ओडिशा तट के गहरे समुद्र में ओएनजीसी को मिला प्राकृतिक गैस भंडार, तीन दिनों से लगातार जारी है अच्छा दबाव ओएनजीसी ने ओडिशा के कोणार्क तट से 43 किलोमीटर दूर महानदी बेसिन में प्राकृतिक गैस की नई खोज की है, जहां कुएं से तीन दिनों से उत्साहजनक फ्लो बना हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख ऊर्जा अन्वेषण इकाई ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने ओडिशा तट से दूर गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज की है। कंपनी के गहरे समुद्री अन्वेषण अभियान 'समुद्र मंथन' के अंतर्गत यह सफलता कोणार्क से लगभग 43 किलोमीटर दूर महानदी अपतटीय बेसिन में मिली है। वहां खोदे गए कुएं 'MN-DW18-1-H-D' में 18 सितंबर को गैस के संकेत मिले, जिसे व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक पाए जाने की स्थिति में तेजी से विकसित कर उत्पादन से जोड़ा जा सकता है। महानदी बेसिन में पहले कुएं की खुदाई से मिली कामयाबी महानदी अपतटीय बेसिन के इस विशेष अभियान में ओएनजीसी द्वारा खोदा गया यह पहला अन्वेषण कुआं है। इस कुएं की ड्रिलिंग 1623 मीटर की लक्षित गहराई तक की गई, जहां 1441 से 1452 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस के भंडार की मौजूदगी दर्ज की गई। परीक्षण के दौरान पिछले तीन दिनों से कुएं से लगातार गैस का प्रवाह हो रहा है, और इसका प्रेशर तथा फ्लो दोनों ही तकनीकी रूप से काफी उत्साहजनक बने हुए हैं। हालांकि, इस पूरे भंडार की वास्तविक क्षमता का पता लगाने के लिए अभी आगे का विस्तृत मूल्यांकन और व्यावसायिक आकलन किया जाना बाकी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम 2025 से मिलेगा बढ़ावा ओडिशा के समुद्री तट से अपेक्षाकृत कम दूरी पर स्थित होने के कारण इस खोज का मुद्रीकरण तेजी से संभव हो सकता है, बशर्ते अंतिम व्यावसायिक समीक्षा इसे पूरी तरह व्यावहारिक ठहराए। इस तरह की परियोजनाओं को हाल ही में अधिसूचित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 का सीधा लाभ मिल सकता है। इन नियमों के तहत साझा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके गहरे समुद्री संसाधनों को तेजी से उत्पादन चरण में लाया जा सकता है, जिससे लागत और समय दोनों की बचत होती है। इस संबंध में अधिक जानकारी कंपनी ने X पर साझा की है। जुलाई में शुरू हुआ था ड्रिलिंग अभियान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जुलाई, 2026 को इस महत्वपूर्ण गहरे समुद्री कुएं की खुदाई की शुरुआत की थी। लगभग दो महीने के भीतर गैस का यह भंडार सामने आना ओएनजीसी के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सफलता घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को विस्तार देने के प्रयासों को भी नई मजबूती प्रदान करती है। इस समुद्री इलाके में पहले हुई दूसरी खोजों के साथ तालमेल बिठाकर और साझा सुविधाओं का निर्माण कर गहरे समुद्र में मौजूद इन गैस संसाधनों का दोहन जल्द शुरू करने का विकल्प उपलब्ध हो गया है। इसका आप पर असर ओडिशा के तट पर गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस मिलने से घरेलू ऊर्जा आपूर्ति और अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों को प्रत्यक्ष गति मिलेगी। • भारत में: घरेलू गैस उत्पादन क्षमता बढ़ने से देश की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी। यह दीर्घकालिक स्तर पर उद्योगों और शहरी गैस