पब्लिक इश्यू से पहले जियो का वित्तीय रिपोर्ट कार्ड सामने आया, 76,000 करोड़ रुपये पर पहुंचा कंपनी का एबिटा जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ की तैयारियों के बीच अपने वित्तीय आंकड़े और विस्तार रणनीति साझा की है। कंपनी का एबिटा 76,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, वहीं तीन वर्षों में इसकी विकास दर 17.8 फीसदी रही है। भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में किफायती दरों पर इंटरनेट डेटा और व्यापक नेटवर्क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आईपीओ से पहले वित्तीय और तकनीकी उपलब्धियों का ब्योरा सामने रखा है। कंपनी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत के आम नागरिकों तक उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल नेटवर्क की पहुंच सुनिश्चित करना संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इसी रणनीति के दम पर कंपनी का एबिटा (EBITDA) 76,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। तीन वर्षों में वित्तीय मजबूती और वैश्विक नेटवर्क की स्थिति प्रस्तावित पब्लिक इश्यू को लेकर आयोजित आधिकारिक परिचर्चा में मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कंपनी ने 17.8 प्रतिशत की एबिटा वृद्धि दर दर्ज की है। इस आर्थिक मजबूती का मुख्य श्रेय देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल डेटा उपयोग और तकनीकी विस्तार को दिया गया है। वैश्विक संदर्भ की बात करें तो चीन की सीमाओं के बाहर सबसे बड़ा 5G उपभोक्ता आधार इसी भारतीय नेटवर्क के पास है। लगभग तीन वर्ष पूर्व कंपनी ने पूरे देश में अपने 5G बुनियादी ढांचे और सेवाओं के तेज विस्तार की प्रक्रिया शुरू की थी। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 जैसे राष्ट्रीय अभियानों के साथ कदम मिलाते हुए नेटवर्क को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। कंपनी का प्रबंधन इन लक्ष्यों को पूरा करने में एक सक्रिय तकनीकी साझीदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा में हिस्सेदारी कंपनी के आंतरिक तकनीकी सामर्थ्य पर चर्चा करते हुए आकाश अंबानी ने स्पष्ट किया कि अब तक 7,220 से अधिक पेटेंट दाखिल किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ पेटेंट आवेदन के मामले में शीर्ष 20 वैश्विक निगमों की सूची में जगह बनाने वाली यह इकलौती भारतीय कंपनी बन गई है। संस्थान के अनुसंधान और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 12,000 से अधिक पेशेवर इंजीनियर तकनीकी नवाचार पर लगातार कार्य कर रहे हैं। इन बौद्धिक संपत्तियों का बड़ा हिस्सा स्थानीय नेटवर्क उपकरणों और सॉफ्टवेयर के विकास से जुड़ा हुआ है। रिकॉर्ड समय में कवरेज और 31.4 करोड़ ग्राहकों की संभावनाएं बुनियादी ढांचे की मजबूती का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वाणिज्यिक शुरुआत के बाद केवल 19 महीनों के भीतर देश की 99 प्रतिशत आबादी तक नेटवर्क सेवाएं पहुंचा दी गई थीं। आने वाले पांच वर्षों के विकास परिदृश्य को रेखांकित करते हुए कंपनी ने 31.4 करोड़ नए मोबाइल ग्राहकों को जोड़ने के स्पष्ट व्यावसायिक अवसरों की पहचान की है। इस संभावित विस्तार में दो प्रमुख वर्ग शामिल हैं। • लगभग 10 करोड़ ऐसे नागरिक जो पहली बार मोबाइल सिम कार्ड खरीदकर