मौसंबी की तली पर बना सिक्के जैसा गोल निशान बताएगा कौन सी किस्म देगी सबसे मीठा जूस मौसंबी की देसी और थाईलैंड किस्म को पहचानने का आसान तरीका, फल की तली पर बना गोल निशान ही बता देगा कि कौन सा जूस मिश्री जैसा मीठा निकलेगा। अगर आप मौसंबी खरीदने जा रहे हैं या इसकी बागवानी का मन बना रहे हैं, लेकिन देसी और बाहरी किस्म में फर्क करना नहीं जानते, तो एक छोटी सी पहचान आपका काम आसान कर देगी। फल की तली पर बना एक निशान ही बता देता है कि कौन सी मौसंबी का जूस ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट निकलेगा। आइए जानते हैं देसी और थाईलैंड किस्म में अंतर पहचानने का सीधा तरीका और यह भी कि किसका रस सबसे ज्यादा मीठा होता है। कौन सी किस्म होती है ज्यादा मीठी बिहार में मौसंबी की कमर्शियल बागवानी की शुरुआत वर्ष 2020 में करने वाले शिशिर दूबे बताते हैं कि देसी किस्म के मुकाबले बाहरी किस्म का जूस कहीं ज्यादा मीठा और टेस्टी होता है। शिशिर पश्चिम चंपारण ज़िले के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के रहने वाले हैं। उनके मुताबिक खासकर थाईलैंड मूल की मौसंबी का रस तो मिश्री जैसा मीठा होता है। यही वजह है कि बाज़ार के जूस कारोबारी किसानों से इसी किस्म की मौसंबी खरीदना पसंद करते हैं। तली का निशान खोल देगा राज सीधी बात यह है कि अगर किसान देसी की जगह थाईलैंड किस्म की मौसंबी उगाएं, तो अच्छे दाम पर बिक्री की संभावना कई गुना बढ़ जाती है और कारोबारियों से संपर्क भी बना रहता है। लेकिन सवाल उठता है कि इस किस्म को पहचानें कैसे। शिशिर इसका आसान हल बताते हैं, थाईलैंड की मौसंबी की तली पर सिक्के जैसी गोल आकृति बनी होती है, जबकि देसी मौसंबी एकदम गोल और बिना किसी निशान के होती है। तीन एकड़ में 750 पौधे, अब पेड़ों पर भरपूर फलन शिशिर ने कुल 3 एकड़ में बागवानी की है, जिसमें करीब 750 पौधे लगाए गए थे। 6 साल में ये सभी पौधे अब पेड़ बन चुके हैं और हर पेड़ पर 40 किलो तक मौसंबी का फलन हो रहा है। उनका अनुमान है कि इस बार पूरी बागवानी से करीब 12 टन तक मौसंबी की हार्वेस्टिंग हो सकती है। बिहार में इस फल की खेती बहुत कम होती है, इसलिए फल और जूस के कारोबारी खेत से ही 80 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर इसे खरीद लेते हैं। आगे और बढ़ेगा मुनाफा सबसे बड़ी बात यह है कि जैसे जैसे पेड़ बड़े होते जाएंगे, उन पर फलों की मात्रा भी बढ़ती जाएगी और एक पेड़ से उपज एक क्विंटल तक पहुंच सकती है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी भी पारंपरिक फसल के मुकाबले मौसंबी की बागवानी किसानों के लिए कितनी फायदेमंद साबित हो सकती है। हां, पौधा खरीदते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि वैरायटी थाईलैंड की हो। शिशिर ने थाईलैंड वैरायटी की ही मौसंबी लगाई है और उनका कहना है कि इसका स्वाद देसी के मुकाबले कहीं ज्यादा मीठा होता है। इसका आप पर असर • खरीदारों के लिए: जूस के लिए मौसंबी खरीदते वक्त तली पर सिक्के जैसा गोल निशान देखकर थाईलैंड किस्म चुनें, क्योंकि इसका रस ज्यादा मीठा और स्वादिष्ट होता है। • बिहार के किसानों के लिए: थाईलैंड किस्म की मौसंबी की खेती से खेत पर ही 80 रुपये प्रति किलो तक का दाम और परंपरागत फसलों से कई गुना ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. देसी और थाईलैंड मौसंबी में फर्क कैसे पहचानें? थाईलैंड की मौसंबी की तली पर सिक्के जैसा गोल निशान बना होता है, जबकि देसी मौसंबी एकदम गोल और बिना निशान के होती है। 2. किस किस्म का जूस ज्यादा मीठा होता है? थाईलैंड मूल की मौसंबी का जूस देसी किस्म के मुकाबले ज्यादा मीठा और मिश्री जैसा स्वादिष्ट होता है। 3. शिशिर दूबे ने कितनी जमीन पर बागवानी की है? उन्होंने कुल 3 एकड़ में करीब 750 पौधे लगाए हैं, जो 6 साल में पेड़ बन चुके हैं। 4. खेत पर मौसंबी का दाम कितना मिलता है? बिहार में यह खेती दुर्लभ होने के कारण फल और जूस कारोबारी खेत से ही 80 रुपये प्रति किलो तक के दाम पर इसे खरीद लेते हैं। 5. एक पेड़ से कितनी उपज मिलती है? अभी हर पेड़ पर 40 किलो तक फलन हो रहा है और पेड़ बड़े होने पर यह उपज एक क्विंटल तक पहुंच सकती है। 6. पौधा खरीदते समय किस बात का ध्यान रखें? पौधा लेते समय यह सुनिश्चित करें कि वैरायटी थाईलैंड की हो, क्योंकि इसका स्वाद देसी के मुकाबले ज्यादा मीठा होता है। प्रेरणा और सबक • नई राह चुनने का साहस: शिशिर दूबे ने 2020 में बिहार में मौसंबी की कमर्शियल बागवानी शुरू की, जहां यह खेती बहुत कम होती थी, और इसी दुर्लभता को कमाई का मौका बना लिया। • सही किस्म का चुनाव: उन्होंने देसी नहीं, बल्कि बाज़ार में मांग वाली थाईलैंड किस्म चुनी, जिससे दाम और बिक्री दोनों बेहतर हुए। • धैर्य का फल: 750 पौधों को पेड़ बनने में 6 साल लगे, लेकिन अब हर पेड़ 40 किलो तक फल दे रहा है, जो दिखाता है कि बागवानी में सब्र जरूरी है। • बाज़ार से जुड़ाव: सही किस्म उगाने से कारोबारियों से संपर्क बना रहता है और फसल खेत से ही बिक जाती है। https://trendkia.com/business/mausnbi-ki-tali-para-bana-sikke-jaisa-gola-nishana-bataega-kauna-si-kisma-degi-sabase-mitha-jusa-2818 TrendKia — Har trend, sabse pehle.