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  "type": "article",
  "title": "महिला उद्यमियों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने बेंगलुरु में शुरू हुआ सम्मेलन, उबुंटू कंसोर्टियम और पेंशनबाज़ार ने एनपीएस बचत पर दिया ज़ोर",
  "summary": "छोटे शहरों की महिला उद्यमियों को एकजुट करने और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बेंगलुरु में 'टुगेदर वी ग्रो' सम्मेलन का 5वां संस्करण आयोजित किया गया, जहाँ एनपीएस अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।",
  "content": "महिला स्वामित्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाने और महिला श्रमिकों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार, 2 सितंबर को बेंगलुरु में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। 'टुगेदर वी ग्रो' (ओगट्टागी बेलेयोना) नाम से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के 5वें संस्करण में विभिन्न क्षेत्रों की महिला उद्यमियों, नीति निर्माताओं और वित्तीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन उबुंटू कंसोर्टियम ऑफ विमेन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशंस द्वारा फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफकेसीसीआई) के सहयोग से किया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला उद्यमिता दिवस के अवसर पर आयोजित इस सेमिनार का मुख्य विषय \"दुनिया भर की महिला उद्यमियों को जोड़ना\" रखा गया था। इस पहल को भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय का भी आधिकारिक समर्थन प्राप्त हुआ, जो देश भर में महिला व्यावसायिक नेटवर्क को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।\n\nसम्मेलन में शामिल हुए प्रमुख नेता और अतिथि\nबेंगलुरु में आयोजित इस उच्च स्तरीय सेमिनार में सरकार और वित्तीय क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन किया और महिलाओं के लिए टिकाऊ आर्थिक नीतियां बनाने पर जोर दिया। उबुंटू कंसोर्टियम की संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी के रत्ना प्रभा ने इस आयोजन की अध्यक्षता की, जिन्होंने महिलाओं के लिए व्यावसायिक अवसरों और वित्तीय सुरक्षा के विस्तार पर चर्चा की। इसके अलावा, पीबी फिनटेक के संयुक्त समूह सीईओ सर्बवीर सिंह और पेंशनबाज़ार के प्रमुख विश्वजीत गोयल भी इस कार्यक्रम में प्रमुखता से उपस्थित रहे। इन दिग्गजों की मौजूदगी ने यह दर्शाया कि जमीनी स्तर के महिला उद्यमिता संगठनों और आधुनिक वित्तीय संस्थानों के बीच साझेदारी कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।\n\nएनपीएस जागरूकता और दीर्घकालिक वित्तीय योजना पर विशेष जोर\nइस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य एजेंडा महिला श्रमिकों और उद्यमियों के बीच राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। आयोजकों ने वित्तीय संस्थाओं के साथ मिलकर एक ऐसी कार्ययोजना पेश की, जिससे महिलाओं में अनुशासित और लंबी अवधि की बचत संस्कृति का विकास किया जा सके। अमूमन देखा जाता है कि असंगठित या छोटे उद्यमों से जुड़ी महिलाएं औपचारिक पेंशन ढांचे से वंचित रह जाती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए इस पहल के जरिए वित्तीय साक्षरता को उद्यमिता विकास कार्यक्रमों से जोड़ा गया है, ताकि व्यावसायिक वृद्धि के साथ-साथ महिला उद्यमियों और उनके कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके।\n\nछोटे शहरों और टियर-2 तथा टियर-3 की महिलाओं का सशक्तिकरण\nउबुंटू कंसोर्टियम ऑफ विमेन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशंस एक गैर-लाभकारी मंच है, जो पूरे भारत से महिला उद्यमी संगठनों को एक साथ लाने का काम करता है। कर्नाटक की पूर्व मुख्य सचिव के रत्ना प्रभा द्वारा स्थापित और संचालित यह संस्थान विभिन्न महिला समितियों और संघों को एकीकृत करता है ताकि कर्नाटक और पूरे देश में सदस्य उद्यमियों के विकास को गति दी जा सके। यह संस्था विशेष रूप से टियर-2, टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों में काम करने वाली महिला उद्यमियों पर अपना ध्यान केंद्रित करती है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के व्यावसायिक मंचों पर उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है।