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  "type": "article",
  "title": "पांच साल में ₹100 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले चार गुना बढ़े, सरकार ने संसद में दी जानकारी",
  "summary": "संसद में दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सालाना ₹100 करोड़ से अधिक की आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में 142 से बढ़कर 576 हो गई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून में ‘अरबपति’ शब्द की कोई परिभाषा नहीं है और 2016 से वेल्थ टैक्स कानून समाप्त होने के कारण कुल संपत्ति का अलग से डेटा नहीं रखा जाता है।",
  "content": "देश में अत्यधिक उच्च आय वाले लोगों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान काफी इजाफा देखने को मिला है। सरकार की ओर से संसद में साझा किए गए ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि सालाना ₹100 करोड़ या उससे ज्यादा की सकल आय बताने वाले करदाताओं की संख्या पांच साल के भीतर चार गुना से भी अधिक हो गई है। वित्त वर्ष 2021-22 में इस श्रेणी में सिर्फ 142 लोग आते थे, जो अब बढ़कर 576 तक पहुंच गए हैं। इस तेज बढ़ोतरी ने देश में मलाईदार आय वाले वर्ग के विस्तार को रेखांकित किया है।\n\nसंसद में वित्त राज्य मंत्री का लिखित जवाब\nलोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर के माध्यम से ये आंकड़े सदन के पटल पर रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े उन व्यक्तियों से जुड़े हैं जिन्होंने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में न्यूनतम ₹100 करोड़ की ग्रॉस टोटल इनकम दिखाई है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि आयकर कानूनों के तहत ‘अरबपति’ जैसी किसी शब्दावली की कोई कानूनी परिभाषा तय नहीं है, इसलिए इन लोगों को आधिकारिक तौर पर इस श्रेणी में नहीं रखा जाता है।\n\nसाल-दर-साल कैसे बढ़ी सुपर-रिच करदाताओं की संख्या\nअसेसमेंट ईयर वार आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में ₹100 करोड़ से अधिक कमाने वाले 142 करदाता दर्ज किए गए थे। इसके तुरंत बाद 2022-23 में यह संख्या उछलकर 301 पर पहुंच गई। हालांकि 2023-24 के दौरान इसमें मामूली गिरावट आई और यह 284 पर सिमट गई, लेकिन इसके बाद रफ्तार फिर तेज हो गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऐसे करदाताओं का आंकड़ा 415 दर्ज हुआ और 2025-26 आते-आते यह बढ़कर 576 के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इस तरह महज पांच साल के अंतराल में इस वर्ग की संख्या में चार गुना से ज्यादा की छलांग आई है।\n\nसंपत्ति और आय के आंकड़ों में अंतर\nसरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ये तमाम आंकड़े किसी व्यक्ति की कुल संपत्ति यानी नेट वर्थ को नहीं दर्शाते हैं। ये केवल उस सालाना सकल आय के आंकड़े हैं जिसे करदाताओं ने अपने रिटर्न में खुद घोषित किया है। यानी यह पूरी तरह से कमाई या आय का पैमाना है, न कि कुल संचित संपत्ति का।\n\nकानून में ‘अरबपति’ शब्द की स्थिति\nसंसद में जब यह सवाल उठा कि क्या देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है, तो सरकार ने साफ किया कि आयकर अधिनियम 2025 और पुराने आयकर अधिनियम 1961, दोनों में ही ‘अरबपति’ शब्द के लिए कोई कानूनी परिभाषा मौजूद नहीं है। इसी वजह से सरकार किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर किसी विशेष श्रेणी में अलग से दर्ज नहीं करती है, बल्कि उसका पूरा ध्यान केवल टैक्स रिटर्न में घोषित आय के रिकॉर्ड को सहेजने पर रहता है।\n\nवेल्थ टैक्स कानून हटने से संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं\nआम तौर पर लोगों के जेहन में यह सवाल जरूर आता है कि सरकार देश के सबसे अमीर तबके की कुल संपत्ति का सटीक हिसाब-किताब क्यों नहीं रखती है। इसका जवाब देते हुए संसद में बताया गया कि वेल्थ टैक्स एक्ट 1957 को 1 अप्रैल 2016 से पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था। इस एक्ट के खत्म होने के बाद से ही टैक्सपेयर्स की कुल संपत्ति का कोई अलग से रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था नहीं बची है।\n\nअर्थव्यवस्था और उपभोग से जुड़े अन्य आंकड़े\nसरकार ने केवल हाई इनकम टैक्सपेयर्स की बढ़ती संख्या का जिक्र नहीं किया, बल्कि देश के आर्थिक समावेशन और खपत से जुड़े दूसरे सकारात्मक संकेतकों का भी हवाला दिया। हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में गिनी गुणांक में कमी दर्ज की गई है। सरल शब्दों में इसका अर्थ यह है कि समाज में आय की असमानता कुछ हद तक कम हुई है और ग्रामीण तथा शहरी इलाकों के बीच का आर्थिक अंतर भी सिकुड़ा है।\n\nबेरोजगारी दर और गरीबी के मोर्चे पर बात करते हुए सरकार ने बताया कि 15 साल या उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से सुधरकर 2025 में 3.1% पर आ गई है। इसके अलावा, नीति आयोग के आंकड़ों के हवाले से यह भी कहा गया है कि पिछले एक दशक के भीतर बहुआयामी गरीबी के स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। सरकार का यह मानना है कि प्रगतिशील आयकर व्यवस्था, रोजगार के नए अवसर पैदा करने वाली योजनाएं, स्टार्टअप्स को मिलने वाला प्रोत्साहन और स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास तथा सामाजिक सुरक्षा पर लगातार बढ़ रहा खर्च देश में आर्थिक समावेशन को मजबूती दे रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: देश में उच्च आय वाले करदाताओं की संख्या में हुई इस तेज वृद्धि से पता चलता है कि शीर्ष स्तर पर कमाई तेजी से बढ़ी है, जबकि सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आर्थिक अंतर कम होने के दावे भी सामने आए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पिछले 5 साल में ₹100 करोड़ से ज्यादा कमाने वाले लोगों की संख्या कितनी हो गई है?\nवित्त वर्ष 2025-26 में ₹100 करोड़ से अधिक की आय घोषित करने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 576 हो गई है।\n\n2. 2021-22 में ₹100 करोड़ से ज्यादा आय वाले कितने लोग थे?\nवर्ष 2021-22 में ऐसे करदाताओं की संख्या सिर्फ 142 थी।\n\n3. क्या सरकार के पास देश के अमीरों की कुल संपत्ति का रिकॉर्ड होता है?\nनहीं, 1 अप्रैल 2016 से वेल्थ टैक्स एक्ट 1957 को खत्म किए जाने के बाद से सरकार कुल संपत्ति का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखती है।\n\n4. क्या आयकर कानून में 'अरबपति' शब्द की कोई परिभाषा है?\nसरकार के मुताबिक, आयकर अधिनियम में 'अरबपति' शब्द की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है।\n\n5. किस मंत्री ने संसद में यह जानकारी दी?\nयह जानकारी लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में दी।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-27",
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