# मानसून की बेरुखी से 60 करोड़ किसानों की बढ़ी मुश्किलें, फिर गहराया बारिश का संकट

> भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि उत्पादन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। देश के 15 राज्यों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है, जो खाद्य सुरक्षा और कृषि नीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/monsoon-ki-berukhi-se-60-karora-kisanon-ki-barhi-mushkilen-phira-gaharaya-barisha-ka-snkata-7261 · **Language:** Hindi
**Tags:** मानसून, कृषि, किसान, मौसम विभाग, खरीफ फसल, खाद्य सुरक्षा, एल नीनो

मानसून के ताजा आंकड़ों ने देशभर के किसानों के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। पिछले सप्ताह हुई कुछ राहत भरी बारिश के बाद उम्मीद बंधी थी, लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) की नई रिपोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। मानसून की चाल फिर से सुस्त पड़ गई है और बारिश की कमी का ग्राफ एक बार फिर ऊपर की ओर जा रहा है। जून के अंत में बारिश में 40 प्रतिशत की कमी थी, जो 9 जुलाई तक घटकर 14 प्रतिशत रह गई थी, लेकिन अब सूखे जैसी स्थिति बनने के कारण यह घाटा वापस 18 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है।

## कृषि पर मानसून की मार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी छह से सात दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत के मैदानी हिस्सों और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के बड़े क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां अत्यंत कमजोर बनी रहने की संभावना है। यदि मानसून का यह दौर जारी रहता है, तो देश का कुल वर्षा घाटा और भी विकराल रूप ले सकता है। इस अनिश्चितता का सबसे गहरा प्रभाव करीब 60 करोड़ किसानों और उनकी खरीफ फसलों पर पड़ रहा है। बुवाई में जो तेजी पिछले सप्ताह देखी गई थी, वह अब फिर से रुकती हुई नजर आ रही है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहां सिंचाई के साधन नगण्य हैं और खेती पूरी तरह से बारिश के भरोसे है, वहां की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है।

## 15 राज्यों में सूखे जैसे हालात
आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जून से 12 जुलाई के बीच देश के 15 अलग-अलग राज्यों में बारिश का स्तर सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक नीचे चला गया है। इस सूची में बिहार, झारखंड, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण कृषि प्रधान राज्य शामिल हैं। कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में तो बारिश की कमी 73 प्रतिशत तक देखी गई है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां सामान्य से 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

## भारी बारिश का सीमित असर
अगले दो से तीन दिनों में बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके अतिरिक्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले चार से पांच दिनों तक कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह बारिश पूरे देश में बने मौजूदा मानसूनी घाटे की भरपाई करने में पर्याप्त नहीं होगी।

## एल नीनो और सांख्यिकी विभाग की चुनौतियां
मानसून की इस कमजोरी के पीछे एल नीनो का प्रभाव भी एक प्रमुख कारक माना जा रहा है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण भारतीय मानसून का चक्र बाधित हो रहा है। एल नीनो की वजह से अमूमन बारिश में कमी और गर्मी की अधिकता देखी जाती है। इसके अलावा, हालिया रिपोर्टों से सरकारी तंत्र की एक और खामी सामने आई है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, कृषि आंकड़ों के संग्रह यानी 'गिरदावरी' की प्रक्रिया कई राज्यों में समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। आंध्र प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में यह कार्य काफी पीछे चल रहा है। सटीक उत्पादन आंकड़ों के अभाव में सरकार के लिए निर्यात, आयात शुल्क और महंगाई को नियंत्रित करने वाले बफर स्टॉक से संबंधित निर्णय लेना कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति खाद्य सुरक्षा और भविष्य की कृषि नीतियों को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** कम बारिश के कारण अनाज और सब्जियों की कीमतों में भविष्य में बढ़ोतरी हो सकती है, जो सीधे आपकी जेब पर असर डालेगी।

**प्रभावित राज्यों में:** बिहार, पंजाब, गुजरात और अन्य प्रभावित राज्यों के किसानों को सरकारी केंद्रों से फसल बीमा और सिंचाई सहायता के लिए तुरंत संपर्क करना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. मानसून की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिर से कमजोर पड़ गया है और देश में बारिश की कमी बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है।

### 2. किन राज्यों में बारिश सबसे कम हुई है?
बिहार, झारखंड, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश सहित 15 राज्यों में सामान्य से 20 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है।

### 3. मानसून की कमजोरी के पीछे मुख्य कारण क्या है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल एल नीनो की स्थिति भारतीय मानसून को प्रभावित कर रही है, जिससे प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने के कारण बारिश में कमी आ रही है।

### 4. कृषि आंकड़ों की कमी से क्या समस्या हो सकती है?
सटीक आंकड़ों के अभाव में सरकार को निर्यात, आयात शुल्क और महंगाई को नियंत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेने में कठिनाई होती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

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