# पलामू के इस किसान ने चार एकड़ में तैयार किया अनूठा कृषि मॉडल, सागवान और मौसमी से होगी बंपर कमाई

> पलामू के बसना गांव के सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ खेत में सागवान, मौसमी और सब्जियों की व्यावसायिक खेती का एक अनूठा मॉडल तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में लाखों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/palamu-ke-isa-kisana-ne-chara-ekara-men-taiyara-kiya-anutha-krishi-modala-teak-aura-mosambi-se-hogi-bnpara-kamai-21003 · **Language:** Hindi
**Tags:** पलामू कृषि, व्यासायिक खेती, सागवान की खेती, मौसमी की बागवानी, झारखंड किसान, सतीश दुबे

पारंपरिक खेती से हटकर अब किसान अपनी जमीन को कमाई का बेहतरीन जरिया बनाने में जुटे हैं। पलामू जिले के बसना गांव के रहने वाले सतीश दुबे ने अपने चार एकड़ खेत को एक आधुनिक व्यावसायिक कृषि मॉडल के रूप में ढालना शुरू कर दिया है। उनके इस अनूठे खेत में सागवान, फलदार पौधे और सब्जियों की खेती को एक साथ इंटीग्रेटेड तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि सालभर अलग-अलग माध्यमों से मुनाफा मिलता रहे।

## बाउंड्री पर सागवान और बीच में मौसमी का बाग
सतीश दुबे ने अपनी चार एकड़ जमीन की सुरक्षा और भविष्य के बड़े मुनाफे को ध्यान में रखते हुए खेत की मेड़ या बाउंड्री के चारों तरफ दो कतारों में सागवान के पौधे रोपे हैं। इन पौधों के बीच लगभग 10 फीट की पर्याप्त दूरी रखी गई है। खास बात यह है कि ये सभी सागवान के पौधे आधुनिक टिशू कल्चर तकनीक का उपयोग करके तैयार किए गए हैं, जिन्हें वह विशेष रूप से नागपुर की एक टिशू कल्चर नर्सरी से मंगवाकर लाए हैं। इस सागवान की खेती को भविष्य के एक मजबूत वित्तीय निवेश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार, इन पेड़ों को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 15 से 20 साल का समय लग सकता है, जिसके बाद बाजार में इनकी बहुत ऊंची कीमत मिलने की पूरी संभावना है।

## कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर चुनी मौसमी की नटाल किस्म
खेत के अंदरूनी हिस्से में सतीश दुबे ने करीब 800 मौसमी के पौधे लगाए हैं। स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों से विस्तृत चर्चा और सलाह लेने के बाद उन्होंने यह पाया कि पलामू की आबोहवा और जलवायु इस फल की बागवानी के लिए बेहद अनुकूल है। उन्होंने अपनी इस बागवानी के लिए मौसमी की 'नटाल' किस्म को चुना है, जिसे खेती के लिहाज से एक खास और बेहतर प्रभेद माना जाता है। मौसमी के इस सफल प्रयोग के बाद उनकी योजना भविष्य में नींबू का एक और नया बाग विकसित करने की भी है, जिससे उनकी कृषि विविधता और बढ़ सके।

## लागत, मुनाफा और भविष्य की बड़ी योजनाएं
इस पूरे चार एकड़ के मॉडल को स्थापित करने में अब तक लगभग तीन से चार लाख रुपये की कुल लागत आ चुकी है। इसके अलावा, हर साल पौधों की समय पर सिंचाई, सुरक्षा, खाद और खेत के रखरखाव पर कुछ खर्च लगातार होता रहेगा। सतीश दुबे का अनुमान है कि जब पेड़ों से उत्पादन पूरी तरह शुरू हो जाएगा, तो अकेले एक एकड़ मौसमी की फसल से करीब तीन लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल सकता है। इस प्रकार, चारों एकड़ से केवल मौसमी के जरिए ही 12 से 15 लाख रुपये तक का कारोबार होने की पूरी उम्मीद है। इसके अलावा खेत की मेड़ पर खड़े सागवान, नींबू और अन्य मौसमी सब्जियों से होने वाली आय बिल्कुल अतिरिक्त होगी।

## बचपन के शौक को बनाया आधुनिक कारोबार
खेती के प्रति उनका यह झुकाव कोई नया नहीं है, बल्कि बचपन से ही उन्हें पेड़-पौधों और हरियाली से गहरा लगाव रहा है। अपने इसी पुराने शौक को अब उन्होंने एक सफल व्यावसायिक रूप दे दिया है। उनका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा एकीकृत कृषि मॉडल तैयार करना है जहाँ एक ही जमीन के टुकड़े से कई अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त हो सके और आने वाले समय में इसे एक बड़े और सफल कृषि व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सके।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** देश भर के किसानों के लिए यह मॉडल पारंपरिक खेती के बजाय एकीकृत और व्यावसायिक फसलों की तरफ रुख करने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

**पलामू में:** पलामू क्षेत्र के किसानों को शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु में भी बागवानी और बागची तकनीक अपनाकर अपनी आय कई गुना बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. सतीश दुबे का खेत किस जिले में स्थित है?
सतीश दुबे का चार एकड़ का खेत झारखंड के पलामू जिले के बसना गांव में स्थित है।

### 2. खेत की बाउंड्री पर कौन से पौधे लगाए गए हैं?
खेत की बाउंड्री के चारों तरफ दो कतारों में सागवान के पौधे लगाए गए हैं, जिनके बीच 10 फीट की दूरी है।

### 3. सागवान के पौधे कहां से लाए गए हैं?
सागवान के ये पौधे टिशू कल्चर तकनीक से तैयार किए गए हैं जिन्हें नागपुर की नर्सरी से लाया गया है।

### 4. खेत के अंदर कौन से फल के पौधे लगाए गए हैं?
खेत के अंदर लगभग 800 मौसमी के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें नटाल किस्म का चयन किया गया है।

### 5. इस पूरे कृषि मॉडल को तैयार करने में कितनी लागत आई है?
इस पूरे मॉडल को तैयार करने में अब तक लगभग तीन से चार लाख रुपये की लागत आई है।

## प्रेरणा और सबक
**सतीश दुबे के इस कृषि मॉडल से सीखें ये 4 महत्वपूर्ण बातें:**

- **दीर्घकालिक सोच:** खेत की मेड़ पर सागवान जैसे पौधे लगाकर भविष्य के लिए एक सुरक्षित वित्तीय संपत्ति तैयार की जा सकती है।
- **वैज्ञानिक सलाह का महत्व:** अपनी मिट्टी और जलवायु के अनुकूल सही फसल (जैसे मौसमी की नटाल किस्म) चुनने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।
- **विविधीकरण अपनाएं:** एक ही खेत में फल, लकड़ी और सब्जियों को एक साथ उगाकर जोखिम को कम किया जा सकता है और आमदनी के कई स्रोत बनाए जा सकते हैं।
- **पैकेजिंग और तकनीक:** टिशू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके बेहतर और स्वस्थ पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

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