गुरुग्राम पर निर्भरता होगी खत्म, हरियाणा सरकार लाई करोड़ों रुपये का इंडस्ट्रियल प्लान हरियाणा सरकार ने मुंबई में आयोजित 'हैपनिंग हरियाणा 2.0' आउटरीच के दौरान 66,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे राज्य के विभिन्न जिलों में उद्योगों का जाल बिछेगा। यदि आप रोजगार की तलाश में या नया कारोबार शुरू करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र या गुरुग्राम की ओर रुख करने का विचार कर रहे हैं, तो अपने कदम रोक लीजिए क्योंकि हरियाणा सरकार अब खुद भारी-भरकम पूंजी और औद्योगिक परियोजनाएं आपके गृह क्षेत्र तक पहुंचाने जा रही है। आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित 'हैपनिंग हरियाणा 2.0' अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कार्यक्रम के दौरान राज्य प्रशासन ने विकास की एक नई इबारत लिखते हुए 66,000 करोड़ रुपये से अधिक के भारी निवेश प्रस्तावों पर मुहर लगाई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसरों को चंद बड़े महानगरों तक सीमित न रखकर राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाना है ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही गृह जिले में आजीविका के बेहतरीन विकल्प मिल सकें। गुरुग्राम पर निर्भरता घटाने का बड़ा प्रयास मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य के निवासियों का समग्र विकास होना चाहिए। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि अब समय आ गया है जब गुरुग्राम जैसे मिलेनियम शहरों पर से अत्यधिक निर्भरता को समाप्त किया जाए। इसी विजन को जमीन पर उतारने के लिए 66,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में यह ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल एक या दो गिने-चुने शहरी इलाकों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राज्य के हर हिस्से में तरक्की की बयार बहनी चाहिए। पूरे राज्य में फैलेगा उद्योगों का विशाल जाल पारंपरिक रूप से हरियाणा का औद्योगिक परिदृश्य केवल गुरुग्राम या फरीदाबाद के इर्द-गिर्द ही घूमता नजर आता था, लेकिन अब इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि निवेश का वितरण पूरे भूभाग पर एक समान हो। इसके लिए एक सुव्यवस्थित मास्टरप्लान तैयार किया गया है जिसके तहत हर जिले को अपनी एक विशिष्ट औद्योगिक पहचान दी जाएगी। उपलब्ध भूमि, श्रम कौशल और परिवहन कनेक्टिविटी को आधार बनाते हुए पूरे राज्य को चार प्रमुख भौगोलिक हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि नियोजित तरीके से फैक्ट्रियों और व्यावसायिक इकाइयों को स्थापित किया जा सके। चारों हिस्सों के लिए तय किए गए खास सेक्टर उत्तर हरियाणा के क्षेत्र को मुख्य रूप से फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्युटिकल्स, वैज्ञानिक उपकरणों के निर्माण और लॉजिस्टिक्स का एक बड़ा राष्ट्रीय केंद्र विकसित किया जाएगा। मध्य हरियाणा का इलाका भारी इंजीनियरिंग, वस्त्र उद्योग, ऑटोमोबाइल निर्माण और वेयरहाउसिंग गतिविधियों का मुख्य गढ़ बनकर उभरेगा। दक्षिण हरियाणा में सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और उन्नत विनिर्माण तकनीकों पर विशेष बल दिया जाएगा। पश्चिम हरियाणा के हिस्से को कृषि आधारित उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, वस्त्र निर्माण और विशेष तौर पर निर्यात केंद्रित इकाइयों के विकास के लिए आरक्षित किया गया है। फाइलों की बजाय धरातल पर काम करने की नीति मुंबई में देश के वित्तीय जगत के दिग्गजों, कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और विभिन्न देशों के महावाणिज्य दूतों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सैनी ने अपनी सरकार की कार्यशैली स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार केवल वादे करने में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारी सरकार फाइल मूवमेंट पर नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट मूवमेंट पर विश्वास करती है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हवाला देते हुए कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है और इस पूरी विकास यात्रा में हरियाणा एक मजबूत ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 1.3 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद यह राज्य राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में लगभग 3.6 प्रतिशत का मजबूत योगदान दे रहा है। निवेशकों के लिए पांच अहम गारंटियां औद्योगिक घरानों को आकर्षित करने और उनके मन से हर प्रकार की आशंका को दूर करने के लिए सरकार ने पांच प्रमुख गारंटियों की घोषणा की है। इनमें सबसे पहले नीतिगत स्थिरता को सुनिश्चित किया गया है ताकि निवेशकों को किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। इसके अलावा समयबद्ध निर्णय और त्वरित मंजूरियां प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। परियोजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने के लिए सरकार पूरी तरह सक्रिय सहयोग प्रदान करेगी। उद्योगों की वास्तविक मांग के अनुरूप कार्यबल का कौशल विकास किया जाएगा और बेहतरीन कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। अंत में इस पूरी निवेश प्रक्रिया को सीधे तौर पर स्थानीय रोजगार सृजन, सूक्ष्म और लघु उद्योगों, नवाचार तथा क्षेत्रीय विकास के साथ जोड़ा गया है। रोजगार के अनगिनत दरवाजे होंगे इससे पहले गुरुग्राम में भी 1.10 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी थी, जिनमें से कुल 123 में से 108 कंपनियों को पहले ही जमीन का आवंटन किया जा चुका है। इसके अलावा किसी भी तरह के औद्योगिक या श्रमिक विवादों को तुरंत सुलझाने के लिए एक विशेष 'उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद' का भी गठन किया गया है। इन तमाम दूरदर्शी कदमों और बड़े पैमाने पर आ रहे पूंजी निवेश से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अनगिनत नए रास्ते खुलने तय हैं। इसका आप पर असर भारत में: हरियाणा सरकार के इस बड़े औद्योगिक निवेश प्लान से देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हरियाणा में: स्थानीय युवाओं को अब रोजगार के लिए बड़े शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा क्योंकि उनके अपने जिलों में ही विभिन्न सेक्टरों की नई फैक्ट्रियां और उद्योग स्थापित होंगे। सवाल-जवाब 1. हैपनिंग हरियाणा 2.0 आउटरीच का आयोजन कहां किया गया था? इस अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में किया गया था। 2. मुंबई सम्मेलन के दौरान कुल कितने निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए? इस सम्मेलन के दूसरे दिन राज्य सरकार ने 66,000 करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक समझौता प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए। 3. हरियाणा को उद्योगों के हिसाब से कितने हिस्सों में बांटा गया है? राज्य को उद्योगों के हिसाब से उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिम हरियाणा नामक चार हिस्सों में बांटा गया है। 4. गुरुग्राम में हाल ही में हुए निवेश समझौतों में से कितनी कंपनियों को जमीन मिल चुकी है? गुरुग्राम में हुए 1.10 लाख करोड़ रुपये के समझौतों में से 123 में से 108 कंपनियों को जमीन आवंटित की जा चुकी है। https://trendkia.com/business/no-need-to-move-to-gurgaon-haryana-brings-multi-crore-industrial-plan-across-all-districts-21325 TrendKia — Har trend, sabse pehle.