व्यापारियों के लिए राहत, एक नवंबर को आएगा नया जीएसटी रिटर्न फॉर्म का मसौदा वित्त मंत्रालय एक नवंबर को संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म का मसौदा परामर्श के लिए जारी करेगा। नए बदलावों से विसंगतियों को दूर करने और टैक्स नोटिस की संख्या घटाने में मदद मिलेगी। व्यापारियों और करदाताओं के लिए कर अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक सहज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाया जा रहा है। जीएसटी परिषद की बैठक के बाद अब सरकार की ओर से एक नया और उन्नत रिटर्न फॉर्म लाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस नई व्यवस्था के माध्यम से उन तमाम विसंगतियों को दूर करना है, जिनका सामना लंबे समय से कारोबारी करते आ रहे हैं। इन सभी सुधारों और बदलावों पर जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान विस्तार से चर्चा भी की जा चुकी है, जिसके बाद अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से यह घोषणा की गई है कि एक नवंबर को संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म का मसौदा परामर्श के लिए सार्वजनिक किया जाएगा। इस मसौदे को माईगॉव.इन मंच पर जारी किया जाएगा ताकि इस पर संबंधित पक्षों की राय ली जा सके। इस प्रक्रिया में जीएसटीआर-1 भी शामिल है, जिसके जरिए व्यापारियों को अपनी बाहरी सप्लाई का पूरा ब्योरा सरकार के सामने प्रस्तुत करना होता है। सरकार की इस पहल से कर प्रणाली में पारदर्शिता आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। केंद्र तथा राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति यानी जीएसटी परिषद ने गत 8 अक्टूबर को अपनी 57वीं बैठक आयोजित की थी। इसी बैठक के दौरान जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-1ए और आईएफएफ फॉर्म के संशोधित मसौदे को आधिकारिक मंजूरी प्रदान की गई थी। हालांकि इन नए और संशोधित फॉर्मों को औपचारिक रूप से एक अप्रैल, 2027 से लागू किया जाएगा, लेकिन इसके मसौदे को काफी पहले ही सार्वजनिक मंच पर जारी किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी हितधारक और कारोबारी इस पर समय रहते अपने बहुमूल्य सुझाव और प्रतिक्रिया दे सकें। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, जो कि वित्त मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है, इन सभी फॉर्मों को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए माईगॉव.इन पोर्टल पर उपलब्ध कराएगा। इस पोर्टल पर कोई भी संबंधित व्यक्ति या कारोबारी 30 नवंबर तक अपने कमेंट और सुझाव दर्ज करा सकता है। बोर्ड द्वारा इन सभी सुझावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा ताकि अंतिम रूप देने से पहले जरूरी सुधार किए जा सकें। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के जीएसटी नीति प्रभाग के आयुक्त गौरव सिंह के अनुसार, वर्तमान समय में माल एवं सेवा कर प्रणाली के भीतर रिटर्न के ब्योरे में होने वाली विसंगतियां एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई हैं। स्थिति यह है कि करदाताओं को मिलने वाले कुल नोटिसों में से लगभग 80 फीसदी नोटिस केवल इन्हीं छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण जारी किए जाते हैं, जिससे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत कारोबारी अपने जीएसटीआर-3बी में बदलाव या संशोधन करने की सुविधा रखते हैं। यह फॉर्म मुख्य रूप से स्व-घोषित रिटर्न और मासिक टैक्स भुगतान से जुड़ा होता है। लेकिन इसमें बार-बार किए जाने वाले बदलावों के कारण मुख्य जीएसटीआर-1 फॉर्म के साथ ब्योरे में भारी विसंगतियां पैदा हो जाती हैं। आयुक्त गौरव सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि आखिर किन कारणों से कारोबारी जीएसटीआर-3बी में संशोधन करने के लिए मजबूर होते हैं, और उद्योग जगत से प्राप्त इसी फीडबैक के आधार पर जीएसटी फॉर्म में जरूरी बदलाव किए गए हैं ताकि इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली को और अधिक बेहतर बनाया जा सके। उद्योग जगत की प्रतिक्रियाओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने जीएसटीआर-1 फॉर्म में आवश्यक संशोधन किए हैं। इसके साथ ही इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली को भी काफी उन्नत बनाया गया है ताकि भविष्य में जीएसटीआर-3बी में किसी भी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता ही न पड़े। यदि इस प्रकार के संशोधनों की जरूरत ही समाप्त हो जाएगी, तो ब्योरे की विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी करने का कोई मामला ही नहीं बनेगा। एक नवंबर को जब इन फॉर्मों को टिप्पणियों के लिए माईगॉव.