मिर्जापुर के किसान अब विदेश में बेच सकेंगे अपनी सब्जियां, चुनार केंद्र में मिलेगा एफपीओ और एनपीओपी सर्टिफिकेशन का पूरा मार्गदर्शन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित चुनार में एपीडा का नया कार्यालय खुलने से स्थानीय किसानों के लिए कृषि उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय निर्यात आसान हो गया है। निर्यात प्रक्रिया, एफपीओ गठन, आरसीएमसी और एनपीओपी जैसे जरूरी प्रमाण पत्रों की पूरी जानकारी यहां उपलब्ध कराई जा रही है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कृषि क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाने और स्थानीय किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। जिले के चुनार क्षेत्र में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का नया कार्यालय स्थापित किया गया है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है, ताकि वे अपने ताजे कृषि उत्पादों और सब्जियों का निर्यात विदेश में करके अपनी आय में कई गुना बढ़ोतरी कर सकें। वर्तमान में जानकारी के अभाव के कारण बहुत से किसान अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पाद विदेश नहीं भेज पा रहे हैं, जिसके समाधान के लिए यह विशेष केंद्र खोला गया है। चुनार में एपीडा केंद्र की स्थापना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत गठित एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) का यह नया प्रोजेक्ट चुनार में पूरी तरह से बनकर तैयार है और जल्द ही इसका आधिकारिक उद्घाटन होने जा रहा है। एपीडा के अधिकारी देव आनंद त्रिपाठी के अनुसार, इस केंद्र की स्थापना से मिर्जापुर जिले के कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आजीविका के साधनों को मजबूती प्रदान करना है। इस केंद्र के माध्यम से किसानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों, पैकेजिंग मानकों और निर्यात प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने पारंपरिक कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकेंगे। एक ही छत के नीचे बैठेंगे वाणिज्य मंत्रालय के प्रमुख विभागों के अधिकारी किसानों और निर्यातकों की सुविधा के लिए इस केंद्र को एक एकीकृत सेवा बिंदु के रूप में विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि भी जल्द ही चुनार स्थित एपीडा कार्यालय में नियमित रूप से अपनी सेवाएं देंगे। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग (IIP), एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल (EIC), मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) और स्पाइस बोर्ड (Spice Board) शामिल हैं। इन सभी विभागों के अधिकारियों के एक ही स्थान पर उपलब्ध होने से निर्यात के इच्छुक किसानों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उन्हें पैकेजिंग से लेकर गुणवत्ता जांच तथा स्पाइस बोर्ड के आवश्यक क्लीयरेंस की पूरी प्रक्रिया एक ही छत के नीचे आसानी से मिल जाएगी। एफपीओ का गठन: निर्यात व्यवसाय शुरू करने का सबसे सरल माध्यम विदेशों में कृषि उत्पाद भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किसानों को व्यावसायिक संस्था के रूप में संगठित होने की सलाह दी गई है। देव आनंद त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्तर पर व्यापार शुरू करने की तुलना में किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन करना सबसे प्रभावी और सुलभ विकल्प है। भारत सरकार द्वारा देश भर में 10 हजार एफपीओ बनाने की योजना संचालित की जा रही है, जो किसानों के लिए निर्यात के द्वार खोल रही है। इसका सफल उदाहरण पड़ोसी जिले बनारस (वाराणसी) में देखा जा सकता है, जहां कई एफपीओ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और वहां के किसानों की ताजा सब्जियां हर दिन खाड़ी देशों (गल्फ मार्केट) में नियमित रूप से एक्सपोर्ट की जा रही हैं। मिर्जापुर के किसान भी इसी मॉडल को अपनाकर अपना निर्यात नेटवर्क स्थापित कर सकते