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  "title": "मुजफ्फरपुर पहुंचे गुजरात से लौटे मजदूर, बोले- 12 घंटे की शिफ्ट और तंगहाली से तंग आकर छोड़ा काम",
  "summary": "गुजरात में चल रही मजदूरों की हड़ताल के बीच बिहार के श्रमिक वापस लौटने लगे हैं। मुजफ्फरपुर जंक्शन पर पहुंचे मजदूरों ने 12 घंटे काम, कम वेतन और अन्य समस्याओं का जिक्र करते हुए दोबारा वहां जाने से इनकार कर दिया है।",
  "content": "मुजफ्फरपुर में गुजरात से लौटने वाले श्रमिकों का तांता लगा हुआ है और बड़ी संख्या में मजदूर अपने घर वापस आ रहे हैं। राज्य के विभिन्न जिलों के श्रमिक ट्रेन के जरिए लगातार पहुंच रहे हैं, जिससे रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हाल ही में अहमदाबाद से सहरसा जाने वाली ट्रेन की सामान्य बोगियों में मुजफ्फरपुर जंक्शन पर भारी गहमागहमी नजर आई, जहां समस्तीपुर और आसपास के अन्य इलाकों के मजदूर उतरे। इन श्रमिकों ने वहां उपजे हालात और अपनी व्यथा खुलकर साझा की है।\n\n12 घंटे की लंबी ड्यूटी और वेतन का संकट\nसमस्तीपुर के रहने वाले मोहम्मद महबूब आलम अहमदाबाद में टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करते थे। उन्होंने बताया कि वहां के हालात फिलहाल काफी तनावपूर्ण और कठिन बने हुए हैं। श्रमिकों की मुख्य नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनसे तय समय से अधिक यानी 12 घंटे तक काम लिया जाता है, जबकि उनकी मांग आठ घंटे की ड्यूटी और समय पर भुगतान की है। इसके अलावा परिवार के भरण-पोषण के लिए उचित सुविधाएं और साप्ताहिक अवकाश की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। महबूब आलम के अनुसार, काम के लंबे घंटों के कारण श्रमिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और उन्हें नियमानुसार छुट्टी तक नहीं मिलती है। उन्होंने अनुमान जताया कि वहां से लगभग एक हजार मजदूर अपना काम छोड़कर निकल चुके हैं।\n\nठेका प्रणाली और भारी काम के दबाव से तंग आए राहुल\nसमस्तीपुर जिले के रोसड़ा के रहने वाले राहुल भी अपनी व्यथा सुनाते हुए गुजरात से वापस लौटे हैं। वह वहां एक कंपनी में ठेकेदार के अधीन कार्यरत थे और लगातार 12 घंटे की शिफ्ट का दबाव झेल रहे थे। उन्होंने कम वेतन और महंगे किराए से जुड़ी तमाम कठिनाइयों का सामना किया, जिसके बाद उन्होंने वहां से हमेशा के लिए किनारा करने का फैसला किया। राहुल का कहना है कि वह अब किसी भी कीमत पर गुजरात वापस नहीं जाना चाहते हैं। यदि आवश्यकता पड़ी तो वह देश के किसी अन्य हिस्से में आजीविका तलाशेंगे, लेकिन फिलहाल उनकी योजना अपने ही गांव में रहकर कोई छोटा-मोटा काम शुरू करने की है। उन्होंने विचार किया है कि गांव में चाय की एक दुकान खोलकर आत्मनिर्भर बना जाए और अपने परिवार के साथ वक्त बिताया जाए।\n\nबुनियादी अधिकारों और तय समय की मांग पर अड़े श्रमिक\nगुजरात के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से लौट रहे कामगारों की जुबानी एक ही जैसी कहानियां सामने आ रही हैं, जिनमें तय कामकाजी घंटे, समय पर मजदूरी का भुगतान और साप्ताहिक छुट्टी की मांग सबसे ऊपर है। श्रमिकों का स्पष्ट मानना है कि अमानवीय रूप से लंबे समय तक लगातार काम करने के बजाय उन्हें श्रम कानूनों के दायरे में काम करने का अवसर मिलना चाहिए। वे चाहते हैं कि उन्हें इतना समय और संसाधन मिले जिससे वे अपने परिवार की देखरेख कर सकें और जीवन स्तर में सुधार ला सकें। अब इन श्रमिकों का रुख साफ हो चुका है कि जब तक उनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता, वे वापस लौटने का जोखिम नहीं उठाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nगुजरात से लौट रहे मजदूरों के पलायन और उनकी मांगों का सीधा असर देश के औद्योगिक क्षेत्रों और स्थानीय श्रम बाजारों पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: देश के विभिन्न औद्योगिक केंद्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के अधिकारों और काम के घंटों को लेकर बहस तेज हो गई है। इस घटनाक्रम से विभिन्न राज्यों में ठेका प्रथा और श्रम कानूनों के पालन का मुद्दा फिर से गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।\n• बिहार में: मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर समेत बिहार के कई जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की मांग और अधिक मुखर हो गई है। बाहर से लौट रहे इन श्रमिकों के वापस न जाने के फैसले से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर रोजगार मुहैया कराने का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगुजरात के औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे मजदूरों के अचानक लौटने और हड़ताल पर जाने के पीछे अत्यधिक कार्यभार और बुनियादी अधिकारों की कमी मुख्य वजह रही है। श्रमिकों को तय नियमों से अधिक समय तक काम करने के लिए विवश किया जाना इस असंतोष की नींव बना।\n\n• अतिरिक्त कार्यभार: मजदूरों से नियत आठ घंटे के बजाय लगातार 12 घंटे तक काम लिया जा रहा था, जिससे शारीरिक और मानसिक थकान बढ़ गई थी।\n• वित्तीय परेशानियां: समय पर वेतन न मिलने और महंगे किराए तथा जीवनयापन के खर्चों के बीच संतुलन न बन पाने के कारण श्रमिकों का आर्थिक शोषण हो रहा था।\n• सुविधाओं का अभाव: ठेका प्रथा के तहत काम करने वाले इन श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश और परिवार के लिए जरूरी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही थी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मजदूर गुजरात से लौटकर किस रेलवे स्टेशन पर पहुंचे?\nमजदूर गुजरात से लौटकर मुजफ्फरपुर जंक्शन पर पहुंचे।\n\n2. श्रमिकों की मुख्य शिकायत क्या थी?\nश्रमिकों की मुख्य शिकायत 12 घंटे की लंबी ड्यूटी, कम वेतन और साप्ताहिक अवकाश न मिलना थी।\n\n3. मोहम्मद महबूब आलम गुजरात में क्या काम करते थे?\nमोहम्मद महबूब आलम अहमदाबाद में टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करते थे।\n\n4. राहुल ने वापस लौटने के बाद क्या योजना बनाई है?\nराहुल ने गांव में ही रहकर चाय की दुकान खोलकर रोजगार करने की योजना बनाई है।\n\n5. अनुमान के मुताबिक कितने मजदूर वहां से निकले हैं?\nअनुमान के मुताबिक वहां से करीब एक हजार मजदूरों के निकलने की बात सामने आई है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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    "मुजफ्फरपुर जंक्शन",
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