# पशुपालक गलती से भी गाय-भैंस को न खिलाएं ये चीजें, दूध उत्पादन पर पड़ेगा सीधा असर

> सुल्तानपुर के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर कुमार ने गाय-भैंस के खानपान को लेकर जरूरी सलाह दी है। खराब खाना और फफूंद लगा चारा पशुओं के स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/pashupalaka-galati-se-bhi-gaya-bhainsa-ko-na-khilaen-ye-chijen-dudha-utpadana-para-parega-sidha-asara-50088 · **Language:** Hindi
**Tags:** पशुपालन, सुल्तानपुर, कृषि विज्ञान केंद्र, दुग्ध उत्पादन, पशु आहार

सुल्तानपुर में गाय और भैंस पालने वाले किसानों के लिए पशुओं का सही खानपान बेहद जरूरी है ताकि उनसे बेहतरीन दूध उत्पादन मिल सके। कई बार लोग अनजाने में घर की बची हुई चीजें या अन्य खाद्य सामग्री बिना सोचे-समझे मवेशियों को परोस देते हैं। इस तरह की लापरवाही से पशुओं की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उनका दूध उत्पादन भी घट जाता है। अत्यधिक मात्रा में गलत चीजें खिलाने से पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर परेशानियां भी शुरू हो सकती हैं, इसलिए पशुओं के चारे को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

## फफूंद लगा चारा और सड़ी सामग्री से बचाव
कृषि विज्ञान केंद्र सुल्तानपुर में अपनी सेवाएं दे रहे पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. दिवाकर कुमार ने बताया कि गाय-भैंस को कभी भी सड़ी हुई सब्जियां, खराब आलू, बासी या फफूंद लगी रोटियां, चावल और अन्य संदूषित खाद्य सामग्री नहीं खिलानी चाहिए। खासकर नमी और गर्मी के मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब होता है। इसलिए जरूरी है कि पशुओं को हमेशा साफ-सुथरा और ताजा चारा ही दिया जाए ताकि वे स्वस्थ रह सकें।

## मायकोटॉक्सिन और फफूंद का खतरा
डॉ. दिवाकर कुमार के मुताबिक, मौसम की नमी के कारण कई बार भूसे, खली, मक्का, दाने और दूसरे आहार में फफूंद पनपने लगती है। ऐसे खराब चारे में मायकोटॉक्सिन जैसे खतरनाक विषैले तत्व पैदा हो जाते हैं, जो मवेशियों की सेहत और उनके दूध उत्पादन दोनों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। बदबूदार, सीलन से भरे या फफूंदयुक्त चारे को मवेशियों से दूर रखना चाहिए। इसके साथ ही, चारे को हमेशा किसी सूखी और हवादार जगह पर ही स्टोर करना चाहिए।

विशेषज्ञ का कहना है कि आलू वैसे तो सामान्य मात्रा में पशु आहार का हिस्सा बन सकता है, लेकिन हरे, अंकुरित, सड़े या फफूंद लगे आलू खिलाने से पूरी तरह बचना चाहिए। इस तरह के आलू में सोलानिन जैसे ग्लाइकोएल्केलॉइड की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जिससे पशुओं में फूड पॉइजनिंग या विषाक्तता का खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा, खेतों या सड़क किनारे उगने वाले अनजान पौधों को भी मवेशियों को खाने से रोकना चाहिए क्योंकि इनमें से कई पौधे जहरीले हो सकते हैं।

## प्याज और पत्तागोभी से जुड़ी सावधानियां
पशु चिकित्सा वैज्ञानिक के अनुसार, मवेशियों को बहुत अधिक मात्रा में प्याज खिलाना भी नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। ज्यादा प्याज खाने से उनकी लाल रक्त कोशिकाओं को भारी नुकसान पहुंच सकता है और उनमें एनीमिया जैसी बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। इसी प्रकार, पत्तागोभी परिवार से ताल्लुक रखने वाली कुछ फसलों को भी अत्यधिक मात्रा में पशुओं को खिलाने से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं।

