# निजी पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद की सीमा तय करने पर केंद्र सरकार ने जताई सख्त आपत्ति

> थोक और खुदरा भाव में ₹50 प्रति लीटर तक का भारी अंतर आने से खुदरा पंपों पर डीजल की मांग बढ़ गई है, जिस पर प्राइवेट कंपनियों द्वारा राशनिंग लगाए जाने को केंद्र ने अस्वीकार्य बताया है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/niji-petrola-pnpon-para-diesel-kharida-ki-sima-taya-karane-para-kendra-sarakara-ne-jatai-sakhta-apatti-41450 · **Language:** Hindi
**Tags:** डीजल की कीमत, पेट्रोलियम मंत्रालय, जियो बीपी, नायरा एनर्जी, थोक ईंधन, हरदीप सिंह पुरी, नीरज मित्तल

डीजल की खुदरा और थोक दरों में भारी अंतर पैदा होने के बाद निजी ईंधन पंपों पर अचानक खरीद का दबाव काफी बढ़ गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ निजी पंपों ने डीजल बिक्री पर सीमा तय करनी शुरू कर दी, जिस पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल या डीजल की बिक्री को सीमित करने की छूट किसी भी कंपनी या डीलर को नहीं है। डीजल बिक्री पर राशनिंग लगाए जाने को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस संबंध में सरकार की नीति पहले जैसी ही स्पष्ट और अपरिवर्तित है।

## थोक और खुदरा दरों में ₹50 प्रति लीटर का भारी फासला
मौजूदा समय में डीजल के थोक और खुदरा मूल्यों के बीच लगभग ₹50 प्रति लीटर तक का बड़ा अंतर आ चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद खुदरा पेट्रोल और डीजल के दाम मई महीने से स्थिर बने हुए हैं। इसके विपरीत, थोक ईंधन की दरें सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजारों से जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते थोक भाव में तेज उछाल देखा गया है। इस भारी मूल्य अंतर का सीधा असर बाजार की खरीद व्यवस्था पर पड़ा है।

कारखाने, दूरसंचार नेटवर्क कंपनियां, बड़े होटल, निजी अस्पताल और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता अपनी भारी ईंधन जरूरतें पूरी करने के लिए अब थोक डिपो के बजाय खुदरा पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। कई व्यावसायिक ग्राहक खुदरा आउटलेट्स से एक ही बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल उठा रहे हैं ताकि उन्हें सस्ता ईंधन मिल सके। इससे स्थानीय खुदरा पंपों के सीमित भंडारण ढांचे पर अप्रत्याशित दबाव बन गया है, क्योंकि उनके पास तय क्षमता के टैंक होते हैं और तेल डिपो से दोबारा आपूर्ति पहुंचने में कुछ दिनों का वक्त लग जाता है।

## जियो-बीपी और नायरा एनर्जी के आउटलेट्स पर राशनिंग की स्थिति
अचानक पैदा हुई इस भारी मांग के चलते निजी ईंधन विक्रेता कंपनियों के चुनिंदा पंपों पर डीजल खरीद सीमित करने के कदम उठाए गए। जियो-बीपी ने अपने कुछ आउटलेट्स पर प्रति ग्राहक प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल बेचने की बंदिश लागू की है। वहीं दूसरी ओर, नायरा एनर्जी के विभिन्न पंपों पर यह दैनिक बिक्री सीमा 70 लीटर से 200 लीटर प्रति ग्राहक के बीच तय की गई है। इस तरह के कदमों से बड़े वाहनों और औद्योगिक ग्राहकों को अपनी जरूरत का ईंधन जुटाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

## सरकार का कड़ा संदेश और पेट्रोलियम मंत्रालय की निगरानी
ईंधन की बिक्री पर पाबंदी लगाए जाने की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने दोहराया कि किसी भी ईंधन विक्रेता को बिक्री सीमित करने की इजाजत नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा करना पूरी तरह अस्वीकार्य है और कंपनियों को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए। मित्तल के अनुसार, सरकार पूर्व में भी निजी पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की निर्बाध बिक्री सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक निर्देश और औपचारिक पत्र जारी कर चुकी है, और प्रशासन का यह रुख पूरी तरह अडिग है।

पूरे घटनाक्रम पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार निजी तेल कंपनियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। हालांकि उन्होंने इस बातचीत के विशिष्ट ब्योरे साझा नहीं किए, लेकिन सरकार पूरे आपूर्ति नेटवर्क पर नजर बनाए हुए है ताकि आम जनता और परिवहन क्षेत्र को ईंधन की किल्लत न झेलनी पड़े।

## ईंधन की पर्याप्तता पर निजी तेल कंपनियों की सफाई
डीजल बिक्री पर पाबंदी की चर्चाओं के बीच दोनों प्रमुख निजी कंपनियों ने आपूर्ति सामान्य रहने का दावा किया है। जियो-बीपी ने कहा है कि उसके सभी पेट्रोल पंप नियमित रूप से काम कर रहे हैं और वहां ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। कंपनी के अनुसार, बढ़ती मांग के बीच वह परिवहन क्षेत्र और रोजमर्रा की उपभोक्ता जरूरतों के लिए ईंधन का समान और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है।

