# लेनदेन शुल्क के विरोध में मोबाइल फोन दुकानदार 2 अक्टूबर को नहीं लेंगे यूपीआई से भुगतान

> दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने के प्रस्ताव के विरोध में देश भर के मोबाइल खुदरा विक्रेता 2 अक्टूबर को नो यूपीआई डे मनाएंगे।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/lenadena-shulka-ke-virodha-men-mobile-phone-dukanadara-2-aktubara-ko-nahin-lenge-upi-se-bhugatana-39525 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूपीआई, मोबाइल रिटेलर्स, एमडीआर, डिजिटल इंडिया, निर्मला सीतारमण, कारोबार

देश भर के मोबाइल फोन कारोबारी आगामी 2 अक्टूबर को डिजिटल भुगतान स्वीकार न करने का बड़ा फैसला ले चुके हैं। इस सांकेतिक हड़ताल को 'नो यूपीआई डे' का नाम दिया गया है, जिसका सीधा मकसद व्यापारियों पर प्रस्तावित नए वित्तीय शुल्क का कड़ा विरोध दर्ज कराना है। खुदरा विक्रेताओं की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं, तो उनकी मासिक बचत का एक बड़ा हिस्सा अतिरिक्त शुल्कों की भेंट चढ़ जाएगा।

## गांधी जयंती पर क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढकेंगे कारोबारी
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) के दिल्ली-एनसीआर अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तरविंदर सिंह ने इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा सार्वजनिक की है। उनके अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के पावन अवसर पर देश के तमाम खुदरा स्टोरों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढक दिया जाएगा। इस पूरे दिन दुकानदार ग्राहकों से डिजिटल माध्यम के बजाय वैकल्पिक तरीकों से लेन-देन करने का आग्रह करेंगे, जिससे सरकार तक व्यापारियों की परेशानी का स्पष्ट संदेश पहुंच सके।

## प्रस्तावित एमडीआर और नए नियमों का गणित
नये नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतानों पर कारोबारियों से 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वसूलने की तैयारी है। हालांकि, दो आम व्यक्तियों के बीच होने वाले व्यक्तिगत लेन-देन (पी2पी) और 2,000 रुपये तक के छोटे खुदरा भुगतानों को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इसके बावजूद, मोबाइल बाजार में बिकने वाले अधिकांश उत्पाद 2,000 रुपये से अधिक कीमत के होते हैं, इसलिए इस क्षेत्र पर इस शुल्क का सीधा और गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

## छोटे खुदरा व्यापारियों पर भारी वित्तीय चोट का अंदेशा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजे गए एक औपचारिक ज्ञापन में खुदरा संगठन ने अपने आर्थिक नुकसान का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने यूपीआई के जरिए 5 लाख रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले सामान्य दुकानदार को हर माह 2,000 रुपये से 12,000 रुपये का सीधा घाटा झेलना पड़ेगा। पूरे देश के स्तर पर देखा जाए तो छोटे मोबाइल खुदरा विक्रेताओं पर हर महीने तकरीबन 40 करोड़ रुपये और पूरे साल में लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ लाद दिया जाएगा।

## शून्य एमडीआर नीति बहाल रखने की मांग
व्यापारियों का कहना है कि वे आधुनिक तकनीक या नकदी रहित अर्थव्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका असंतोष केवल व्यापारियों की जेब पर पड़ रहे दोहरे बोझ को लेकर है। तरविंदर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर हम डिजिटल इंडिया चाहते हैं, तो यूपीआई पर एमडीआर शून्य ही रहना चाहिए। दुकानदारों की पुरजोर मांग है कि सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई को पहले की तरह शून्य एमडीआर व्यवस्था के अंतर्गत ही संचालित रखे।

## इसका आप पर असर
इस विरोध प्रदर्शन और प्रस्तावित शुल्क से ग्राहकों तथा छोटे दुकानदारों की रोजमर्रा की खरीदारी सीधे तौर पर प्रभावित होगी।

