मलिहाबाद के बागबानों पर मार, जापान और अमेरिका ने यूपी के आम लेने से क्यों मोड़ा मुंह कीटनाशकों की भारी मात्रा और ट्रीटमेंट में खामियों के चलते जापान और अमेरिका ने मलिहाबाद के आम का आयात रोक दिया है, जिससे डेढ़ सौ रुपये में बिकने वाला आम अब 28 से 35 रुपये में लोकल मंडी में बेचना पड़ रहा है। लखनऊ से सटे मलिहाबाद के आम कारोबारियों और बागबानों के लिए यह सीजन उम्मीद के उलट निराशा लेकर आया है। दशकों से जिस फसल की कमाई पर वे टिके थे, वही इस बार उनके गले की फांस बन गई है। वजह है कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, जिसके चलते जापान ने यहां के आम का आयात रोक दिया है। सिर्फ जापान ही नहीं, अमेरिका भी अब इन किसानों का आम नहीं उठा रहा। निर्यात के रास्ते एक के बाद एक बंद खाड़ी और यूरोपीय देशों तक आम भेजना भी मुश्किल हो चला है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का सीधा असर आम के निर्यात पर पड़ा है, क्योंकि किराया इतना बढ़ गया है कि व्यापारी वहां माल भेज ही नहीं पा रहे। इस पर मौसम की मार अलग रही। मार्च में मौसम के उतार चढ़ाव, बारिश और ओलों ने आम का आकार और रंगरूप दोनों बिगाड़ दिए, जिससे एक्सपोर्ट क्वालिटी का फल मिलना ही कठिन हो गया। किसान बताते हैं कि बेमौसम बारिश के बाद फल को कीड़ों से बचाने के लिए उन्हें और ज्यादा कीटनाशक छिड़कना पड़ा, और यही बात निर्यात पर भारी पड़ गई। बीस साल का कारोबार और एक झटका मलिहाबाद के माल इलाके में बिशन पाल सिंह का 15 बीघे में फैला आम का बाग है। पिछले बीस साल से वे अमेरिका और जापान को आम भेजते आ रहे हैं। बिशन ने जापान को 8-8 लाख रुपये तक का आम भेजा है, जबकि पिछले साल करीब तीन लाख रुपये का माल वहां गया था। इस बार भी उन्होंने पूरे साल जापान और अमेरिका भेजने की पक्की तैयारी की थी। तैयारी का अंदाजा इसी से लगाइए कि जब आम डाल पर बेहद छोटा था, तभी हर फल पर अलग-अलग खास पैकेट चढ़ाया गया, ताकि छिड़काव का कीटनाशक फल तक न पहुंचे। पैकेट बांधने के लिए अलग से मजदूर लगाए गए। उम्मीद अच्छी कमाई की थी, मगर जापान और अमेरिका दोनों ने माल लेने से ही इनकार कर दिया। नतीजा यह कि जो आम जापान में डेढ़ सौ रुपये में जाता था, उसे अब लोकल मंडी में 28 से 35 रुपये में बेचना पड़ रहा है। नकली और जहरीले कीटनाशकों का खेल मलिहाबाद के 80 साल के कलीमुल्ला खान को आम पर किए गए काम के लिए पद्मश्री मिला है। उनका साफ कहना है कि आमों पर जहरीले कीटनाशक छिड़के जा रहे हैं जो भारी नुकसान करते हैं। बाजार में नकली कीटनाशक तक बिक रहे हैं, जिन्हें किसान अनजाने में छिड़क रहे हैं। उनके मुताबिक जापान में खाने-पीने की चीजों को लेकर बेहद सख्ती बरती जाती है, इसीलिए वह यह आम नहीं ले रहा, जबकि हमारे यहां तकरीबन हर आम में खतरनाक कीटनाशक मौजूद है। मंडी में रफ्तार से बिक रहा वही आम दिलचस्प यह है कि जिस आम को जापान ने ठुकरा दिया, वही मलिहाबाद की मंडी में धड़ल्ले से बिक रहा है। आढ़तियों का तर्क है कि बिना कीटनाशक के छिड़काव के आम पैदा हो ही नहीं सकता, और जब हर फल-सब्जी में कीटनाशक है तो आम भी अछूता नहीं। यह पहला मौका नहीं है। अस्सी के दशक में भी जापान ने फ्रूट फ्लाई की वजह से भारत के आम पर रोक लगाई थी। बाद में ट्रीटमेंट के तरीके बदले गए और 2006 