इसी तरह नायरा एनर्जी ने भी बयान जारी कर बताया है कि वह अपने 7,000 से अधिक डीलर स्टेशनों और अन्य वितरण माध्यमों के जरिए ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने पर पूरा ध्यान दे रही है। हालांकि, दोनों ही कंपनियों ने अपने औपचारिक बयानों में पंपों पर लगाई गई खरीद सीमा के सीधे कारणों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा है।

## इसका आप पर असर
डीजल के खुदरा और थोक दामों में भारी अंतर के कारण निजी पंपों पर सीमित खरीद की समस्या सामने आई है, जिस पर सरकार के कड़े रुख से आम उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्टरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

- **वाहन चालकों और किसानों पर:** यदि आप निजी पंपों से नियमित ईंधन लेते हैं, तो आपको 50 से 200 लीटर की सीमित राशनिंग का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है, इसलिए जरूरत पड़ने पर वहां से बिना रुकावट पूरा टैंक भरवाया जा सकता है।
- **थोक खरीदारों और उद्योगों पर:** फैक्ट्रियों, अस्पतालों और होटल संचालकों को थोक डिपो से महंगा डीजल लेने के बजाय खुदरा पंपों से सस्ता तेल खरीदने में अब सख्ती झेलनी पड़ सकती है। सरकार के हस्तक्षेप के बाद खुदरा पंपों से 400 से 600 लीटर की एकमुश्त खरीद पर निगरानी बढ़ सकती है।
- **आपूर्ति और कतारों पर:** निजी पंपों पर भंडारण क्षमता सीमित होने से कुछ आउटलेट्स पर शाम के समय डीजल खत्म होने या लंबी कतारों की नौबत आ सकती है। लंबी यात्रा पर निकलने वाले वाणिज्यिक वाहन चालकों को प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहले से ईंधन भरवाने की योजना बनानी चाहिए।
- **ईंधन दरों के बदलाव पर:** खुदरा कीमतें मई महीने से नहीं बदली हैं, जिससे आम जनता को बढ़ी हुई अंतरराष्ट्रीय दरों का झटका फिलहाल नहीं लगा है। हालांकि थोक और खुदरा दरों में ₹50 प्रति लीटर का यह फासला बने रहने तक आपूर्ति दबाव की स्थिति जारी रह सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी और घरेलू स्तर पर खुदरा तथा थोक दरों के अलग-अलग तंत्र से तय होने के कारण पैदा हुआ है। खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं जबकि थोक दरें लगातार बढ़ रही हैं।

- **दामों में भारी असंतुलन:** खुदरा पेट्रोल और डीजल के दाम मई महीने से पूरी तरह स्थिर रखे गए हैं, जबकि थोक ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होने के कारण लगातार महंगी होती गईं। नतीजतन थोक और खुदरा डीजल के बीच प्रति लीटर लगभग ₹50 का अंतर आ गया।
- **थोक ग्राहकों का खुदरा पंपों पर रुख:** कारखानों, टेलीकॉम ऑपरेटरों, अस्पतालों और बड़े प्रतिष्ठानों ने सीधे कंपनियों से थोक ईंधन मंगाना बंद कर खुदरा पंपों से सस्ता डीजल खरीदना शुरू कर दिया। ये ग्राहक एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल उठाने लगे।
- **सीमित स्थानीय भंडारण ढांचा:** खुदरा पेट्रोल पंपों के पास भूमिगत टैंकों में सीमित मात्रा में तेल रखने की क्षमता होती है और डिपो से नई खेप पहुंचने में कुछ दिन लग जाते हैं। अचानक कई गुना मांग बढ़ने से कुछ निजी आउटलेट्स का दैनिक स्टॉक समय से पहले समाप्त होने लगा।
- **निजी कंपनियों द्वारा राशनिंग:** स्टॉक को खत्म होने से बचाने के लिए जियो-बीपी ने अधिकतम 50 लीटर और नायरा एनर्जी ने 70 से 200 लीटर प्रति ग्राहक की सीमा लगा दी, जिसे केंद्र सरकार ने नियमों के विरुद्ध ठहराया है।

## सवाल-जवाब

### 1. डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में कितना अंतर आ गया है?
डीजल की खुदरा और थोक कीमतों के बीच लगभग ₹50 प्रति लीटर तक का अंतर पहुंच चुका है।

### 2. किन निजी कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद सीमित की थी?
जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने अपने चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल की दैनिक बिक्री सीमा तय की थी।

### 3. निजी पंपों पर ग्राहकों के लिए डीजल की क्या सीमा तय की गई थी?
जियो-बीपी ने कुछ पंपों पर रोजाना अधिकतम 50 लीटर और नायरा एनर्जी ने 70 से 200 लीटर प्रति ग्राहक की सीमा लगाई थी।

### 4. डीजल बिक्री पर पाबंदी को लेकर केंद्र सरकार का क्या रुख है?
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने स्पष्ट किया है कि ईंधन बिक्री सीमित करने की अनुमति किसी को नहीं है और ऐसा करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

### 5. खुदरा पंपों पर डीजल की मांग अचानक क्यों बढ़ गई?
थोक डीजल बहुत महंगा होने के कारण फैक्ट्रियां, होटल, अस्पताल और टेलीकॉम कंपनियां खुदरा पंपों से एक बार में 400 से 600 लीटर सस्ता डीजल खरीदने लगीं।

### 6. खुदरा पेट्रोल और डीजल के दाम कब से स्थिर बने हुए हैं?
खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई महीने से स्थिर बनी हुई हैं, जबकि थोक दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार बढ़ी हैं।

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