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  "type": "article",
  "title": "बिहार के रोहतास में बनता है खास पनीर खुरमा, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक है डिमांड",
  "summary": "बिहार के रोहतास जिले के बैरी गांव में तैयार होने वाले पनीर खुरमे की मांग अब झारखंड और छत्तीसगढ़ तक फैल चुकी है। हलवाई विकास कुमार साह अपनी छोटी दुकान पर इस मिठाई को पूरी शुद्धता के साथ बनाते हैं।",
  "content": "बिहार के रोहतास जिले में स्थित बैरी गांव की एक छोटी मिठाई की दुकान इन दिनों अपने खास खुरमे की वजह से काफी चर्चा में बनी हुई है। इस दुकान के खुरमे का स्वाद और शुद्धता ऐसी है कि इसके चाहने वाले न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि दूसरे राज्यों तक फैले हुए हैं। इस मिठाई की ख्याति अब रोहतास की सीमाओं को पार कर झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई बड़े इलाकों तक पहुंच चुकी है। इस मुकाम को हासिल करने वाले हलवाई विकास कुमार साह हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और गुणवत्ता से समझौता न करने की नीति के दम पर यह मुकाम पाया है। उनके द्वारा बनाए जाने वाले इस खुरमे की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा स्वाद और इसे तैयार करने में बरती जाने वाली पूरी साफ-सफाई है। यही कारण है कि आज स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि दूर-दराज के शहरों से आने वाले ग्राहक भी इस पारंपरिक मिठाई को खरीदने के लिए खींचे चले आते हैं।\n\nस्वाद और गुणवत्ता से बनती है पहचान\nविकास कुमार साह का कहना है कि उनकी दुकान भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन वहां बनने वाली मिठाई का स्तर किसी भी बड़े होटल या प्रतिष्ठान से कम नहीं है। उनका दृढ़ विश्वास है कि किसी भी खाद्य उत्पाद की असली पहचान उसकी भव्य सजावट या बड़े आकार से नहीं बल्कि उसके असली स्वाद और शुद्धता से तय होती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए वे खुरमा बनाने के दौरान उपयोग होने वाली हर एक सामग्री पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं। उनके लिए ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाली और बेहतरीन मिठाई परोसना सबसे ऊपर है, जिससे खाने वाले का दिल खुश हो जाए।\n\nघर पर तैयार होता है शुद्ध पनीर\nइस खुरमे की सबसे बड़ी खूबी इसके बनाने के तरीके और इसमें पड़ने वाली सामग्री में छिपी हुई है। विकास बताते हैं कि वे अपनी दुकान पर किसी भी तरह के पाउडर वाले दूध का इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचते हैं। इसके बजाय वे आसपास के गांवों से बिल्कुल ताजा देसी दूध मंगवाते हैं। बाजार से पहले से तैयार पनीर खरीदने की बजाय वे खुद अपनी देखरेख में दूध से पनीर तैयार करते हैं। उनका मानना है कि बाजार में मिलने वाले पनीर की शुद्धता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए वे किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए खुद ही सामग्री तैयार करना बेहतर समझते हैं। इससे उन्हें हर उत्पाद की गुणवत्ता पर पूरा नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।\n\nसामग्री की उच्च गुणवत्ता पर जोर\nविकास का स्पष्ट मानना है कि केवल खाना बनाने का हुनर होना ही किसी कारीगर को सफल नहीं बना सकता, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री का उत्तम होना भी उतना ही आवश्यक है। इसी वजह से वे खुरमा बनाने की पूरी प्रक्रिया के दौरान शुद्धता को सबसे पहली प्राथमिकता देते हैं। जब अच्छी और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो उसका सीधा असर मिठाई के स्वाद पर साफ दिखाई देता है। ग्राहकों को भाने वाला यही खास स्वाद अब धीरे-धीरे उनकी दुकान की एक अलग और मजबूत पहचान बन चुका है।