परीक्षा में सख्ती न घटे, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से अपील उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट देश की वित्तीय व्यवस्था में भरोसे के रक्षक हैं और उनकी परीक्षा के मानक कभी कमजोर नहीं होने चाहिए। देश की वित्तीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बनाए रखना चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यह बात उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने राजधानी में आयोजित 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के कार्यक्रम में कही। उन्होंने साफ कहा कि इस पेशे के मानक किसी भी हालत में नीचे नहीं गिरने चाहिए, क्योंकि नैतिकता के बिना आर्थिक तरक्की का कोई मोल नहीं रह जाता। राधाकृष्णन ने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) से अपील की कि वह अपनी परीक्षाओं को सख्त बनाए रखे। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अपने काम के जरिए पूरी वित्तीय व्यवस्था की रक्षा करते हैं। इस मौके पर उन्होंने आईसीएआई के मूल्यों, यानी ईमानदारी, उत्कृष्टता, जवाबदेही और राष्ट्र की सेवा का भी जिक्र किया। आईसीएआई के पांच लाख से ज्यादा सदस्य हैं और यही संस्थान योग्यता परीक्षाएं आयोजित करता है। भरोसे के रक्षक राधाकृष्णन ने कहा, "चार्टर्ड अकाउंटेंट वित्तीय व्यवस्था में भरोसे के संरक्षक हैं।" उन्होंने इस भरोसे को पेशे में दाखिले की कठिन शर्तों से जोड़ा। उनके मुताबिक चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षा के ऊंचे मानकों की वजह से ही इसमें पास होने वालों की दर सबसे कम रहती है, और यही सख्ती इसकी ताकत है। उन्होंने दोहराया कि इन मानकों को किसी भी सूरत में कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। ईमानदार कारोबार को सुरक्षा उपराष्ट्रपति ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का साथ देने को कहा। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से काम करने वाले कारोबारियों को अनैतिक व्यवहार से बचाना जरूरी है। कारोबार को आसान बनाने की कोशिश कानून के दायरे में ही रहनी चाहिए, और इस संतुलन को बनाए रखने की अहम जिम्मेदारी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर है। राधाकृष्णन ने खर्च घटाने के नाम पर गुणवत्ता से समझौता करने के खिलाफ भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता की कीमत पर पैसे बचाना बेहद नुकसानदेह साबित होगा। उन्होंने गुणवत्ता से जुड़े फैसलों को वित्त में नैतिक आचरण से जोड़ा और कहा कि नैतिकता के बिना विकास किसी काम का नहीं। उन्होंने नैतिकता को पेशेवर काम का केंद्र बताया। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पर जोर उन्होंने कहा कि आईसीएआई की जिला स्तर की इकाइयों को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल के तहत उत्पादों की व्यावहारिक जानकारी जुटानी चाहिए। इससे सदस्य उत्पादकों का मार्गदर्शन कर सकेंगे और उत्पादक गुणवत्ता से समझौता किए बिना अपनी लागत घटा पाएंगे। उनके मुताबिक इस तरह का काम प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को ताकत देगा। राधाकृष्णन ने लागत को लेकर पेशेवरों के बीच बेहतर तालमेल की भी बात की। उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट को मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि इस साझेदारी से संस्थाओं को अपनी लागत घटाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस तरीके को कानूनी अमल और गुणवत्ता की सुरक्षा से जोड़ते हुए एक बार फिर पेशेवर मानकों को मजबूत बनाए रखने की जरूरत दोहराई। इसका आप पर असर • छात्रों के लिए: सीए बनने की परीक्षा आगे भी सख्त बनी रहेगी, इसलिए तैयारी में कोई ढील देना महंगा पड़ेगा। • कारोबारियों के लिए: ओडीओपी पहल के तहत सीए मार्गदर्शन देने पर छोटे उत्पादक गुणवत्ता बनाए रखते हुए लागत घटा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने यह बात कहां कही? उन्होंने राजधानी में आयोजित 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस के कार्यक्रम में यह बात कही। 2. उन्होंने आईसीएआई से क्या अपील की? उन्होंने अपील की कि आईसीएआई अपनी परीक्षाओं को सख्त बनाए रखे और मानकों को कमजोर न होने दे। 3. आईसीएआई के कितने सदस्य हैं? आईसीएआई के पांच लाख से ज्यादा सदस्य हैं और यही संस्थान योग्यता परीक्षाएं आयोजित करता है। 4. आईसीएआई के मूल्य क्या बताए गए? ईमानदारी, उत्कृष्टता, जवाबदेही और राष्ट्र की सेवा को आईसीएआई के मूल्यों के रूप में बताया गया। 5. ओडीओपी को लेकर उन्होंने क्या कहा? उन्होंने कहा कि जिला स्तर की इकाइयां वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पहल के तहत व्यावहारिक जानकारी जुटाएं ताकि उत्पादक गुणवत्ता बनाए रखते हुए लागत घटा सकें। 6. उन्होंने गुणवत्ता को लेकर क्या चेतावनी दी? उन्होंने कहा कि खर्च घटाने के लिए गुणवत्ता से समझौता करना बेहद नुकसानदेह होगा और नैतिकता के बिना विकास बेकार है। https://trendkia.com/business/pariksha-men-sakhti-na-ghate-uparashtrapati-radhakrishnan-ki-chartarda-akauntentsa-se-apila-3877 TrendKia — Har trend, sabse pehle.