पब्लिक प्रोविडेंट फंड से तय करें सुरक्षित कल, टैक्स छूट और सरकारी गारंटी के बड़े फायदे लंबे समय की सुरक्षित बचत और टैक्स लाभ के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक मजबूत विकल्प है, जिसमें सरकारी सुरक्षा के साथ तीनों चरणों पर कर छूट मिलती है। बढ़ती महंगाई के बीच हर कमाने वाला व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई को ऐसे माध्यम में लगाना चाहता है जहां पूंजी पूरी तरह सुरक्षित रहे और आगे चलकर एक मजबूत फंड भी तैयार हो सके। नौकरीपेशा कर्मचारियों के साथ ही कारोबारियों, कंसल्टेंट और स्वरोजगार करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए भी रिटायरमेंट और भविष्य की जरूरतें पूरी करने के लिए लंबी अवधि की जमा पूंजी बेहद जरूरी हो जाती है। ऐसी वित्तीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ निवेशकों के लिए एक अत्यंत विश्वसनीय साधन बनकर सामने आता है। केंद्र सरकार की सुरक्षा और ब्याज का बड़ा सहारा अर्थशास्त्री आकाश जिंदल पीपीएफ को बचत के लिहाज से एक गोल्ड स्कीम का दर्जा देते हैं। इस योजना का सबसे प्रमुख आधार इसमें मिलने वाली सरकारी सुरक्षा है, क्योंकि यह केंद्र सरकार की छोटी बचत योजनाओं के दायरे में संचालित होती है। सरकार द्वारा संचालित होने के कारण इसमें लगाई गई जमा पूंजी पर किसी तरह का वित्तीय जोखिम नहीं रहता है। इसके साथ ही नियमित रूप से मिलने वाला ब्याज और लंबी अवधि में मिलने वाले अन्य लाभ इसे बचत का एक टिकाऊ और उपयोगी जरिया साबित करते हैं। तीनों स्तरों पर टैक्स छूट की अनूठी सुविधा पीपीएफ की सबसे आकर्षक विशेषताओं में इसका कर ढांचा शामिल है, जो निवेशकों को व्यापक वित्तीय बचत प्रदान करता है। पुरानी कर व्यवस्था के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80C का उपयोग करते हुए निवेशक एक वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक की राशि पर पात्र टैक्स कटौती हासिल कर सकते हैं। हालांकि, नई कर व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं के लिए आमतौर पर यह कटौती उपलब्ध नहीं रहती है। इसके अलावा योजना के तहत जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर मुक्त रहता है। पंद्रह वर्षों के बाद परिपक्वता पर मिलने वाली कुल अंतिम रकम पर भी कोई कर नहीं लगता है। इस तरह निवेश करने, उस पर ब्याज अर्जित करने और अंत में मैच्योरिटी राशि निकालने के तीनों स्तरों पर निवेशक को टैक्स से राहत मिलती है, जिसे वित्तीय भाषा में ईईई यानी एक्जम्प्ट-एक्जम्प्ट-एक्जम्प्ट श्रेणी कहा जाता है। 15 साल की अवधि और लिक्विडिटी का सही संतुलन पीपीएफ खाते की सामान्य परिपक्वता अवधि 15 साल तय की गई है, इसलिए इसमें धन लगाते समय अपनी भविष्य की नकदी आवश्यकताओं का सही अनुमान लगाना आवश्यक है। अर्थशास्त्री आकाश जिंदल के अनुसार, निवेशकों को यह भली-भांति समझना होगा कि पीपीएफ में लिक्विडिटी यानी आपात स्थिति में तत्काल पैसा निकालने की आजादी सीमित रहती है। परिपक्वता से पहले आंशिक निकासी की अनुमति केवल कुछ निश्चित नियमों और शर्तों के तहत ही दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति को आने वाले कुछ वर्षों में नकदी की आवश्यकता पड़ने की संभावना हो, तो उसे अपनी पूरी बचत पीपीएफ में लगाने से बचना चाहिए। किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय संकट से निपटने के लिए अलग से एक आपातकालीन फंड तैयार रखना सबसे समझदारी भरा निर्णय माना जाता है। कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के लिए मजबूत जरिया अक्सर देखा जाता है कि केवल औपचारिक क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों को ही उनके संस्थान की ओर से प्रोविडेंट फंड की सुविधा मिलती है। ऐसे में जो लोग व्यापार करते हैं, स्वतंत्र कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं या अपना स्वयं का कोई काम चलाते हैं, उनके पास संगठित पेंशन या पीएफ का विकल्प नहीं होता। अर्थशास्त्री