# मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर: साबरमती नदी पर 12 मंजिला इमारत जितना ऊंचा पुल बनकर तैयार

> नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने साबरमती नदी पर 480 मीटर लंबा और 36 मीटर ऊंचा रणनीतिक पुल पूरा कर लिया है, जो 12 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/mumbai-ahmedabad-hai-spida-koridora-sabarmati-nadi-para-12-mnjila-imarata-jitana-uncha-pula-banakara-taiyara-42768 · **Language:** Hindi
**Tags:** बुलेट ट्रेन, साबरमती नदी, अहमदाबाद, गुजरात, रेलवे

मुंबई और अहमदाबाद के बीच तैयार हो रहे हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण में एक बड़ा इंजीनियरिंग पड़ाव हासिल हुआ है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने साबरमती नदी के ऊपर 480 मीटर लंबे और 36 मीटर ऊंचे विशाल पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। करीब 118 फुट की कुल ऊंचाई पर बना यह ढांचा सामान्य 12 मंजिला इमारत के बराबर खड़ा है और पूरे हाई स्पीड रूट के सबसे ऊंचे व जटिल निर्माण कार्यों में गिना जाता है।

## मौजूदा रेलवे ट्रैक के ऊपर विशेष इंजीनियरिंग संरचना
यह विशाल संरचना पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य रेल लाइन के बिल्कुल समीप से गुजरती है। मौजूदा जमीनी स्तर से यह लाइन लगभग 14.8 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। व्यस्त ट्रैक और जमीन पर पहले से मौजूद ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से सुरक्षित वर्टिकल दूरी बनाए रखने के उद्देश्य से ही साबरमती नदी पुल के खंभों को अत्यधिक ऊंचाई के साथ डिजाइन किया गया है।

भौगोलिक दृष्टि से यह नया पुल साबरमती और अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच बनाया गया है। इसकी लोकेशन साबरमती स्टेशन से करीब एक किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर है। शहर के घने इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच से गुजरने के कारण इसे विशेष तकनीकी मानकों के तहत तैयार किया गया है।

## 8 मजबूत खंभों पर टिकी है पूरी बनावट
नदी के प्रवाह को निर्बाध रखने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस ढांचे को 8 गोलाकार पिलरों पर स्थापित किया है। इन पिलरों को इस तरह से नियोजित किया गया है ताकि पानी के बहाव में न्यूनतम अवरोध पैदा हो। इनमें से 4 पिलर नदी की मुख्य तलहटी के भीतर खड़े किए गए हैं, जबकि 2 पिलर दोनों तटों पर और शेष 2 पिलर किनारों के बाहरी हिस्से में स्थित हैं। इस व्यवस्था से नदी का प्राकृतिक तंत्र प्रभावित नहीं होता।

## बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक से बिना मचान हुआ निर्माण
इस पुल को खड़ा करने के लिए बैलेंस्ड कैंटिलीवर मेथड का सहारा लिया गया। यह एक आधुनिक और विशेष निर्माण पद्धति है, जिसका उपयोग गहरी नदियों, कठिन जलमार्गों और अत्यधिक फैलाव वाले गैप पर पुल बनाने के लिए किया जाता है। इस इंजीनियरिंग तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके जरिए ऊपरी हिस्से के नीचे पारंपरिक बल्लियों या मचान का भारी जाल बिछाए बिना ही हवा में ढांचे को संतुलित करते हुए काम आगे बढ़ाया जाता है।

## गुजरात में 21 में से 18 नदी पुलों का ढांचा तैयार
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना का पूरा मार्ग कई मौजूदा शहरी और परिवहन ढांचों के ऊपर से होकर गुजरता है। इनमें व्यस्त फ्लाईओवर, पुराने पुल, चालू रेलवे लाइनें और मेट्रो कॉरिडोर शामिल हैं। समूचे कॉरिडोर में नदियों पर कुल 25 बड़े पुल बनाए जाने हैं, जिनमें से 21 पुल गुजरात राज्य की सीमा में और 4 पुल महाराष्ट्र में पड़ते हैं। शनिवार को साझा किए गए विवरण के अनुसार, गुजरात के हिस्से में आने वाले 21 प्रस्तावित नदी पुलों में से अब तक 18 का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