में भारत ने दोबारा जापान को आम भेजना शुरू किया। अब करीब बीस साल बाद जापान ने फिर वही दरवाजा बंद कर दिया है। निर्यात से पहले होने वाला ट्रीटमेंट मलिहाबाद में निर्यात के लिए एक पैक हाउस बना हुआ है। यहां के मैनेजर सचिन बताते हैं कि जापान भेजने से पहले आम का खास ट्रीटमेंट किया जाता है, जिसे वेपर हीट ट्रीटमेंट यानी VHT कहते हैं। इसमें आमों को कुछ देर के लिए गर्म हवा के चेंबर में रखा जाता है, ताकि फल के भीतर के कीड़े और लार्वा खत्म हो जाएं और कीटनाशक का असर भी मिट जाए। हाल ही में जापान की एक टीम भारत आई और उसने मलिहाबाद, महाराष्ट्र समेत देश के दूसरे हिस्सों में लगे प्लांट देखे। टीम को इसी प्रक्रिया में खामियां मिलीं, और उसके बाद ही जापान ने आम लेने से मना किया। दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक, फिर भी संकट भारत आम का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया भर के कुल उत्पादन का 40 से 45 फीसदी आम अकेले भारत में होता है। अकेले यूपी में करीब 2.8 लाख हेक्टेयर में आम के बाग हैं, जहां हर साल लगभग सत्तर लाख मीट्रिक टन आम पैदा होता है। इसमें लखनऊ के माल, मलिहाबाद और काकोरी बेल्ट का बड़ा हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में करीब 30 हजार टन आम का निर्यात हुआ, जो जापान के अलावा UAE, अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत और कतर तक भेजा गया। अकेले जापान को हर साल दो हजार मीट्रिक टन तक आम जाता रहा है। अब उत्पादकों को असली डर यह सता रहा है कि कहीं बाकी देश भी भारत से आम लेना बंद न कर दें। इसका आप पर असर • भारत में: जापान और अमेरिका के इनकार से निर्यात घटने पर देशभर के बाजारों में आम की भरमार होगी और कीमतें गिर सकती हैं, जिसका सीधा फायदा खरीदारों को मिलेगा। • यूपी (मलिहाबाद) में: लखनऊ के माल, मलिहाबाद और काकोरी बेल्ट के बागबानों की कमाई पर सीधी चोट है, क्योंकि डेढ़ सौ रुपये वाला निर्यात आम अब 28 से 35 रुपये में बिक रहा है। • सेहत के लिए: नकली और जहरीले कीटनाशकों की चेतावनी का मतलब है कि उपभोक्ता आम खाने से पहले अच्छी तरह धोएं और सावधानी बरतें। सवाल-जवाब 1. जापान ने मलिहाबाद का आम लेने से क्यों मना किया? जापान की टीम ने भारत आकर प्लांट देखे और निर्यात से पहले होने वाले VHT ट्रीटमेंट की प्रक्रिया में खामियां पाईं, साथ ही कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल को वजह बताया गया। 2. निर्यात रुकने से आम की कीमत पर क्या असर पड़ा? जो आम जापान में डेढ़ सौ रुपये में जाता था, उसे अब मलिहाबाद की लोकल मंडी में 28 से 35 रुपये में बेचना पड़ रहा है। 3. क्या जापान ने पहले भी भारत का आम रोका था? हां, अस्सी के दशक में फ्रूट फ्लाई की वजह से रोक लगी थी, फिर 2006 में आयात दोबारा शुरू हुआ और अब करीब बीस साल बाद फिर रोक दिया गया है। 4. भारत और यूपी का आम उत्पादन में कितना हिस्सा है? दुनिया के कुल उत्पादन का 40 से 45 फीसदी आम भारत में होता है, और अकेले यूपी में करीब 2.8 लाख हेक्टेयर में हर साल लगभग सत्तर लाख मीट्रिक टन आम पैदा होता है। https://trendkia.com/business/malihabada-ke-bagabanon-para-mara-japana-aura-amerika-ne-up-ke-ama-lene-se-kyon--1492 TrendKia — Har trend, sabse pehle.