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  "title": "ओडिशा तट के पास समुद्र मंथन मिशन का आगाज़, ओएनजीसी ने शुरू की गहरे पानी में गैस और तेल की तलाश",
  "summary": "सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज ऊर्जा कंपनी ओएनजीसी ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए महानदी ऑफशोर बेसिन में अपने पहले डीपवॉटर कुएं की खुदाई शुरू कर दी है।",
  "content": "भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने देश की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है। कंपनी ने ओडिशा के तटीय क्षेत्र के निकट महानदी ऑफशोर बेसिन में अपने पहले गहरे समुद्री खोजी कुएं की ड्रिलिंग प्रक्रिया का आगाज़ कर दिया है। इसे देश के गहरे और अत्यधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों में छिपे हाइड्रोकार्बन संसाधनों को निकालने के एक बहुत बड़े और महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान के रूप में देखा जा रहा है।\n\n \n\nसमुद्र मंथन मिशन के तहत ड्रिलिंग का आगाज\n ओएनजीसी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे अभियान को भारत सरकार की विशेष पहल 'समुद्र मंथन' मिशन के अंतर्गत अंजाम दिया जा रहा है। इस खोजी कुएं को MN-DW18-1-H-D नाम दिया गया है, जिसकी खुदाई का काम सफलतापूर्वक शुरू हो चुका है। भौगोलिक स्थिति की बात करें तो यह कुआं ओडिशा के तट पर स्थित कोणार्क खोज क्षेत्र से तकरीबन 23 समुद्री मील की दूरी पर मौजूद है। हाल के दिनों में उत्कल और कोणार्क क्षेत्रों में मिली सफलताओं ने महानदी अपतटीय बेसिन में हाइड्रोकार्बन के भंडार होने की उम्मीदों को काफी मजबूत किया है, और यह नया ड्रिलिंग अभियान इसी दिशा में उठाया गया अगला कदम है।\n\n \n\nराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और सरकारी नीतियां\n यह बड़ी परियोजना भारत के तटीय क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए स्रोतों की खोज को तेज करने के व्यापक प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान देश के अनछुए अपतटीय हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन पर विशेष बल दिया था। इस नीतिगत विज़न के बाद, सरकार ने खोज कार्यों के लिए लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल अपतटीय क्षेत्र के द्वार खोल दिए हैं। इस महत्वपूर्ण फैसले से मुक्त क्षेत्र लाइसेंस नीति यानी OALP के आगामी चरणों में नए ब्लॉक पेश करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।\n\n \n\nअपतटीय क्षेत्रों में विशाल तेल भंडार का अनुमान\n विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भारत के पूर्वी और पश्चिमी दोनों अपतटीय बेसिनों में 560 करोड़ टन तेल समतुल्य (MMTOE) से भी अधिक हाइड्रोकार्बन संसाधन दबे हुए हैं। कावेरी, महानदी और अंडमान बेसिन में हाल ही में सामने आईं नई खोजों ने समुद्री संसाधनों की क्षमता को लेकर उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। ओएनजीसी ने स्पष्ट किया है कि यह ड्रिलिंग भारत के अब तक के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण गहरे समुद्री खोज अभियानों में शामिल है। इस अभियान के तहत होने वाली हर खोज देश में ऊर्जा की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने, विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत के ऊर्जा संकल्प को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।\n\n इसके अतिरिक्त, ओएनजीसी ने हाल ही में लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्र में अपने दूसरे भू-तापीय (जियोथर्मल) कुएं की खुदाई का काम भी पूरा किया है, जो देश के सुदूर इलाकों में हरित ऊर्जा के विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों से लेकर बंगाल की खाड़ी के गहरे पानी तक फैले ओएनजीसी के ये विविध प्रयास देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को और मजबूत करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ने से आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में स्थिरता आ सकती है और आयात पर देश की निर्भरता कम होगी।\n• ओडिशा में: राज्य के अपतटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर चल रहे इस ऊर्जा अभियान से स्थानीय स्तर पर रोजगार, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ओएनजीसी ने महानदी बेसिन में किस अभियान की शुरुआत की है?\nओएनजीसी ने ओडिशा तट के पास महानदी अपतटीय बेसिन में अपने पहले गहरे समुद्री खोजी कुएं की खुदाई शुरू की है, जो भारत के डीपवॉटर हाइड्रोकार्बन दोहन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।\n\n2. खोजी कुएं का नाम क्या है और यह कहां स्थित है?\nइस खोजी कुएं का नाम MN-DW18-1-H-D है। यह ओडिशा तट से दूर कोणार्क खोज क्षेत्र से लगभग 23 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है।\n\n3. यह ड्रिलिंग किस सरकारी योजना या मिशन का हिस्सा है?\nयह ड्रिलिंग अभियान भारत सरकार के 'समुद्र मंथन' मिशन के तहत संचालित किया जा रहा है।\n\n4. भारत के अपतटीय बेसिनों में कितने तेल भंडार का अनुमान है?\nअनुमान के अनुसार, देश के पूर्वी और पश्चिमी अपतटीय बेसिनों में 560 करोड़ टन तेल समतुल्य (MMTOE) से अधिक हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हैं।\n\n5. ओएनजीसी ने हाल ही में लद्दाख में कौन सा काम पूरा किया है?\nओएनजीसी ने हाल ही में लद्दाख में अपने दूसरे भू-तापीय (जियोथर्मल) कुएं की ड्रिलिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-26",
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    "समुद्र मंथन मिशन",
    "गहरे समुद्र की ड्रिलिंग",
    "ऊर्जा सुरक्षा",
    "ओडिशा",
    "हाइड्रोकार्बन खोज"
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