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  "title": "पहले ही दिन 1347 करोड़ का सामान ब्रिटेन रवाना, भारत-ब्रिटेन के बीच नया व्यापार समझौता आज से लागू",
  "summary": "भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से प्रभावी हो गया है और लागू होने के पहले ही दिन भारत ने 14 करोड़ डॉलर यानी 1347.55 करोड़ रुपये का सामान ब्रिटेन भेज दिया.",
  "content": "भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ व्यापार समझौता 15 जुलाई यानी आज से अमल में आ गया है. दोनों देशों के बीच हुआ यह कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) आपसी कारोबार को नई रफ्तार देने की उम्मीद के साथ शुरू हुआ है, जिसका सबसे बड़ा मकसद वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के स्तर तक ले जाना है. इस समझौते पर नजर रखने वालों के मन में सबसे पहला सवाल यही था कि आखिर पहले ही दिन भारत ने ब्रिटेन को कितने का सामान भेजा. अब इसके शुरुआती आंकड़े साफ हो गए हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक समझौता लागू होने के पहले दिन ही भारत से ब्रिटेन के लिए 14 करोड़ डॉलर यानी करीब 1347.55 करोड़ रुपये का सामान रवाना किया गया.\n\nपहले ही दिन का उत्साह आंकड़ों में भी दिखा. देशभर के 20 से ज्यादा बंदरगाहों, हवाई अड्डों, इनलैंड कंटेनर डिपो, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों से 50 से अधिक कंसाइनमेंट ब्रिटेन के लिए भेजी गईं, जिनका कुल मूल्य 14 करोड़ डॉलर से ऊपर रहा. इन खेपों में इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रत्न एवं आभूषण समेत कई तरह के उत्पाद शामिल रहे. यह सामान मुंद्रा, न्हावा शेवा और चेन्नई बंदरगाहों के जरिए और साथ ही मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद के एयर कार्गो केंद्रों से रवाना हुआ.\n\nकिन क्षेत्रों को होगा सबसे बड़ा फायदा\nइस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटेन में ड्यूटी फ्री एंट्री मिल जाएगी. यानी अब ये उत्पाद वहां बिना आयात शुल्क के पहुंच सकेंगे. इसका सीधा लाभ चमड़ा, फुटवियर, टेक्सटाइल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल मशीनरी, प्लास्टिक, बेस मेटल, समुद्री उत्पाद और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को मिलेगा. अब तक ब्रिटेन में इन उत्पादों पर 2 फीसदी से लेकर 16 फीसदी तक आयात शुल्क चुकाना पड़ता था. यह शुल्क खत्म होने से भारतीय सामान वहां के बाजार में सस्ता पड़ेगा और दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाएगा.\n\n2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य\nसरकार इस समझौते के जरिए वर्ष 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहती है. ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन का कहना है कि लंबी अवधि में इस समझौते से दोनों देशों के बीच हर साल 25 अरब पाउंड से ज्यादा अतिरिक्त व्यापार जुड़ सकता है. इतना ही नहीं, इससे भारत और ब्रिटेन दोनों की अर्थव्यवस्था में हर साल करीब 5 अरब पाउंड का अतिरिक्त योगदान जुड़ने का अनुमान भी लगाया जा रहा है.\n\nसरकारी खरीद का बाजार भी खुला\nइस समझौते की एक और खास बात सरकारी खरीद यानी गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट को लेकर किया गया प्रावधान है. इसके तहत भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के करीब 90 अरब पाउंड के सरकारी खरीद बाजार तक कानूनी पहुंच मिल जाएगी. दूसरी तरफ भारत ने अपने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के हितों को बचाने के लिए कई शर्तें भी तय की हैं. सरकार ने साफ किया है कि भारतीय एमएसएमई को अब तक जो प्राथमिकता मिलती रही है, उस पर इस समझौते का कोई असर नहीं पड़ेगा. ब्रिटिश कंपनियां भारत में सिर्फ चुनिंदा केंद्रीय सरकारी संस्थानों की निविदाओं में ही हिस्सा ले सकेंगी. इसके अलावा 5.5 करोड़ रुपये से कम के सरकारी खरीद अनुबंध और 60 करोड़ रुपये से कम के निर्माण कार्यों में उन्हें प्रवेश नहीं मिलेगा.