इन पर रखा जाएगा, तो इस पूरी प्रक्रिया के लिए हितधारकों को पूरे 30 दिन का समय प्रदान किया जाएगा। यदि जीएसटी रिटर्न प्रणाली से जुड़े इन तमाम सुधारों को पूरी सफलता के साथ लागू किया जा सका, तो सप्लाई चेन में मौजूद पारदर्शिता और सटीकता से जुड़ी सभी पुरानी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। जीएसटी रिटर्न फॉर्म के अंतर्गत इनवॉइस प्रस्तुत करने की सुविधा यानी आईएफएफ, वास्तव में जीएसटी की तिमाही रिटर्न मासिक भुगतान योजना के तहत करदाताओं द्वारा दाखिल किया जाने वाला एक वैकल्पिक मासिक विवरण पत्र होता है। दूसरी ओर, जीएसटीआर-1 मूल रूप से बिक्री का एक मासिक इनवॉइस या बिल आधारित रिटर्न होता है। इसके विपरीत, जीएसटीआर-1ए एक संशोधन विवरण होता है जो करदाताओं को अपना मासिक जीएसटीआर-3बी रिटर्न आधिकारिक रूप से दाखिल करने से पहले अपनी किसी भी गलती को सुधारने या फिर किसी छूटे हुए बिल का ब्योरा जोड़ने की पूरी अनुमति प्रदान करता है। जीएसटी परिषद ने गत आठ अक्टूबर को हुई अपनी बैठक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। परिषद ने जीएसटी रिटर्न में टैक्स देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों में संशोधन करने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को अपनी स्वीकृति दी थी। इस पूरी कवायद का मुख्य लक्ष्य यही है कि ब्योरे में होने वाली विसंगतियों को कम किया जा सके और करदाताओं को भेजे जाने वाले नोटिसों या सूचनाओं की संख्या में भारी कमी लाई जा सके। परिषद ने जीएसटी फॉर्म जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-1ए और आईएफएफ में व्यापक सुधारों को मंजूरी दी थी, ताकि इन फॉर्मों में दर्शाए गए ब्योरे का मिलान मासिक कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर-3बी में दर्ज विवरण के साथ अधिक सटीक तरीके से हो सके। इसके अलावा परिषद ने रिटर्न के भीतर इनपुट टैक्स क्रेडिट की बिल्कुल सही जानकारी प्रदान करने और उसमें उचित सुधार तथा संशोधन करने की व्यवस्था को भी हरी झंडी दिखा दी है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जीएसटीआर-3बी के तहत जिन इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जा रहा है, वे सभी जीएसटीआर-2बी में उपलब्ध कराए गए विवरणों के साथ पूरी तरह मेल खाते हों। इसका आप पर असर जीएसटी रिटर्न फॉर्म में होने वाले इन नए बदलावों का सीधा असर देश के सभी पंजीकृत कारोबारियों और करदाताओं की दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ेगा। • भारत में: नए फॉर्म और बेहतर इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली लागू होने से कर रिटर्न में होने वाली विसंगतियां कम होंगी। इससे व्यापारियों को मिलने वाले अनावश्यक टैक्स नोटिसों की संख्या में भारी गिरावट आएगी। • कारोबारियों के लिए: करदाताओं को अब जीएसटीआर-3बी में बार-बार संशोधन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे अनुपालन का बोझ घटेगा और सप्लाई चेन में पारदर्शिता तथा सटीकता में सुधार होगा। • समय सीमा: कारोबारी और हितधारक एक नवंबर से 30 नवंबर के बीच नए फॉर्म के मसौदे पर अपने सुझाव दे सकेंगे। नए नियम लागू होने से पहले उन्हें अपनी लेखा प्रणालियों को अपडेट करने का समय मिल जाएगा। ऐसा क्यों हुआ सरकार द्वारा जीएसटी रिटर्न फॉर्म में यह बड़े बदलाव इसलिए किए जा रहे हैं क्योंकि मौजूदा प्रणाली में कई प्रकार की विसंगतियां बनी हुई थीं। इन तकनीकी कारणों से करदाताओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। • विसंगतियों की समस्या: वर्तमान में माल एवं सेवा कर प्रणाली में रिटर्न के ब्योरे में मेल न खाने की बड़ी समस्या है। करीब 80 प्रतिशत नोटिस केवल इसी कारण से जारी किए जाते हैं। • जीएसटीआर-3बी में संशोधन: कारोबारी अक्सर अपने स्व-घोषित मासिक रिटर्न फॉर्म में बदलाव करते हैं। इससे मुख्य जीएसटीआर-1 फॉर्म के साथ आंकड़ों में भारी अंतर आ जाता है। • उद्योग जगत का फीडबैक: सरकार ने विभिन्न उद्योगों और व्यापारिक संगठनों से प्राप्त जवाबों के आधार पर इन कमियों को दूर करने का निर्णय लिया है। सवाल-जवाब 1. नया जीएसटी रिटर्न फॉर्म कब सामने आएगा? संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म का मसौदा एक नवंबर को परामर्श के लिए जारी किया जाएगा। 2. मसौदा किस मंच पर जारी किया जाएगा? यह मसौदा माईगॉव.इन मंच और पोर्टल पर सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए रखा जाएगा। 3. इस पर सुझाव देने की अंतिम तिथि क्या है? कारोबारी और हितधारक 30 नवंबर तक इस पर अपने कमेंट और सुझाव दे सकते हैं। 4. नए फॉर्म कब से लागू होंगे? संशोधित फॉर्म आधिकारिक रूप से एक अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे। 5. जीएसटीआर-1 क्या है? जीएसटीआर-1 बिक्री का एक मासिक इनवॉइस या बिल आधारित रिटर्न फॉर्म होता है। 6. ज्यादातर नोटिस क्यों जारी होते हैं? करीब 80 फीसदी नोटिस रिटर्न के ब्योरे में होने वाली विसंगतियों के कारण जारी किए जाते हैं। https://trendkia.com/business/new-gst-return-form-draft-set-to-release-on-november-1-for-businesses-50568 TrendKia — Har trend, sabse pehle.