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  "title": "मिर्च की रोपाई से पहले जड़ों का यह उपचार रोकेगा थ्रिप्स और सफेद मक्खी का हमला, खरगोन के वैज्ञानिक ने बताया पूरा तरीका",
  "summary": "खरगोन के किसान इन दिनों मिर्च की रोपाई की तैयारी में हैं और रोगों से बचाव के लिए विशेषज्ञ रोपाई से पहले जड़ों के इमिडाक्लोप्रिड उपचार और नीम की खली डालने की सलाह दे रहे हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश का खरगोन जिला मिर्च उत्पादन में अपनी अलग पहचान रखता है और इसे प्रदेश का सबसे बड़ा मिर्च उत्पादक जिला माना जाता है। खरीफ सीजन में यहां के किसानों के लिए मिर्च सबसे अहम नकदी फसल साबित होती है। तीखेपन और गहरे सुर्ख लाल रंग की वजह से खरगोन की मिर्च देश के साथ साथ विदेशी बाजारों में भी अपनी जगह बना चुकी है। जिले में करीब 48 हजार हेक्टेयर रकबे पर मिर्च की खेती होती है, और इन दिनों किसान खेतों की तैयारी तथा बुआई के काम में लगे हुए हैं।\n\nरोपाई का सही समय और इस बार की चुनौती\nकृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मिर्च की रोपाई के लिए 25 जून से 5 जुलाई के बीच का समय सबसे उपयुक्त रहता है। लेकिन इस साल मानसून की चाल सुस्त होने की वजह से किसानों को सलाह दी गई है कि वे बारिश होने के बाद ही रोपाई करें। हां, जिन किसानों के पास सिंचाई का पर्याप्त इंतजाम है, वे ड्रिप सिस्टम लगाकर अभी भी पौधों की रोपाई कर सकते हैं।\n\nक्यों जरूरी है शुरुआती सुरक्षा\nमिर्च की खेती भले ही मुनाफे का सौदा हो, लेकिन इस फसल पर थ्रिप्स, सफेद मक्खी, माहू और फफूंद जनित रोगों का सबसे बड़ा खतरा बना रहता है। कई बार पौधे शुरुआती अवस्था में ही कमजोर पड़ जाते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। इसके बाद किसानों को बार बार दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता है और इससे खेती की लागत भी बढ़ती चली जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान रोपाई से पहले ही पौधों की जड़ों का सही उपचार कर लें तो शुरुआती संक्रमण का खतरा काफी हद तक टाला जा सकता है। इससे पौधे मजबूत बनते हैं और फसल की बढ़वार भी बेहतर होती है।\n\nरोपाई से पहले जड़ों का उपचार ऐसे करें\nखरगोन के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ एसके त्यागी ने TrendKia को बताया कि मिर्च की फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए जड़ों का उपचार बेहद अहम है। उन्होंने सलाह दी कि 10 लीटर पानी में 3 एमएल इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल मिलाएं, फिर मिर्च के पौधों की जड़ों को करीब 30 मिनट तक इस घोल में डुबोकर रखें और उसके बाद ही रोपाई करें। डॉ त्यागी के अनुसार अगर कम मात्रा में घोल बनाना हो तो एक लीटर पानी में 0.3 एमएल इमिडाक्लोप्रिड मिलाकर भी जड़ों का उपचार किया जा सकता है। इस तरीके से पौधे शुरुआती कीट प्रकोप से सुरक्षित रहते हैं और उनकी वृद्धि भी अच्छी होती है।\n\nनीम की खली से दोहरा फायदा\nविशेषज्ञों ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि रोपाई से पहले प्रति एकड़ एक क्विंटल नीम की खली खेत में डालें। इससे एक ओर मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है, वहीं दूसरी ओर पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है और कीटों का प्रकोप कम होता है। इसका सीधा लाभ किसानों को उत्पादन बढ़ाने में मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआत में ही पौधों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए तो आगे चलकर दवाइयों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च घटाया जा सकता है। सही समय पर जड़ों का उपचार और देखभाल करने से मिर्च की फसल स्वस्थ रहती है और पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: मिर्च उगाने वाले किसान रोपाई से पहले जड़ों का इमिडाक्लोप्रिड उपचार और नीम की खली अपनाकर शुरुआती कीट प्रकोप से बच सकते हैं और बार बार छिड़काव का खर्च घटा सकते हैं।\n• खरगोन में: जिले के करीब 48 हजार हेक्टेयर में मिर्च लगाने वाले किसान बारिश के बाद ही रोपाई करें, और जिनके पास ड्रिप सिंचाई है वे अभी रोपाई कर सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मिर्च की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?\n25 जून से 5 जुलाई के बीच का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, लेकिन इस बार धीमे मानसून की वजह से बारिश के बाद ही रोपाई की सलाह दी गई है।\n\n2. जड़ों के उपचार के लिए कितनी मात्रा में इमिडाक्लोप्रिड मिलाना है?\n10 लीटर पानी में 3 एमएल इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल मिलाएं, या कम घोल के लिए एक लीटर पानी में 0.3 एमएल मिलाएं।\n\n3. जड़ों को घोल में कितनी देर डुबोकर रखना चाहिए?\nमिर्च के पौधों की जड़ों को करीब 30 मिनट तक घोल में डुबोकर रखने के बाद रोपाई करनी चाहिए।\n\n4. नीम की खली कितनी मात्रा में डालनी चाहिए?\nरोपाई से पहले प्रति एकड़ एक क्विंटल नीम की खली खेत में डालने की सलाह दी गई है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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    "मिर्च की खेती",
    "खरगोन मिर्च",
    "जड़ों का उपचार",
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    "थ्रिप्स सफेद मक्खी"
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  "site": "TrendKia"
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