वितरण नेटवर्क के लिए आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा। • ओडिशा में: राज्य के अपतटीय क्षेत्र में नई खोज से तटीय लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह सुविधाओं और संबंधित समुद्री सेवाओं में निवेश के अवसर पैदा होंगे। परियोजना के व्यावसायिक उत्पादन चरण में पहुंचने पर स्थानीय स्तर पर तकनीकी और औद्योगिक रोजगार में वृद्धि देखने को मिल सकती है। • ऊर्जा उपभोक्ताओं के लिए: घरेलू स्रोतों से गैस की उपलब्धता बढ़ने से भविष्य में आपूर्ति के दबाव को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हालांकि उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पहुंचने में विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन और बुनियादी ढांचे के विकास का समय लगेगा। • निवेशकों के लिए: ओएनजीसी की अन्वेषण सफलता से सरकारी ऊर्जा कंपनियों के डीपवॉटर पोर्टफोलियो के प्रति बाजार का भरोसा मजबूत होगा। तेजी से मुद्रीकरण की योजनाएं कंपनी के मध्यम अवधि के वित्तीय प्रदर्शन को समर्थन प्रदान कर सकती हैं। ऐसा क्यों हुआ ओएनजीसी द्वारा गहरे समुद्री अन्वेषण को प्राथमिकता देने और नए नियामक सुधारों के लागू होने के कारण इस खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ। • सीधा कारण: 'समुद्र मंथन' अभियान के तहत 1623 मीटर की लक्षित गहराई तक कुएं की ड्रिलिंग की गई, जहां 1441 से 1452 मीटर के दायरे में हाइड्रोकार्बन युक्त संरचना सक्रिय पाई गई। कुएं से लगातार तीन दिनों तक मजबूत दबाव के साथ गैस का प्रवाह दर्ज किया गया है। • पृष्ठभूमि और तैयारी: केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा 25 जुलाई, 2026 को ड्रिलिंग शुरू कराए जाने के बाद तकनीकी टीमों ने नियोजित समयसीमा में काम पूरा किया। महानदी बेसिन के इस अपतटीय ब्लॉक में यह पहला परीक्षण कुआं था। • नियामक और नीतिगत सहयोग: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के तहत गहरे समुद्री क्षेत्रों में साझा अवसंरचना के उपयोग की अनुमति ने खोज और उसके बाद के विकास को व्यावहारिक बनाया है। इसी व्यवस्था के दम पर तट से केवल 43 किलोमीटर दूर स्थित इस ब्लॉक का तेजी से दोहन संभव माना जा रहा है। सवाल-जवाब 1. ओएनजीसी को यह गैस भंडार कहां मिला है? यह भंडार ओडिशा तट पर कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर गहरे समुद्र में महानदी बेसिन के कुएं 'MN-DW18-1-H-D' में मिला है। 2. यह खोज किस अभियान के तहत की गई है? यह खोज ओएनजीसी के गहरे समुद्री अन्वेषण अभियान 'समुद्र मंथन' के अंतर्गत की गई है। 3. कुएं की खुदाई कब शुरू हुई थी और गैस कब मिली? कुएं की खुदाई 25 जुलाई, 2026 को शुरू की गई थी और 18 सितंबर को 1441 से 1452 मीटर की गहराई पर गैस मिली। 4. कुएं में गैस का फ्लो कैसा बना हुआ है? ओएनजीसी के अनुसार कुएं से लगातार तीन दिनों से गैस निकल रही है और इसका फ्लो तथा प्रेशर उत्साहजनक स्तर पर है। 5. इस गैस भंडार के विकास में कौन से नियम मददगार होंगे? पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के तहत साझा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल कर इस खोज का तेजी से मुद्रीकरण किया जा सकेगा। https://trendkia.com/business/odisha-tata-ke-gahare-samudra-men-ongc-ko-mila-prakritika-gaisa-bhndara-tina-dinon-se-lagatara-jari-hai-achchha-dabava-36472 TrendKia — Har trend, sabse pehle.