\n\nडिजिटल प्रशिक्षण और विपणन सहायता से मिला नया विस्तार\nछोटे कस्बों की महिला उद्यमियों की चुनौतियों पर बात करते हुए रत्ना प्रभा ने बताया कि छोटे शहरों की व्यावसायिक महिलाओं को विशेष सहयोग की आवश्यकता है, क्योंकि बैंक ऋण के अलावा वे अधिकांश मौजूदा सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर रह जाती हैं। इस खाई को पाटने के लिए कंसोर्टियम इन महिलाओं को व्यापक डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान करता है। इसमें सोशल मीडिया के जरिए व्यापार को आधुनिक बनाने और डिजिटल मार्केटिंग की बारीकियां सिखाने जैसी सहायता शामिल है। उन्होंने बताया कि इस व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ उठाकर कई महिला उद्यमियों ने अपने व्यवसायों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और अपने बाजार का दायरा बड़ा किया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल छोटे शहरों की महिला उद्यमियों और असंगठित क्षेत्र की कामकाजी महिलाओं को औपचारिक वित्तीय सुरक्षा और डिजिटल व्यापारिक अवसरों से सीधा जोड़ती है।\n\n• भारत में: देश भर की महिला उद्यमियों को एनपीएस और दीर्घकालिक बचत योजनाओं के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके माध्यम से महिलाएं अपनी सेवानिवृत्ति के लिए नियमित रूप से छोटी बचत शुरू कर सकती हैं।\n• बेंगलुरु और कर्नाटक में: राज्य में एफकेसीसीआई और उबुंटू कंसोर्टियम के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्रीय महिला व्यापार संघों को मजबूत समर्थन मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमियों के लिए नए बाजार और नेटवर्क के रास्ते खुलेंगे।\n• टियर-2 और टियर-3 शहरों में: छोटे कस्बों की महिला व्यावसायिक इकाइयों को डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया परिवर्तन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद वे बैंक लोन से आगे बढ़कर अपने उत्पादों को बड़े डिजिटल बाजारों में बेच सकेंगी।\n• असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए: छोटे उद्यमों में काम करने वाली महिलाओं को भी व्यवस्थित पेंशन प्रणाली के दायरे में लाया जाएगा। इससे उनकी भविष्य की वित्तीय निर्भरता कम होगी और आपात स्थिति के लिए पूंजी संचित हो सकेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बेंगलुरु में आयोजित 'टुगेदर वी ग्रो' सेमिनार का मुख्य उद्देश्य क्या था?\nइस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों को आपस में जोड़ना, छोटे शहरों की महिलाओं के लिए डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान करना और एनपीएस के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देना था।\n\n2. इस अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किन संस्थाओं ने मिलकर किया?\nइस कार्यक्रम का आयोजन उबुंटू कंसोर्टियम ऑफ विमेन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशंस ने एफकेसीसीआई के सहयोग से किया, जिसे केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय का समर्थन प्राप्त था।\n\n3. उबुंटू कंसोर्टियम की स्थापना किसने की थी और यह किन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है?\nइसकी स्थापना कर्नाटक की पूर्व मुख्य सचिव के रत्ना प्रभा ने की थी। यह संस्था मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों की महिला उद्यमियों के विकास और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करती है।\n\n4. सेमिनार में वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए किस योजना पर विशेष बल दिया गया?\nसेमिनार में महिला श्रमिकों और उद्यमियों के बीच राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अनुशासित बचत आदतें विकसित करने पर जोर दिया गया।\n\nप्रेरणा और सबक\nउबुंटू कंसोर्टियम की यह पहल दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और वित्तीय योजना के साथ छोटे शहरों की महिलाएं भी बड़े आर्थिक बदलाव की संवाहक बन सकती हैं।\n\n• अनुशासित और लंबी अवधि की बचत: व्यापार के साथ-साथ अपने और कर्मचारियों के भविष्य के लिए एनपीएस जैसी पेंशन योजनाओं में नियमित निवेश करना स्थायी सुरक्षा देता है।\n• डिजिटल तकनीकों को अपनाना: छोटे शहरों के व्यवसाय भी सोशल मीडिया और डिजिटल विपणन सीखकर राष्ट्रीय स्तर पर अपने ग्राहक बना सकते हैं।\n• समूह और नेटवर्क की ताकत: अकेले काम करने के बजाय संघों और समितियों से जुड़ने से संस्थागत सहयोग और नए अवसर आसानी से प्राप्त होते हैं।\n• संसाधनों का सही उपयोग: सीमित बैंक ऋणों पर निर्भर रहने के बजाय कौशल विकास और डिजिटल प्रशिक्षण के जरिए व्यवसाय को स्केल करना चाहिए।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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