आकाश जिंदल का मानना है कि ऐसे सभी लोगों के लिए पीपीएफ अपने भविष्य को संवारने और नियमित रूप से बचत जोड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है। इसका आप पर असर यह योजना निवेशकों को सुरक्षित पूंजी और टैक्स मुक्त रिटर्न प्रदान करके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है। • करदाताओं के लिए: पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80C के तहत हर वित्त वर्ष 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है। निवेशक अपनी कर देनदारी घटाने के लिए समय पर इस सीमा का पूरा उपयोग कर सकते हैं। • सुरक्षा चाहने वालों के लिए: जमा राशि पूरी तरह केंद्र सरकार की देखरेख में सुरक्षित रहती है। बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर निवेशक बिना किसी जोखिम के स्थिर पूंजी बना सकते हैं। • नकदी प्रबंधन के लिए: खाते की परिपक्वता अवधि 15 साल की होती है और समय से पूर्व निकासी सीमित है। आपातकालीन खर्चों के लिए अलग फंड रखना जरूरी है ताकि बीच में पैसे की कमी न पड़े। • स्वरोजगार करने वालों के लिए: बिना ईपीएफ वाले कारोबारी और प्रोफेशनल्स इसमें नियमित पैसा जमा कर सकते हैं। वे रिटायरमेंट के लिए एक अनुशासित और बड़ा फंड खुद तैयार कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ महंगाई और बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशक सुरक्षित और निश्चित रिटर्न देने वाले विकल्पों की तलाश करते हैं। लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा और टैक्स बचत की दोहरी जरूरत के चलते यह योजना हमेशा प्रासंगिक बनी रहती है। • पूंजी सुरक्षा की प्राथमिकता: निवेशक जोखिम भरे साधनों से बचकर सरकारी गारंटी वाले माध्यमों में पैसा लगाना चाहते हैं। केंद्र सरकार की छोटी बचत योजना होने से इसमें चूक का कोई जोखिम नहीं रहता। • टैक्स दक्षता की मांग: वेतनभोगी और कारोबारी दोनों ही वर्ग अपनी कर देनदारी कम करने के कानूनी रास्ते तलाशते हैं। ईईई श्रेणी में होने के कारण निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी तीनों पर छूट इसे बेहद आकर्षक बनाती है। • अनौपचारिक क्षेत्र की जरूरतें: संगठित क्षेत्र से बाहर काम करने वाले स्वतंत्र प्रोफेशनल्स के पास अनिवार्य भविष्य निधि नहीं होती। ऐसे लोगों को रिटायरमेंट की तैयारी के लिए एक अनुशासित सरकारी ढांचे की आवश्यकता होती है। सवाल-जवाब 1. पीपीएफ में निवेश करने पर टैक्स में कितनी छूट मिल सकती है? पुरानी कर व्यवस्था के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80C में एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती का लाभ लिया जा सकता है। 2. क्या नई टैक्स व्यवस्था में पीपीएफ निवेश पर टैक्स छूट मिलती है? नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को आम तौर पर धारा 80C के तहत मिलने वाली यह कटौती उपलब्ध नहीं होती है। 3. पीपीएफ को ईईई श्रेणी में क्यों गिना जाता है? इसमें जमा की जाने वाली रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और 15 साल बाद मिलने वाली मैच्योरिटी राशि तीनों पूरी तरह कर मुक्त होती हैं। 4. पीपीएफ खाते की मैच्योरिटी अवधि कितनी होती है? पीपीएफ खाते की सामान्य परिपक्वता अवधि 15 साल तय की गई है। 5. क्या पीपीएफ से आपात स्थिति में तुरंत पूरा पैसा निकाला जा सकता है? नहीं, इसमें लिक्विडिटी सीमित होती है और समय से पहले निकासी केवल निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत ही संभव है। 6. क्या कारोबारी और कंसल्टेंट भी पीपीएफ में खाता खोल सकते हैं? हां, जिन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स को नौकरी में प्रोविडेंट फंड की सुविधा नहीं मिलती, उनके लिए यह लंबी अवधि की बचत का बेहतरीन विकल्प है। https://trendkia.com/business/pablika-providenta-phnda-se-taya-karen-surakshita-kala-taiksa-chhuta-aura-sarakari-garnti-ke-bare-phayade-54757 TrendKia — Har trend, sabse pehle.