डिजिटल दुनिया में प्रवेश करेंगे। • करीब 24 करोड़ मौजूदा उपभोक्ता जो वर्तमान में 2G नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं और निकट भविष्य में 4G अथवा 5G नेटवर्क पर स्थानांतरित हो सकते हैं। मुंबई के एक अनुभव से कैसे शुरू हुआ डिजिटल क्रांति का सफर कार्यक्रम के दौरान ईशा अंबानी ने कंपनी की वैचारिक शुरुआत से जुड़ी एक व्यक्तिगत घटना का उल्लेख किया। उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2009-10 के दौरान जब वह और आकाश अमेरिका के कॉलेज में अध्ययनरत थे, तब छुट्टियों के समय मुंबई लौटे थे। उस दौरान उन्हें एक ऑनलाइन कॉलेज असाइनमेंट इंटरनेट के माध्यम से जमा करना था, लेकिन कनेक्टिविटी में आई तकनीकी दिक्कतों के कारण वे उसे समय पर जमा नहीं कर पाए। इस व्यवधान ने दोनों के मन में यह सवाल खड़ा किया कि पश्चिमी देशों में मिलने वाली निर्बाध और तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी की सुविधा भारत में आम जनता को क्यों नहीं मिल सकती। आकाश अंबानी का स्पष्ट दृष्टिकोण था कि इस कमी को दूर करने के लिए केवल एक साधारण दूरसंचार सेवा प्रदाता बनने के बजाय एक संपूर्ण डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी खड़ी करनी होगी। इसी विचार और ठोस योजना के फलस्वरूप वर्ष 2016 में विधिवत सेवाओं की शुरुआत हुई। दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन और पूंजी पुनर्निवेश मॉडल रिलायंस समूह के समग्र व्यापारिक दर्शन को रेखांकित करते हुए ईशा अंबानी ने कहा कि कंपनी का ढांचा कुछ वर्षों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। वित्तीय रणनीति के तहत दो प्रमुख प्राथमिकताओं का पालन किया जाता है: पहली प्राथमिकता एक मजबूत और स्थिर बैलेंस शीट बनाए रखना है, जबकि दूसरी प्राथमिकता लगातार नकदी प्रवाह उत्पन्न करना है। इस अनुशासित मॉडल के तहत पहले पूंजी निवेश किया जाता है, उसके बाद संचालन का विस्तार होता है, फिर उत्पन्न होने वाले लाभ और नकदी को पुनः नए कारोबार व तकनीकी विस्तार में निवेश कर दिया जाता है। आगामी आईपीओ के मद्देनजर यह व्यावसायिक मॉडल निवेशकों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक माना जा रहा है। इसका आप पर असर जियो के आगामी आईपीओ और विशाल नेटवर्क विस्तार से मोबाइल उपभोक्ताओं और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए नए विकल्प खुलेंगे। • भारत में: दूरसंचार क्षेत्र में नेटवर्क अपग्रेड होने से 2G इस्तेमाल करने वाले करोड़ों नागरिकों को 4G और 5G में बदलाव का अवसर मिलेगा। इससे डिजिटल बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक और बेहतर होगी। • शेयर बाजार निवेशकों के लिए: 76,000 करोड़ रुपये के मजबूत एबिटा और 17.8 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ आने वाला यह संभावित पब्लिक इश्यू संस्थागत व खुदरा निवेशकों को सीधे हिस्सेदारी का अवसर देगा। निवेशक कंपनी के नकदी प्रवाह और बैलेंस शीट के प्रदर्शन के आधार पर अपने पोर्टफोलियो की योजना बना सकते हैं। • तकनीकी रोजगार के लिए: 12,000 से अधिक आंतरिक इंजीनियरों की मौजूदगी और 7,220 से अधिक पेटेंट घरेलू तकनीकी कौशल के विस्तार का संकेत देते हैं। इससे भारतीय सॉफ्टवेयर और टेलीकॉम रिसर्च क्षेत्र में स्थानीय प्रतिभाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे। • मोबाइल