# पटना में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के नाम पर हो रही थी करोड़ों की ठगी, महिला समेत तीन धराए

> पटना के पत्रकार नगर इलाके में प्रधानमंत्री मुद्रा लोन के नाम पर चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/patna-men-pharji-kola-sentara-ka-bhndaphora-pradhanamntri-mudra-lona-ke-nama-para-ho-rahi-thi-karoron-ki-thagi-mahila-sameta-3-dha-4166 · **Language:** Hindi
**Tags:** पटना साइबर क्राइम, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन, फर्जी कॉल सेंटर, बिहार पुलिस, साइबर फ्रॉड, पत्रकार नगर थाना

बिहार की राजधानी पटना के पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत योगिपुर इलाके में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। यह गिरोह प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य ऋण योजनाओं के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया गया, जिसमें 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैब, 15 एटीएम कार्ड, 5 चेक बुक, 4 पासबुक, 3 नोटबुक और 7 सिम कार्ड शामिल थे। इसके अलावा, पुलिस ने तलाशी में 6 लाख 8650 रुपये की नकदी भी जब्त की है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान अक्षय, रिमझिम और शिवम के रूप में हुई है। ये अपराधी फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर लोन का विज्ञापन चलाते थे।

## कॉलेज के दिनों से शुरू हुई थी तिकड़ी की दोस्ती
जांच में पता चला है कि अक्षय और रिमझिम की मुलाकात कॉलेज के दौरान हुई थी और वहीं से उनकी दोस्ती पनपी। बाद में अक्षय ने रिमझिम को शिवम से मिलाया और तीनों ने मिलकर यह फर्जी कॉल सेंटर शुरू कर दिया। उनके काम करने का तरीका बेहद संगठित था। अक्षय और शिवम की मुख्य भूमिका सोशल मीडिया पर प्रचार करने और जाल बिछाने की थी, जबकि रिमझिम का काम इच्छुक आवेदकों को फोन पर भरोसा दिलाना होता था। जो भी व्यक्ति लोन के लिए संपर्क करता, उसे रिमझिम तरह-तरह के प्रलोभन देती थी। झांसे में लेने के बाद, वह पीड़ित को एक नकली अप्रूवल लेटर भेज देती थी। बाद में प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रिमझिम पीड़ित से 500 से लेकर 2000 रुपये तक क्यूआर कोड या यूपीआई के माध्यम से ऐंठ लेती थी। जब पीड़ित लोन न मिलने की शिकायत करते, तो रिमझिम सीधे उनका नंबर ब्लॉक कर देती थी।

## दूसरे राज्यों में भी दर्ज हैं मामले
साइबर डीएसपी सह थानाध्यक्ष नितीश चंद्र धारिया ने बताया कि यह गिरोह करीब एक साल से सक्रिय था। तीनों आरोपियों के खिलाफ बिहार के बाहर झारखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अभी भी इस नेटवर्क से जुड़े दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है, जिनके लिए विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

## बिना दस्तावेज सिम कार्ड का काला कारोबार
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ये आरोपी बिना किसी वैध दस्तावेज के 2500 से 3000 रुपये में सिम कार्ड खरीद लेते थे। डीएसपी नितीश चंद्र धारिया के अनुसार, अगमकुआं थाना क्षेत्र के अंतर्गत भूतनाथ में कांटी फैक्ट्री के पास एक दुकान है, जहाँ से ये सिम प्राप्त किए जाते थे। पुलिस ने इस सिम विक्रेता की पहचान कर ली है और उसे गिरफ्तार करने के लिए टीम दबिश दे रही है। माना जा रहा है कि इस कड़ी के पकड़े जाने से इस पूरे रैकेट के बारे में और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करके लोन के लिए आवेदन न करें और सरकारी योजनाओं के लिए हमेशा अधिकृत बैंक शाखा या वेबसाइट का ही उपयोग करें।

**पटना में:** स्थानीय निवासी ऑनलाइन लोन विज्ञापनों के प्रति सतर्क रहें और किसी भी 'प्रोसेसिंग फीस' की मांग करने वाले नंबर की तुरंत साइबर सेल में रिपोर्ट करें।

## सवाल-जवाब

### 1. पटना में फर्जी कॉल सेंटर किन लोगों द्वारा चलाया जा रहा था?
यह कॉल सेंटर अक्षय, रिमझिम और शिवम नाम के तीन आरोपियों द्वारा संचालित किया जा रहा था।

### 2. आरोपी लोगों को किस तरह से ठगते थे?
वे सोशल मीडिया के जरिए लोन का विज्ञापन देते थे और फिर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 500 से 2000 रुपये लेकर फर्जी अप्रूवल लेटर भेज देते थे।

### 3. पुलिस ने छापेमारी में क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने 14 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक टैब, 15 एटीएम कार्ड, 5 चेक बुक, 4 पासबुक, 3 नोटबुक, 7 सिम कार्ड और 6 लाख 8650 रुपये नकद बरामद किए हैं।

### 4. क्या ये आरोपी पहले भी अपराधों में शामिल रहे हैं?
हां, पुलिस के अनुसार इन तीनों के खिलाफ झारखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पहले से ही मामले दर्ज हैं।

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