\n\nरोहतास से निकलकर दूसरे राज्यों तक पहुंच\nबैरी गांव की इस छोटी सी दुकान का दायरा अब केवल आसपास के गांवों तक सीमित नहीं रह गया है। विकास के हाथों बने खुरमे की मांग अब रोहतास जिले के अलावा पड़ोसी राज्यों झारखंड और छत्तीसगढ़ के बाजारों तक पहुंच रही है। खासतौर पर झारखंड के बोकारो, धनबाद और रांची जैसे प्रमुख शहरों में उनके खुरमे की मांग लगातार बनी रहती है। एक छोटे से कस्बे में एक साधारण दुकान से शुरू हुआ यह कारोबार अब दूसरे राज्यों के ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना चुका है, जो इसके विस्तार की कहानी खुद बयां करता है।\n\nबिक्री और किफायती कीमत\nविकास की दुकान से हर दिन औसतन 15 से 20 किलो खुरमे की बिक्री आसानी से हो जाती है। इसके अलावा हर महीने एक तय मात्रा में खुरमा दूसरे स्थानों पर भी पार्सल के जरिए भेजा जाता है। लगातार मिल रहे आर्डरों से उन्हें अपना कारोबार और अधिक फैलाने की प्रेरणा मिल रही है। ग्राहकों के भरोसे और स्नेह ने ही इस छोटी सी दुकान को एक नई पहचान दिलाई है। अगर बात कीमत की की जाए तो विकास अपने इस खास खुरमे को 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं। उनका कहना है कि इस किफायती दाम पर शुद्ध और बेहतरीन गुणवत्ता वाली मिठाई बेचने के बावजूद उन्हें इस काम में अच्छा मुनाफा मिल जाता है। वे ग्राहकों को उचित मूल्य पर सामान देने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर उन लोगों के लिए खास है जो खान-पान के शौकीन हैं और शुद्धता को प्राथमिकता देते हैं।\n\n• बिहार में: स्थानीय ग्राहकों को रोहतास के बैरी गांव में 300 रुपये प्रति किलो की किफायती दर पर उच्च गुणवत्ता वाला पनीर खुरमा आसानी से मिल रहा है।\n• अन्य राज्यों में: झारखंड के बोकारो, धनबाद, रांची और छत्तीसगढ़ के ग्राहकों को अब इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद अपने नजदीकी माध्यमों से मिल रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह सफलता पारंपरिक तरीकों और गुणवत्ता के प्रति निष्ठा का परिणाम है।\n\n• शुद्ध सामग्री का उपयोग: पाउडर दूध के बजाय स्थानीय स्तर पर खरीदे गए ताजे दूध से खुद पनीर तैयार करने से स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है।\n• बढ़ती मांग का कारण: ग्राहकों का भरोसा और उचित मूल्य पर प्रीमियम गुणवत्ता मिलने के कारण इस मिठाई की लोकप्रियता दूसरे राज्यों तक पहुंची है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह प्रसिद्ध पनीर खुरमा किस जगह बनता है?\nयह पनीर खुरमा बिहार के रोहतास जिले के बैरी गांव में तैयार किया जाता है।\n\n2. इस खुरमे को तैयार करने वाले हलवाई का नाम क्या है?\nइस खुरमे को विकास कुमार साह द्वारा तैयार किया जाता है।\n\n3. इस मिठाई की मांग किन अन्य राज्यों तक पहुंच चुकी है?\nइस खुरमे की मांग झारखंड और छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुकी है, जिसमें बोकारो, धनबाद और रांची प्रमुख हैं।\n\n4. इस खुरमे की बाजार में कीमत कितनी है?\nविकास कुमार साह अपने खुरमे को 300 रुपये प्रति किलो की दर से बेचते हैं।\n\n5. इस दुकान पर रोजाना कितना खुरमा बिकता है?\nइस दुकान से प्रतिदिन लगभग 15 से 20 किलो खुरमे की बिक्री होती है।\n\nप्रेरणा और सबक\nयह कहानी छोटे स्तर के काम को बड़े मुकाम पर ले जाने की प्रेरणा देती है।\n\n• गुणवत्ता से समझौता न करें: अपनी कला और सामग्री की शुद्धता पर ध्यान देकर छोटे व्यवसाय को भी ब्रांड बनाया जा सकता है।\n• स्थानीय संसाधनों का उपयोग: बाहर से सामग्री मंगाने के बजाय खुद ताजे और शुद्ध संसाधनों को तैयार करने से उत्पाद की गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है।\n• ग्राहकों का भरोसा जीतें: उचित कीमत और बेहतरीन स्वाद के जरिए ग्राहकों का दीर्घकालिक विश्वास हासिल किया जा सकता है।\n• कड़ी मेहनत जरूरी: सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार प्रयास करने से व्यापार की पहुंच दूसरे राज्यों तक बढ़ सकती है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/paneer-khurma-from-rohtas-becomes-a-sensation-across-jharkhand-and-chhattisgarh-48623",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-17",
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    "पनीर खुरमा",
    "विकास कुमार साह",
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