ग्राहकों के लिए: देश के 99 प्रतिशत हिस्से में फैले नेटवर्क पर भविष्य में 31.4 करोड़ नए ग्राहक जुड़ने की संभावना से कनेक्टिविटी की गुणवत्ता में सुधार होगा। प्रतिस्पर्धा बने रहने से उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर हाई-स्पीड डेटा सेवाएं मिलती रहेंगी। ऐसा क्यों हुआ जियो द्वारा अपने वित्तीय और नेटवर्क आंकड़े सार्वजनिक करने की सीधी वजह प्रस्तावित आईपीओ की आधिकारिक तैयारियां हैं। प्रबंधन ने कंपनी की शुरुआत से लेकर वर्तमान मुनाफे तक की पूरी यात्रा का खुलासा किया है ताकि निवेशक इसकी वित्तीय सेहत को समझ सकें। • आईपीओ की तैयारी: कंपनी पूंजी बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए अपनी परिचालन क्षमता और लाभप्रदता का प्रदर्शन कर रही है। सार्वजनिक निर्गम से पहले निवेशकों के सामने वित्तीय मजबूती प्रमाणित करना आवश्यक कदम होता है। • डेटा उपयोग में निरंतर उछाल: भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती खपत ने कंपनी को पिछले तीन वर्षों में 17.8 प्रतिशत की एबिटा वृद्धि हासिल करने में सहायता की है। • 5G नेटवर्क में शुरुआती निवेश: करीब तीन साल पहले देशव्यापी स्तर पर 5G रोलआउट शुरू करने से कंपनी चीन के बाहर सबसे बड़ा यूजर बेस तैयार करने में सफल रही। इस व्यापक बुनियादी ढांचे ने ग्राहकों को नेटवर्क से जोड़े रखा। • बुनियादी तकनीक का स्थानीय विकास: 12,000 से अधिक इंजीनियरों और 7,220 से ज्यादा पेटेंट के जरिए कंपनी ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाई है। इससे परिचालन लागत नियंत्रित रही और मार्जिन मजबूत बने रहे। सवाल-जवाब 1. जियो का वर्तमान एबिटा कितना है? कंपनी का एबिटा बढ़कर 76,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। 2. पिछले तीन वर्षों में कंपनी की वित्तीय वृद्धि दर क्या रही है? जियो ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 17.8 प्रतिशत की एबिटा वृद्धि दर्ज की है। 3. कंपनी के पास तकनीकी क्षेत्र में कितने पेटेंट दर्ज हैं? कंपनी ने 7,220 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं और वह पेटेंट दाखिल करने वाली वैश्विक शीर्ष 20 कंपनियों में एकमात्र भारतीय कंपनी है। 4. जियो में कितने इंजीनियर तकनीकी विकास पर काम कर रहे हैं? कंपनी के 12,000 से अधिक पेशेवर इंजीनियर तकनीकी क्षेत्र और नवाचार पर कार्य कर रहे हैं। 5. आगामी पांच वर्षों में कंपनी के पास कितने नए ग्राहक जोड़ने का अवसर है? कंपनी के अनुसार अगले पांच वर्षों में 31.4 करोड़ नए ग्राहक जुड़ सकते हैं, जिनमें 10 करोड़ पहली बार सिम लेने वाले और 24 करोड़ 2G से अपग्रेड होने वाले उपभोक्ता हैं। 6. जियो की शुरुआत का विचार किस घटना से आया था? वर्ष 2009-10 में मुंबई प्रवास के दौरान खराब इंटरनेट के कारण ईशा अंबानी द्वारा कॉलेज असाइनमेंट जमा न कर पाने की घटना के बाद यह विचार उपजा था। 7. जियो ने कितने समय में भारत की 99 प्रतिशत आबादी तक कवरेज पहुंचाई थी? कंपनी ने अपनी वाणिज्यिक शुरुआत के महज 19 महीनों के भीतर देश की 99 प्रतिशत आबादी तक नेटवर्क सेवाएं पहुंचा दी थीं। https://trendkia.com/business/pablika-ishyu-se-pahale-jio-ka-vittiya-riporta-karda-samane-aya-76-000-karora-rupaye-para-pahuncha-knpani-ka-ebitda-47969 TrendKia — Har trend, sabse pehle.