- **खरीदारी पर असर:** आगामी 2 अक्टूबर को मोबाइल दुकानों पर फोन या गैजेट्स खरीदने जाने वाले ग्राहकों को नकदी या कार्ड का सहारा लेना पड़ सकता है। दुकानदार उस दिन यूपीआई क्यूआर कोड स्वीकार नहीं करेंगे, इसलिए ग्राहकों को पहले से नकद व्यवस्था करके जाना चाहिए।
- **महंगे सामानों पर असर:** 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतानों पर व्यापारियों को 0.4 प्रतिशत शुल्क देना होगा। इस अतिरिक्त लागत के कारण कई छोटे दुकानदार बड़े लेन-देन के लिए डिजिटल भुगतान लेने से कतरा सकते हैं।
- **छोटे व्यापारियों की बचत:** महीने में 5 से 30 लाख रुपये का डिजिटल कारोबार करने वाले दुकानदारों की कमाई में हर माह 2,000 से 12,000 रुपये की सीधी कटौती हो सकती है। इससे छोटे खुदरा विक्रेताओं के शुद्ध मुनाफे पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
- **आम ग्राहकों के लेन-देन:** व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले यूपीआई लेन-देन और 2,000 रुपये से कम के भुगतानों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई प्रत्यक्ष वित्तीय शुल्क नहीं लगेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
मोबाइल दुकानदारों का यह कड़ा कदम सरकार की प्रस्तावित शुल्क नीति के चलते उठाया जा रहा है, जिससे खुदरा क्षेत्र में गहरा असंतोष फैल गया है।

- **प्रस्तावित एमडीआर की शुरुआत:** 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने का फैसला इस पूरे विवाद का मुख्य कारण है। व्यापारी इसे अपनी सीमित मार्जिन वाली आय पर बड़ा हमला मान रहे हैं।
- **मुनाफे में भारी गिरावट का डर:** मोबाइल खुदरा कारोबारियों का मार्जिन पहले से ही बेहद कम रहता है, ऐसे में 0.4 प्रतिशत शुल्क कटने से उनकी शुद्ध आय आधी हो सकती है। 5 से 30 लाख के कारोबार पर हजारों रुपये का शुद्ध नुकसान दुकानदारों को असहनीय लग रहा है।
- **संगठन की रणनीति:** ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने अपनी आवाज नीति निर्माताओं तक पहुंचाने के लिए सांकेतिक हड़ताल का रास्ता चुना है। गांधी जयंती के दिन क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढककर व्यापारी सरकार पर इस फैसले को वापस लेने का दबाव बनाना चाहते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दुकानदार 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' क्यों मना रहे हैं?
मोबाइल फोन खुदरा विक्रेता 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क का विरोध करने के लिए यह दिन मना रहे हैं।

### 2. 2 अक्टूबर को खुदरा विक्रेता अपना विरोध कैसे दर्ज कराएंगे?
गांधी जयंती के दिन दुकानदार अपने यूपीआई क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढकेंगे और ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे।

### 3. प्रस्तावित एमडीआर किन भुगतानों पर लागू होगा?
यह शुल्क 15 अक्टूबर से केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यावसायिक लेन-देन पर लागू होगा, जबकि व्यक्तिगत और 2,000 रुपये से कम के भुगतान मुक्त रहेंगे।

### 4. इस नए शुल्क से छोटे मोबाइल दुकानदारों को कितना नुकसान होगा?
हर महीने 5 से 30 लाख रुपये का यूपीआई कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को प्रतिमाह 2,000 से 12,000 रुपये का सीधा शुद्ध नुकसान हो सकता है।

### 5. मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन की सरकार से क्या प्रमुख मांग है?
एसोसिएशन की मांग है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई को पहले की तरह पूरी तरह शून्य एमडीआर व्यवस्था में ही रखा जाए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._