निर्मला सीतारमण से बातचीत के बाद व्यापारियों ने 2 अक्टूबर का 'नो यूपीआई डे' आंदोलन वापस लिया केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है। हालांकि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर प्रस्तावित 0.40 प्रतिशत एमडीआर ढांचा फिलहाल अपनी जगह बना हुआ है। अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक महासंघ और अखिल भारतीय मोबाइल खुदरा विक्रेता संघ ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित अपने 'नो यूपीआई डे' आंदोलन को वापस लेने का फैसला किया है। यह कदम बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ व्यापारी प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद उठाया गया। कारोबारी संगठन 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के मर्चेंट डिजिटल लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। बैठक में मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद उन्होंने त्योहारी सीजन से ठीक पहले इस सांकेतिक विरोध प्रदर्शन को टालने का निर्णय लिया है। नई दिल्ली में वित्त मंत्री के साथ व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का संवाद व्यापारियों की चिंताओं को सीधे केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए विभिन्न राज्यों से आए लगभग 20 वरिष्ठ व्यापार प्रतिनिधियों का एक दल नई दिल्ली पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीएआईटी के राष्ट्रीय महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल कर रहे थे। इस चर्चा में खुदरा व्यापार और थोक वितरण तंत्र से जुड़े प्रमुख कारोबारी शामिल हुए, जिन्होंने वित्त मंत्री के समक्ष बाजार की व्यावहारिक जमीनी दिक्कतों को विस्तार से रखा। व्यापारिक प्रतिनिधियों ने बैठक में आग्रह किया कि प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था की समीक्षा की जाए और इसके क्रियान्वयन को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाए। संगठनों ने विशेष रूप से यह दलील दी कि देश में त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू हो रहा है, जिस दौरान खुदरा कारोबार और डिजिटल लेन-देन दोनों में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में कोई भी नया चार्ज लागू होने से खुदरा व्यापार के संचालन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, व्यापारी संगठनों ने मांग की कि शुल्क लगाने की 2,000 रुपये की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर और ऊंचा किया जाना चाहिए, ताकि सामान्य कारोबारी लेन-देन इससे प्रभावित न हों। बातचीत के दौरान सरकार की तरफ से उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला हुआ। क्या एमडीआर का प्रस्ताव पूरी तरह से रद्द हो गया है? आंदोलन वापस लेने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था को खारिज या रद्द कर दिया गया है। मौजूदा रूपरेखा के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति से व्यापारी यानी पी2एम यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत का शुल्क लागू होना निर्धारित है। इस प्रस्तावित नियम में व्यापारियों के लिए अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये प्रति लेन-देन तय की गई है। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह शुल्क आम लोगों द्वारा आपस में किए जाने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पर कतई लागू नहीं होगा। यदि एक सामान्य उपभोक्ता किसी दूसरे व्यक्ति को राशि भेजता है, तो वह पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। इसके अलावा, व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के डिजिटल भुगतान भी इस शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं। छोटे दुकानदारों और पात्र सूक्ष्म व्यापारियों को शून्य-एमडीआर प्रावधानों के तहत सुरक्षा प्रदान की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल डिजिटल लेन-देन की संख्या का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा इस व्यवस्था से पूरी तरह अप्रभावित रहेगा। लेन-देन की रकम पर शुल्क का गणित यदि यह प्रस्तावित दर 15 अक्टूबर से लागू होती है, तो इसका असर केवल बड़े व्यापारिक भुगतानों पर ही देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पात्र मर्चेंट को 3,000 रुपये का डिजिटल भुगतान प्राप्त होता है, तो 0.40 प्रतिशत की दर से उस पर 12 रुपये का एमडीआर बनेगा। इसी प्रकार, 50,000 रुपये के मर्चेंट लेन-देन पर यह शुल्क 200 रुपये होगा। बड़े लेन-देन करने वाले कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार ने शुल्क की ऊपरी सीमा 300 रुपये निर्धारित की है। इसका मतलब यह है कि 75,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के किसी भी बड़े मर्चेंट लेन-देन पर शुल्क 300 रुपये से अधिक नहीं बढ़ सकता। व्यापारी संगठनों का कहना है कि वे इस पूरी वित्तीय संरचना पर सरकार के साथ आगे भी संवाद जारी रखेंगे ताकि छोटे और मध्यम खुदरा विक्रेताओं के हितों की रक्षा हो सके। इसका आप पर असर इस फैसले से 2 अक्टूबर को पूरे देश में सामान्य डिजिटल खरीदारी सुचारू रूप से चलेगी और बाजार बंद जैसी स्थिति नहीं बनेगी। • दुकानदारों के लिए: 2 अक्टूबर को यूपीआई लेन-देन बंद करने का फैसला टलने से त्योहारी बिक्री पर कोई तत्काल रुकावट नहीं आएगी। हालांकि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.40 प्रतिशत शुल्क पर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा। • आम ग्राहकों के लिए: सामान्य उपभोक्ताओं द्वारा 2,000 रुपये तक की रोजमर्रा की खरीदारी और दोस्तों-रिश्तेदारों को भेजे जाने वाले पैसों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यह व्यवस्था केवल 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट्स के लिए प्रस्तावित की गई है। • बड़े खरीदारी बिलों पर: यदि कोई ग्राहक 75,000 रुपये या उससे अधिक का इलेक्ट्रॉनिक सामान या बड़ा उत्पाद खरीदता है, तो उस पर अधिकतम शुल्क केवल 300 रुपये तक सीमित रहेगा। इससे बड़े कारोबारी भुगतानों पर असीमित कटौती का जोखिम खत्म हो गया है। • छोटे व्यापारियों के लिए: 96 प्रतिशत डिजिटल भुगतान आयतन के हिसाब से इस नियम से पूरी तरह बाहर हैं। छोटे खुदरा दुकानदारों को शून्य-एमडीआर नियमों के तहत सुरक्षित रखा गया है जिससे उनके मुनाफे पर असर नहीं पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ व्यापारी संगठनों ने प्रस्तावित डिजिटल शुल्क के वित्तीय बोझ और त्योहारी सीजन में बिक्री प्रभावित होने की आशंका के चलते विरोध का बिगुल फूंका था। वित्त मंत्री के सीधे हस्तक्षेप और मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद यह गतिरोध समाप्त हुआ। • प्रस्तावित एमडीआर की घोषणा: सरकार द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क 15 अक्टूबर से लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस नए वित्तीय बोझ का सीधा असर वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन पर पड़ने की संभावना बनी। • त्योहारी सीजन का समय: अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्पाद वितरक महासंघ और मोबाइल खुदरा विक्रेता संघ का मानना था कि अक्टूबर में त्योहारी खरीदारी चरम पर होती है। इस समय नया शुल्क लगाने या विरोध करने से दोनों पक्षों का बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता था। • संसदीय प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता: सांसद और व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल के नेतृत्व में 20 सदस्यीय दल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सीधे मिलकर अपनी समस्याएं रखीं। सरकार द्वारा सकारात्मक समीक्षा का आश्वासन मिलने के बाद संगठनों ने 2 अक्टूबर का आंदोलन वापस ले लिया। सवाल-जवाब 1. व्यापारियों ने 2 अक्टूबर का 'नो यूपीआई डे' विरोध प्रदर्शन क्यों वापस लिया? केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक में व्यापारी संगठनों को उनकी चिंताओं पर विचार करने का आश्वासन मिला, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया। 2. वित्त मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया? इस 20 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीएआईटी के राष्ट्रीय महासचिव और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने किया। 3. प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर कब से लागू होना निर्धारित है? वर्तमान रूपरेखा के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन पर यह 0.40 प्रतिशत शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होना निर्धारित है। 4. क्या आम लोगों के आपसी यूपीआई लेन-देन पर भी कोई चार्ज लगेगा? नहीं, साधारण व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त हैं। 5. 3,000 रुपये और 50,000 रुपये के लेन-देन पर कितना एमडीआर बनेगा? प्रस्तावित दरों के तहत 3,000 रुपये के पात्र मर्चेंट लेन-देन पर 12 रुपये और 50,000 रुपये के लेन-देन पर 200 रुपये का शुल्क लगेगा। 6. इस प्रस्तावित व्यवस्था में अधिकतम शुल्क की सीमा क्या रखी गई है? प्रति लेन-देन अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये तय की गई है, जो 75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन पर प्रभावी होगी। https://trendkia.com/business/nirmala-sitharaman-se-batachita-ke-bada-vyapariyon-ne-2-aktubara-ka-no-up-ai-de-andolana-vapasa-liya-40574 TrendKia — Har trend, sabse pehle.