\n\nपेटेंट और कार्बन टैक्स पर सतर्क रुख\nसमझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार यानी आईपीआर को लेकर भी प्रावधान रखे गए हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हित में अनिवार्य लाइसेंस जारी करने का जो अधिकार भारत के पास पहले था, वह आगे भी बना रहेगा. वहीं ब्रिटेन की प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी कार्बन टैक्स को लेकर अभी दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है. यह व्यवस्था वर्ष 2027 से लागू हो सकती है और इसका असर भारत के लौह एवं इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक और सीमेंट निर्यात पर पड़ सकता है. भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अगर भविष्य में इस कार्बन टैक्स से भारतीय निर्यात प्रभावित होता है, तो वह समझौते के तहत दी गई कुछ रियायतों की दोबारा समीक्षा करने का अधिकार अपने पास रखेगा.\n\nउद्योगों तक पहुंचेगा फायदा\nवाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि वाणिज्य विभाग निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ मिलकर देशभर के औद्योगिक क्लस्टरों तक इस समझौते के फायदे पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियां इसका लाभ उठा सकें. समझौता लागू होने के पहले ही दिन 14 करोड़ डॉलर का निर्यात इस बात का संकेत है कि भारतीय उद्योग इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में इस समझौते का असर भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार तीनों पर साफ दिखाई देगा.\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: चमड़ा, फुटवियर, टेक्सटाइल, समुद्री उत्पाद और जेम्स एंड ज्वेलरी बनाने वाले कारोबारियों और उनमें काम करने वाले लोगों के लिए ब्रिटेन का बाजार सस्ता और खुला होने से ऑर्डर और रोजगार बढ़ने की उम्मीद है.\n• निर्यातकों के लिए: करीब 99 फीसदी भारतीय उत्पादों पर ब्रिटेन में 2 से 16 फीसदी तक का आयात शुल्क खत्म होने से आपका सामान वहां ज्यादा प्रतिस्पर्धी होगा, जिससे मुनाफा बढ़ सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौता कब लागू हुआ?\nयह समझौता 15 जुलाई से लागू हुआ है. इसे कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) कहा जाता है.\n\n2. पहले ही दिन भारत ने ब्रिटेन को कितने का सामान भेजा?\nपहले दिन भारत ने ब्रिटेन को 14 करोड़ डॉलर यानी करीब 1347.55 करोड़ रुपये का सामान भेजा.\n\n3. पहले दिन कौन-कौन से उत्पाद भेजे गए?\nपहले दिन भेजी गई खेपों में इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रत्न एवं आभूषण समेत कई उत्पाद शामिल थे.\n\n4. इस समझौते से किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?\nचमड़ा, फुटवियर, टेक्सटाइल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल मशीनरी, प्लास्टिक, बेस मेटल, समुद्री उत्पाद और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा.\n\n5. भारत के कितने फीसदी निर्यात को ब्रिटेन में ड्यूटी फ्री एंट्री मिलेगी?\nसमझौते के तहत भारत के करीब 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटेन में ड्यूटी फ्री एंट्री मिलेगी. पहले इन पर 2 से 16 फीसदी तक शुल्क लगता था.\n\n6. इस समझौते का बड़ा लक्ष्य क्या है?\nसरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है.\n\n7. सरकारी खरीद को लेकर भारतीय कंपनियों को क्या मिलेगा?\nभारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के करीब 90 अरब पाउंड के सरकारी खरीद बाजार तक कानूनी पहुंच मिलेगी.\n\n8. कार्बन टैक्स को लेकर भारत का रुख क्या है?\nब्रिटेन की प्रस्तावित कार्बन टैक्स व्यवस्था 2027 से लागू हो सकती है. भारत ने कहा है कि अगर इससे उसके निर्यात पर असर पड़ा तो वह कुछ रियायतों की समीक्षा का अधिकार रखेगा.",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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    "भारत ब्रिटेन व्यापार समझौता",
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