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  "type": "article",
  "title": "पशुपालक भाई बारिश के मौसम में ऐसे बचाएं भेड़-बकरियों की ऊन और बाल, अपनाएं ये जरूरी उपाय",
  "summary": "मानसून के दौरान नमी, कीचड़ और परजीवियों के कारण भेड़-बकरियों के बाल और ऊन खराब होने का खतरा रहता है। किसानों को अच्छी आमदनी के लिए इस मौसम में बाड़े की साफ-सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।",
  "content": "बरसात का महीना भेड़-बकरियों की देखभाल करने वालों के सामने कई तरह की परेशानियां लेकर आता है। इस अवधि में वातावरण में नमी, हर तरफ कीचड़, गंदगी और विभिन्न प्रकार के परजीवियों के पनपने से पशुओं के बाल और ऊन की सेहत बिगड़ने लगती है। जब ऊन के अंदर नमी काफी समय तक बनी रहती है, तो वह आपस में उलझ जाती है, उसका रंग पीला पड़ने लगता है और उसकी ओवरऑल क्वालिटी गिर जाती है। इन सब कमियों का सीधा असर किसानों और पशुपालकों को बाजार में मिलने वाले मुनाफे पर पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि मानसून के दिनों में पशुओं की विशेष रूप से सुरक्षा और देखभाल की जाए।\n\nबाड़े को सूखा और साफ रखना है बेहद जरूरी\nभेड़ के शरीर की ऊन बिल्कुल स्पंज की तरह काम करती है जो आसानी से पानी और नमी को अपने अंदर सोख लेती है। यदि मवेशी किसी गीले या कीचड़ से भरे हुए बाड़े के अंदर बैठते हैं, तो उनकी ऊन में फंगस लगने की आशंका काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस वजह से ऊन पीली पड़कर पूरी तरह खराब हो सकती है। यही कारण है कि पशुओं के रहने वाले शेड का फर्श हमेशा सूखा रखा जाना चाहिए। यदि संभव हो सके तो बाड़े के अंदर लकड़ी या बांस की मचान तैयार करें, ताकि गोबर और पेशाब आसानी से नीचे की तरफ गिर जाए और पशु हमेशा एक सूखी जगह पर आराम कर सकें।\n\nसमय पर ऊन की कटाई और स्वच्छता का ध्यान\nबहुत अधिक घनी ऊन के अंदर बारिश का पानी लंबे समय तक फंसा रह जाता है। इस स्थिति के कारण पशुओं में निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी और त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा यह सलाह दी जाती है कि बारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही ऊन की कटाई करवा लेनी चाहिए। अगर किसी कारणवश पूरे शरीर की ऊन एक साथ काटना संभव न हो, तो कम से कम पेट के निचले हिस्से की, पूंछ की और पिछले अंगों की ऊन जरूर काट दें। ऐसा करने से वहां कीचड़ और गोबर के चिपकने की समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाती है.\n\nपरजीवियों से बचाव और खानपान पर नियंत्रण\nबरसात के इन दिनों में जूं और किलनी जैसी समस्याओं में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इन छोटे जीवों के कारण मवेशियों के शरीर में भयंकर खुजली होती है और वे राहत पाने के लिए दीवारों या पेड़ों से अपना शरीर रगड़ने लगते हैं, जिससे उनके बाल और ऊन टूटने लगते हैं। जैसे ही हल्की धूप निकले, किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह लेकर परजीवी नियंत्रण वाली दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा, बारिश के मौसम में उगने वाले नए हरे चारे में पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है। इसे बहुत अधिक मात्रा में खिलाने से पशुओं को दस्त की शिकायत हो सकती है और पिछला हिस्सा गंदा होने से ऊन खराब हो जाती है। इसलिए हरे चारे के साथ हमेशा सूखा भूसा मिलाकर देना चाहिए, साथ ही संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर का इस्तेमाल करना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nबारिश के मौसम में पशुओं की सही देखभाल न होने से ऊन की गुणवत्ता गिरती है, जिसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ता है।\n\n• भारत में: सभी पशुपालक किसानों को अपनी भेड़ और बकरियों के बाड़े को पूरी तरह सूखा रखना चाहिए ताकि फंगस और बीमारियों से बचा जा सके।\n• ग्रामीण क्षेत्रों में: मानसून शुरू होने से पहले पशुओं की ऊन की कटाई जरूर करा लें और हरे चारे के साथ सूखा भूसा मिलाकर दें ताकि दस्त की समस्या न हो।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारिश के मौसम में भेड़-बकरियों की ऊन क्यों खराब होती है?\nनमी, कीचड़ और गंदगी के लंबे समय तक संपर्क में रहने से ऊन उलझ जाती है और उसमें फंगस लग जाती है।\n\n2. पशुओं के बाड़े को सूखा रखने के लिए क्या करना चाहिए?\nबाड़े का फर्श हमेशा सूखा रखें और संभव हो तो लकड़ी या बांस की मचान बनाएं।\n\n3. ऊन की कटाई कब करा लेनी चाहिए?\nबारिश का मौसम शुरू होने से पहले ही ऊन की कटाई करा लेना सबसे बेहतर रहता है।\n\n4. पशुओं में जूं और किलनी की समस्या से कैसे निपटें?\nधूप निकलने पर पशु चिकित्सक की सलाह से परजीवी नियंत्रण की दवा का इस्तेमाल करें।\n\n5. हरे चारे के साथ क्या मिलाकर देना चाहिए?\nहरे चारे के साथ सूखा भूसा मिलाकर देना चाहिए ताकि दस्त की समस्या न हो।",
  "url": "https://trendkia.com/business/pashupalaka-bhai-barisha-ke-mausama-men-aise-bachaen-bhera-bakariyon-ki-una-aura-bala-27614",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-04",
  "tags": [
    "पशुपालन",
    "मानसून देखभाल",
    "भेड़ बकरी",
    "ऊन की क्वालिटी",
    "कृषि सलाह"
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  "site": "TrendKia"
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