्यमी खुद आत्मनिर्भर बनेंगे बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने में सक्षम होंगे, साथ ही मधुमक्खियों द्वारा होने वाले परागण से स्थानीय फसलों की पैदावार में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह प्रशिक्षण कार्यक्रम सहारनपुर और आसपास के ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सस्ता अवसर लेकर आया है।\n\n• भारत में: देश भर के कृषि प्रधान जिलों में इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं को पारंपरिक खेती से हटकर लाभकारी कृषि-व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।\n\n• सहारनपुर में: स्थानीय युवाओं को केवल 10 रुपये के मामूली शुल्क में वैज्ञानिक बीकीपिंग सीखने का मौका मिलेगा, जिससे वे शून्य प्रतिशत ब्याज पर लोन लेकर खुद की यूनिट खड़ी कर सकेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसहारनपुर में यह मौनपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्र की भौगोलिक अनुकूलता और शहद उद्योग की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर शुरू किया जा रहा है।\n\n• अनुकूल जलवायु: क्षेत्र का कृषि आधारित वातावरण और भौगोलिक परिस्थितियां मधुमक्खी पालन के लिए अत्यधिक उपयुक्त हैं, जिससे उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।\n\n• बेरोजगारी से राहत: ग्रामीण और अर्ध-शहरी युवाओं को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्यान विभाग हर साल ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सहारनपुर में यह मौनपालन प्रशिक्षण कब से शुरू होगा?\nयह 90 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 सितंबर से शुरू होकर 15 दिसंबर तक चलेगा।\n\n2. प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण शुल्क कितना रखा गया है?\nइस कोर्स के लिए अभ्यर्थियों को केवल 10 रुपये का पंजीकरण शुल्क देना होगा।\n\n3. आवेदन करने की अंतिम तिथि क्या है?\nइच्छुक अभ्यर्थियों को 15 सितंबर से पहले अपना आवेदन करना होगा।\n\n4. आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है या ऑफलाइन?\nआवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन रखी गई है।\n\n5. प्रशिक्षण के लिए क्या योग्यता जरूरी है?\nआवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और उसने कम से कम आठवीं कक्षा पास की हो।\n\n6. एक बैच में कितने अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा?\nपहले आओ और पहले पाओ के आधार पर केवल शुरुआती 40 व्यक्तियों को ही चुना जाएगा।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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