## संतुलित आहार और सही प्रबंधन
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पशुओं के भोजन में किसी एक ही चीज की अधिकता करने के बजाय हरा चारा, सूखा चारा, संतुलित दाना और मिनरल मिक्सचर को उचित अनुपात में शामिल करें। इसके अलावा, पशुओं के पीने के लिए हमेशा पर्याप्त और स्वच्छ पानी का इंतजाम होना बेहद जरूरी है। सही चारा प्रबंधन अपनाने से मवेशियों की सेहत दुरुस्त रहती है और दूध का उत्पादन भी बेहतर होता है।

## इसका आप पर असर
पशुपालकों के लिए अपने मवेशियों के खानपान में सुधार करना सीधा आर्थिक लाभ और पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य से जुड़ा है।

- **भारत में:** देशभर के पशुपालकों को अपने मवेशियों को फफूंद लगा चारा और सड़ी सब्जियां देने से बचना चाहिए ताकि दूध उत्पादन में गिरावट न आए।
- **सुल्तानपुर में:** स्थानीय किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की सलाह मानकर संतुलित आहार और साफ पानी का प्रबंध करना चाहिए।
- **आर्थिक सुरक्षा:** खराब दाने या विषैले पौधों से पशुओं के बीमार होने पर इलाज का भारी खर्च बच सकता है।
- **दूध की गुणवत्ता:** सही चारा प्रबंधन अपनाने से मवेशियों का स्वास्थ्य सुधरता है और गुणवत्तापूर्ण दूध मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पशुओं को गलत और फफूंदयुक्त आहार देने से उनके शरीर में विषैले तत्व और पाचन संबंधी विकार पैदा हो जाते हैं।

- **फफूंद और मायकोटॉक्सिन:** नमी के कारण भूसे और दाने में पनपने वाली फफूंद मायकोटॉक्सिन जैसे खतरनाक तत्व बनाती है।
- **विषाक्तता का खतरा:** हरे या अंकुरित आलू में सोलानिन नामक ग्लाइकोएल्केलॉइड बढ़ जाता है जो जहर का काम करता है।
- **रक्त कोशिकाओं को नुकसान:** अत्यधिक प्याज खाने से मवेशियों की लाल रक्त कोशिकाओं को क्षति पहुंचती है जिससे एनीमिया का खतरा बनता है।
- **मौसम का प्रभाव:** गर्मी और नमी के कारण खाद्य सामग्री बहुत जल्दी खराब हो जाती है और उसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनपते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. गाय-भैंस को किस तरह का खाना नहीं खिलाना चाहिए?
पशुओं को सड़ी सब्जियां, खराब आलू, बासी या फफूंद लगी रोटी, चावल और खराब खाद्य सामग्री नहीं खिलानी चाहिए।

### 2. फफूंद लगे चारे से पशुओं को क्या नुकसान होता है?
फफूंद लगे चारे में मायकोटॉक्सिन जैसे विषैले पदार्थ बनते हैं जो सेहत और दूध उत्पादन को प्रभावित करते हैं।

### 3. किस तरह के आलू पशुओं के लिए खतरनाक हैं?
हरे, अंकुरित, सड़े या फफूंद लगे आलू खिलाने से बचना चाहिए क्योंकि उनमें सोलानिन की मात्रा बढ़ जाती है।

### 4. अतिरिक्त प्याज खिलाने से मवेशियों को क्या समस्या हो सकती है?
ज्यादा प्याज खाने से लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और एनीमिया होने का खतरा रहता है।

### 5. पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए आहार में क्या शामिल करना चाहिए?
आहार में हरा चारा, सूखा चारा, संतुलित दाना, मिनरल मिक्सचर और पर्याप्त साफ पानी शामिल करना चाहिए।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._