## इसका आप पर असर
इस बड़े निर्माण के पूरा होने से मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड प्रोजेक्ट की ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया तेज होगी।

- **भारत में:** देश के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के बुनियादी ढांचे का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रमुख पुलों का ढांचा समय पर तैयार होने से पूरे हाई स्पीड नेटवर्क के संचालन में लगने वाला समय घटेगा।
- **गुजरात में:** राज्य में प्रस्तावित 21 में से 18 नदी पुल तैयार होने से स्थानीय रेल नेटवर्क निर्माण में तेजी आएगी। अहमदाबाद और साबरमती स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी का मुख्य अड़चन वाला काम अब पूरा हो चुका है।
- **यात्रियों के लिए:** नदी पार करने वाले बड़े सिविल ढांचे बनने से भविष्य में सफर की समयसीमा तय होने की राह आसान होगी। इस रूट के शुरू होने पर अहमदाबाद से मुंबई के बीच यात्रा का समय घटकर कुछ ही घंटों में सिमट जाएगा।
- **स्थानीय पर्यावरण के लिए:** खंभों को नदी के प्रवाह के अनुरूप डिजाइन किए जाने से साबरमती के जल बहाव में कोई रुकावट नहीं आएगी। निर्माण के दौरान पारंपरिक मचान का इस्तेमाल न होने से नदी के तलहटी क्षेत्र को नुकसान से बचाया गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
अहमदाबाद के व्यस्त शहरी और रेलवे क्षेत्र के ऊपर से सुरक्षित हाई-स्पीड लाइन गुजारने के लिए यह ऊंचा ढांचा तैयार किया गया है।

- **ऊंचाई का कारण:** पुल के ठीक नीचे पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली मुख्य रेल लाइन 14.8 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चालू ट्रेनों की आवाजाही को बिना बाधित किए आवश्यक वर्टिकल क्लीयरेंस बनाए रखने के लिए इस पुल को 36 मीटर ऊंचा बनाना जरूरी था।
- **विशेष निर्माण पद्धति:** नदी की चौड़ाई और गहराई के चलते पारंपरिक मचान लगाना संभव और सुरक्षित नहीं था। इसलिए इंजीनियरों ने बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक चुनी, जिससे पिलरों के दोनों तरफ संतुलित ढंग से ढांचा तैयार किया गया।
- **नदी संरक्षण की योजना:** नदी के बहाव को रोके बिना मजबूती देने के लिए खंभों की संख्या 8 तक सीमित रखी गई। केवल 4 पिलर नदी तलहटी में दिए गए ताकि बाढ़ या तेज बहाव के समय पानी आसानी से निकल सके।

## सवाल-जवाब

### 1. साबरमती नदी पर बने बुलेट ट्रेन पुल की लंबाई और ऊंचाई कितनी है?
इस पुल की कुल लंबाई 480 मीटर और ऊंचाई 36 मीटर (लगभग 118 फुट) है, जो 12 मंजिला इमारत के बराबर है।

### 2. यह पुल किन दो स्टेशनों के बीच स्थित है?
यह पुल साबरमती और अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच बना है, जो साबरमती स्टेशन से 1 किलोमीटर और अहमदाबाद स्टेशन से 4 किलोमीटर दूर है।

### 3. पुल को सहारा देने के लिए कितने पिलर बनाए गए हैं?
पुल को 8 गोलाकार पिलरों पर खड़ा किया गया है, जिनमें से 4 नदी के भीतर, 2 दोनों किनारों पर और 2 किनारों के बाहर स्थित हैं।

### 4. इस पुल के निर्माण में किस तकनीक का उपयोग किया गया है?
इसके निर्माण के लिए बैलेंस्ड कैंटिलीवर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पारंपरिक मचान के बिना ऊपरी ढांचा बनाया गया।

### 5. गुजरात में बुलेट ट्रेन रूट पर अब तक कितने नदी पुल बन चुके हैं?
गुजरात में प्रस्तावित कुल 21 नदी पुलों में से 18 पुलों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

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