# ब्याज और हथियारों पर फंसा पाकिस्तान का बजट, विकास कार्यों के लिए बची बेहद कम रकम

> पाकिस्तान ने वित्तवर्ष 2026-27 का बजट पेश किया है, जिसमें कुल 18.77 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये में से 8 लाख करोड़ से ज्यादा केवल ब्याज चुकाने और 3 लाख करोड़ से अधिक रक्षा पर खर्च हो रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/pakistan-economy-karja-ke-jvalamukhi-para-baitha-hai-pakistan-sirpha-byaja-chukane-men-jate-hain-8-lakha-karora-rupaye-48247 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाकिस्तान बजट, पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था, कर्ज का बोझ, रक्षा बजट, राजकोषीय घाटा

पाकिस्तान ने वित्तवर्ष 2026-27 के लिए अपना नया बजट पेश कर दिया है, जिसके आंकड़े पड़ोसी देश की चरमराती आर्थिक स्थिति की पोल खोल रहे हैं। कुल 18.77 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये के इस बजट में से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि केवल पिछले कर्ज का ब्याज चुकाने में निकल जाएगी। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ इन्हीं दो मदों में समा जाता है और देश के अन्य जरूरी कामों तथा विकास कार्यों के लिए 7 लाख करोड़ रुपये से भी कम की राशि बचती है।

## विकास कार्यों की अनदेखी और रक्षा बजट में बढ़ोतरी
पाकिस्तान में वित्तवर्ष की शुरुआत जुलाई से होती है और यह जून तक चलता है। चालू वित्तवर्ष के इस बजट से ठीक पहले जारी किए गए इकनॉमिक सर्वे में देश की विकास दर करीब 4 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 3.7 फीसदी के आसपास था। मौजूदा बजट ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और टैरिफ की वजह से वैश्विक कारोबार पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की ओर से भी देश पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध और शर्तें लगाई गई हैं। बजट के आंकड़ों पर गौर करें तो साफ पता चलता है कि विकास कार्य हमेशा से पाकिस्तान की प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे रहे हैं। यही वजह है कि सरकार ने इस साल भी विकास कार्यों के वास्ते महज 1 लाख करोड़ रुपये ही आवंटित किए हैं। बढ़ती महंगाई के बीच सरकार ने विकास खर्च में कटौती की है, जबकि इसके उलट रक्षा बजट को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर कर दिया गया है। कुल बजट अनुमान में रक्षा की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी बैठती है, और यदि इसमें 82.2 हजार करोड़ रुपये की पेंशन राशि भी मिला दी जाए तो यह कुल रक्षा खर्च बढ़कर 3.82 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच जाता है।

## केंद्र के बजट का बड़ा हिस्सा हथियारों पर खर्च
देश की आर्थिक बदहाली का आलम यह है कि आम नागरिकों के लिए राशन की उपलब्धता भले ही अनिश्चित हो, लेकिन सैन्य साजो-सामान और हथियारों के लिए धन की कोई कमी नहीं छोड़ी जाती है। पाकिस्तान के कुल बजट में राज्यों की हिस्सेदारी करीब 8.84 लाख करोड़ रुपये है। जब इस राशि को अलग कर दिया जाता है, तो केंद्र सरकार के पास केवल 11.75 लाख करोड़ रुपये का ही शुद्ध बजट बचता है। इस हिसाब से देखा जाए तो रक्षा बजट केंद्र के अपने बजट का लगभग 32.71 फीसदी हिस्सा बन जाता है। भारत के साथ ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान लगातार दो रक्षा बजट पेश कर चुका है और दोनों ही बार उसने रक्षा खर्च में क्रमशः 18.52 फीसदी और 16.2 फीसदी की बढ़ोतरी की है। अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि संघीय सरकार का कुल राजस्व लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 8 लाख करोड़ रुपये कर्ज का ब्याज चुकाने में और 3.83 लाख करोड़ रुपये रक्षा बजट में चले जाते हैं। नतीजतन, सरकार को अपनी प्रशासनिक और विकास संबंधी जरूरतों के लिए राज्यों के राजस्व पर निर्भर रहना पड़ता है। यह चिंताजनक स्थिति गरीबी रेखा की तरफ धकेले जा रही आम जनता के लिए आने वाले समय में और अधिक संकट पैदा कर सकती है।

## ऋण पर निर्भर सरकार और राजकोषीय घाटा
पाकिस्तान के लिए कर्ज के जाल से निकल पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि संघीय सरकार के पास अपने नियमित खर्च चलाने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए उसे बार-बार नया कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो आगामी बजट में देश को और भी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा जिससे पूरा आर्थिक गणित बिगड़ जाएगा। वर्तमान में संघीय सरकार अपने राजकोषीय घाटे के आंकड़ों को कम करके दिखाने के लिए राज्यों पर सरप्लस रेवेन्यू बनाने का दबाव डालती है। चालू वर्ष के बजट में भी पाकिस्तान के राज्यों द्वारा 1.79 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस रेवेन्यू दिखाने का अनुमान लगाया गया है, जबकि इसके विपरीत संघीय सरकार को 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इन दोनों आंकड़ों का समायोजन करने पर पाकिस्तान का कुल राजकोषीय घाटा 5.22 लाख करोड़ रुपये बैठता है, जो देश की कुल GDP का करीब 3.6 फीसदी है।

## पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए सहायता राशि में इजाफा
एक तरफ जहां सरकार ने देश के सामान्य विकास कार्यों के वास्ते मिलने वाले धन में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं की है, वहीं दूसरी तरफ पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए मिलने वाली सहायता राशि में इजाफा किया गया है। पाकिस्तान ने पीओके के लिए आवंटन को 4.3 फीसदी बढ़ाकर 14.60 हजार करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि पिछले वित्तवर्ष में यह आंकड़ा 14 हजार करोड़ रुपये था। इसी प्रकार से गिलगित-बाल्टिस्तान को इस बार 8,800 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जो पिछले साल के 8 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पीओके की आबादी करीब 32 लाख है, जबकि गिलगित और बाल्टिस्तान की कुल जनसंख्या लगभग 10 लाख के आसपास है।

## इसका आप पर असर
पाकिस्तान के इस नए बजट का असर वहां की आम जनता पर महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी के रूप में सीधे तौर पर पड़ेगा।

- **महंगाई का बोझ:** **सरकार द्वारा विकास कार्यों और सार्वजनिक खर्चों में कटौती किए जाने से रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं।** इससे आम नागरिकों की जेब पर आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ जाएगा।
- **सार्वजनिक सेवाएं:** **बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज और रक्षा में जाने से स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए कम धन उपलब्ध होगा।** इसके चलते आम जनता को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है।
- **बेरोजगारी और रोजगार:** **विकास परियोजनाओं पर कम खर्च होने से देश में नए रोजगार के अवसर सीमित हो जाएंगे।** इससे युवाओं के लिए नौकरी पाना और अधिक कठिन हो जाएगा।
- **करों में वृद्धि:** **राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए सरकार आने वाले समय में जनता पर नए और कड़े कर थोप सकती है।** इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति में भारी कमी आएगी।
- **आर्थिक असुरक्षा:** **देश के गहरे कर्ज के जाल में फंसे होने के कारण मुद्रा का मूल्य प्रभावित हो सकता है।** इससे आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम जीवन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पाकिस्तान की यह बदहाल आर्थिक स्थिति दशकों से चले आ रहे भारी कर्ज, लचर राजस्व संग्रह और रक्षा पर अत्यधिक खर्च का परिणाम है। देश अपनी प्रशासनिक और विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए ऋण लेने को मजबूर है।

- **कर्ज का जाल:** **पूर्व के ऋणों का भारी-भरकम ब्याज चुकाने के लिए सरकार को हर साल अपनी कुल कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा अलग रखना पड़ता है।** इस वजह से विकास कार्यों के लिए बहुत कम धनराशि बच पाती है।
- **राजस्व की कमी:** **संघीय सरकार का अपना राजस्व बेहद सीमित है और वह अपने खर्चे चलाने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं है।** इस वित्तीय असंतुलन के कारण देश को बार-बार नए कर्जों का सहारा लेना पड़ता है।
- **सैन्य प्राथमिकताएं:** **बजट का एक तिहाई हिस्सा सीधे तौर पर रक्षा और हथियारों के रखरखाव पर खर्च किया जाता है।** रणनीतिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय तनावों के चलते इस मद में कटौती करना सरकार के लिए मुश्किल साबित होता है।
- **आईएमएफ के प्रतिबंध:** **अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की कड़ी शर्तों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण देश की वित्तीय नीतियां काफी हद तक बंधक बन गई हैं।** इससे सरकार के पास आर्थिक सुधारों के लिए बहुत सीमित गुंजाइश बचती है।

## सवाल-जवाब

### 1. पाकिस्तान के वित्तवर्ष 2026-27 के बजट का कुल आकार कितना है?
पाकिस्तान का कुल बजट 18.77 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये का है।

### 2. बजट का कितना हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रहा है?
बजट में से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है।

### 3. चालू वित्तवर्ष के लिए देश की अनुमानित विकास दर कितनी है?
इकनॉमिक सर्वे के अनुसार चालू वित्तवर्ष के लिए विकास दर का अनुमान लगभग 4 फीसदी रखा गया है।

### 4. पाकिस्तान ने रक्षा क्षेत्र के लिए कुल कितना आवंटन किया है?
रक्षा क्षेत्र के लिए 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का आवंटन किया गया है, और पेंशन जोड़ने पर यह 3.82 लाख करोड़ रुपये हो जाता है।

### 5. पाकिस्तान का कुल राजकोषीय घाटा कितना अनुमानित है?
राज्यों और संघीय सरकार के आंकड़ों को समायोजित करने के बाद कुल राजकोषीय घाटा 5.22 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 3.6 फीसदी है।

### 6. पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए सहायता राशि कितनी बढ़ाई गई है?
पीओके के लिए आवंटन 4.3 फीसदी बढ़ाकर 14.60 हजार करोड़ रुपये और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए 8,800 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

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