हैं। इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कोड और आरसीएमसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखने के लिए कानूनी कागजी कार्रवाई और पंजीकरण अनिवार्य होता है। मिर्जापुर के किसानों को सबसे पहले अपनी कंपनी या एफपीओ पंजीकृत कराकर वाणिज्य मंत्रालय से इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कोड (IEC) हासिल करना होगा। इसके बाद उन्हें एपीडा से रजिस्ट्रेशन-कम-मेंबरशिप सर्टिफिकेट (RCMC) प्राप्त करना होता है। यदि किसान मिर्च, हल्दी या अन्य मसालों का निर्यात करना चाहते हैं, तो उन्हें स्पाइस बोर्ड से संबंधित आरसीएमसी प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है। अपने विशिष्ट कृषि उत्पादों के आधार पर सही श्रेणी में पंजीकरण कराकर किसान कानूनी और पारदर्शी तरीके से विदेशों में अपना सामान भेज सकते हैं। जैविक खाद्य पदार्थों के लिए एनपीओपी और यूपी-सोका का सर्टिफिकेशन विदेशों में जैविक (ऑर्गेनिक) खाद्य पदार्थों की भारी मांग है, लेकिन इनका निर्यात करने के लिए कड़े गुणवत्ता मानकों का पालन करना पड़ता है। भारत से किसी भी प्रकार के जैविक उत्पाद को विदेशों में भेजने के लिए नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) का सर्टिफिकेशन होना पूरी तरह से अनिवार्य है। एनपीओपी भारत सरकार का आधिकारिक प्रमाणीकरण ढांचा है, जिसके बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था जैविक उत्पाद निर्यात नहीं कर सकती। एपीडा इस प्रमाणीकरण प्रक्रिया की मुख्य नोडल एजेंसी है। उत्तर प्रदेश में एनपीओपी सर्टिफिकेशन प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था (UP-SOCA) जैसी अधिकृत बॉडीज काम कर रही हैं। इन संस्थाओं का अपना एक निर्धारित टैरिफ स्ट्रक्चर (शुल्क संरचना) होता है। इसके तहत व्यक्तिगत किसान (Individual Farmer), किसान समूह (Grower Group), प्रोसेसर या व्यापारी सभी अपनी आवश्यकता के अनुसार जैविक प्रमाणीकरण हासिल करके अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश कर सकते हैं। इसका आप पर असर इस खबर का भारतीय कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों पर सीधा प्रभाव पड़ता है: • भारत में: एफपीओ मॉडल और केंद्रीय प्रमाणन व्यवस्था के जरिए छोटे किसान अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़कर बेहतर दाम पा सकते हैं। • मिर्जापुर और पूर्वांचल में: चुनार में एपीडा केंद्र खुलने से स्थानीय किसानों को खाड़ी देशों सहित वैश्विक बाजारों में सब्जियां और उत्पाद निर्यात करने का सीधा साधन मिलेगा। सवाल-जवाब 1. मिर्जापुर के चुनार में किस एजेंसी का नया कार्यालय खोला गया है? चुनार में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) का नया प्रोजेक्ट सह कार्यालय खोला गया है। 2. कृषि उत्पाद विदेश भेजने के लिए सबसे आसान तरीका क्या है? किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन करके कंपनी स्थापित करना और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कोड (IEC) प्राप्त करना सबसे सरल तरीका है। 3. जैविक कृषि उत्पाद निर्यात करने के लिए कौन सा सर्टिफिकेट अनिवार्य है? भारत से जैविक खाद्य पदार्थों के निर्यात के लिए नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) का सर्टिफिकेशन होना पूरी तरह अनिवार्य है। 4. क्या उत्तर प्रदेश में व्यक्तिगत किसान भी जैविक प्रमाणन प्राप्त कर सकते हैं? हां, यूपी-सोका (UP-SOCA) जैसी सर्टिफिकेशन बॉडीज के माध्यम से व्यक्तिगत किसान, किसान समूह, प्रोसेसर या व्यापारी निर्धारित टैरिफ देकर सर्टिफाई हो सकते हैं। 5. चुनार एपीडा दफ्तर में वाणिज्य मंत्रालय के कौन-कौन से विभागों के अधिकारी बैठेंगे? यहां जल्द ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल, एमपीडा और स्पाइस बोर्ड के अधिकारी भी बैठेंगे। https://trendkia.com/business/mirzapur-ke-kisana-aba-videsha-men-becha-sakenge-apani-sabjiyan-chunar-kendra-men-milega-fpo-aura-npop-sartiphikeshana-ka-pura-mar-16486 TrendKia — Har trend, sabse pehle.