# पलामू में खरीफ की तैयारी तेज, एलनीनो की आशंका के बीच किसानों से धान के साथ अरहर और मोटे अनाज उगाने की अपील

> पलामू कृषि विभाग ने खरीफ 2026-27 के लिए किसानों को सिर्फ धान पर निर्भर रहने के बजाय अरहर, मक्का और रागी जैसी कम पानी वाली फसलों की ओर मुड़ने की सलाह दी है, क्योंकि एलनीनो से बारिश प्रभावित हो सकती है।

**Category:** व्यापार · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/palamu-men-kharipha-ki-taiyari-teja-elanino-ki-ashnka-ke-bicha-kisanon-se-dhana--523

पलामू जिले में खरीफ मौसम 2026-27 की तैयारियां अब रफ्तार पकड़ चुकी हैं, लेकिन इस बार कृषि विभाग का जोर केवल समय पर बीज और खाद पहुंचाने तक सीमित नहीं है। मौसम को लेकर बनी अनिश्चितता ने विभाग को किसानों के सामने एक बड़ा सवाल रखने पर मजबूर कर दिया है — क्या इस साल पूरी खेती सिर्फ धान के भरोसे छोड़ देना समझदारी होगी? विभाग का जवाब है, नहीं।

## एलनीनो की आशंका ने बदली सलाह की दिशा
जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार के मुताबिक इस बार संभावित एलनीनो प्रभाव सबसे बड़ी चिंता है। उनका कहना है कि इसके चलते वर्षा की स्थिति गड़बड़ा सकती है, और जब पानी का भरोसा ही न हो तो अकेले धान पर टिके रहना किसानों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। यही वजह है कि विभाग ने फसल चयन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

## कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता
दीपक कुमार ने किसानों को अरहर, मक्का और रागी जैसी फसलें बढ़ाने की सलाह दी है, जो कम पानी में भी बेहतर पैदावार देती हैं। उनका तर्क सीधा है — बदलते मौसम के दौर में अगर एक फसल मार खा जाए तो दूसरी सहारा बन जाती है। इसी कारण विभाग फसल विविधीकरण को नुकसान से बचने का सबसे भरोसेमंद रास्ता मानता है, और धान के बजाय अरहर तथा मोटे अनाजों को इस साल खास तवज्जो दी जा रही है।

## 1.37 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
इस खरीफ सीजन में जिले को कुल 1 लाख 37 हजार 270 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती कराने का लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कृषि विभाग सभी प्रखंडों में तैयारियों की समीक्षा कर रहा है, ताकि किसी भी किसान को बीज, खाद या तकनीकी मदद के लिए इंतजार न करना पड़े। विभागीय अधिकारियों को साफ निर्देश हैं कि बीज वितरण और उर्वरक आपूर्ति पर लगातार नजर रखी जाए।

## बीज की उपलब्धता बनी चुनौती
हालांकि तैयारियों के बीच एक बड़ी अड़चन बीज की कमी है। दीपक कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार से जिले के वास्ते 18 हजार 658 क्विंटल धान बीज मांगा गया था, मगर अब तक सिर्फ 3 हजार 270 क्विंटल ही मिल पाया है। जो बीज आया है, उसे जिले के सभी प्रखंडों में भेज दिया गया है ताकि किसानों तक समय रहते पहुंच सके।

दलहन को बढ़ावा देने की कोशिश पर भी यही असर दिखा है। जिले ने 809 क्विंटल अरहर बीज की मांग रखी थी, लेकिन आवंटन अब तक करीब 150 क्विंटल पर ही अटका है। बाकी बीज जुटाने के लिए कृषि विभाग राज्य स्तर पर लगातार पैरवी कर रहा है।

## केसीसी शिविर और गांव-गांव तकनीकी मदद
खेती की तैयारी के साथ-साथ विभाग किसानों की आर्थिक मजबूती पर भी काम कर रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, और बैंक तथा कृषि विभाग मिलकर ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना से जोड़ने में जुटे हैं। इसके अलावा कृषि कर्मी गांव-गांव पहुंचकर किसानों को मौसम के अनुसार खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle._