पौधों की जड़ों से प्रदूषण खत्म करने वाला अनोखा प्यूरीफायर, शार्क टैंक फेम संजय मौर्य का बिजनेस मॉडल यूब्रीद के संस्थापक संजय मौर्य ने ब्रीदिंग रूट्स तकनीक विकसित कर पौधों की जड़ों से हवा शुद्ध करने वाला प्यूरीफायर बनाया है, जो शार्क टैंक इंडिया से निवेश पाकर करोड़ों के कारोबार में बदल चुका है। शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय उद्यमी अब परंपरागत मशीनों की जगह प्रकृति आधारित नवाचार पर ध्यान दे रहे हैं। इसी दिशा में स्टार्टअप उद्यमी संजय मौर्य ने यूब्रीद नाम की कंपनी खड़ी करके एक खास तरह का एयर प्यूरीफायर पेश किया है। यह डिवाइस किसी प्लास्टिक फिल्टर के बजाय सीधे जीवित पौधों की प्राकृतिक क्षमता को कई गुना बढ़ाकर दूषित हवा को स्वच्छ वातावरण में बदलने का काम करती है। बाजार में उपलब्ध आम प्यूरीफायर से अलग यह मॉडल प्रकृति और विज्ञान के मेल से कमरे के भीतर शुद्ध हवा मुहैया कराने का एक नया विकल्प बनकर उभरा है। फाइटो रेमेडिएशन और ब्रीदिंग रूट्स का वैज्ञानिक मॉडल संजय मौर्य ने जब इस दिशा में शोध शुरू किया, तब उनका प्राथमिक लक्ष्य यह समझना था कि प्राकृतिक पौधे किस प्रकार जहरीली गैसों और धूल को छानते हैं। उनका विचार था कि क्या महानगरों और व्यस्त शहरी फ्लैटों में इसी जैविक प्रणाली का उपयोग करके प्रदूषण की समस्या हल की जा सकती है। अपने अध्ययन के दौरान उन्होंने पौधों की एक स्वाभाविक प्रक्रिया फाइटो रेमेडिएशन की गहराई को समझा। इस शब्द में फाइटो का आशय पौधे से है और रेमेडिएशन का अर्थ समाधान अथवा उपचार से जुड़ा है। इस वैज्ञानिक प्रणाली के अंतर्गत पौधों की जड़ों के आसपास विशेष सूक्ष्मजीव यानी माइक्रो ऑर्गेनिज्म पनपते हैं। जब कमरे की गंदी और जहरीली हवा इन जड़ों तक पहुंचती है, तो ये सूक्ष्मजीव खतरनाक गैसों को रासायनिक रूप से तोड़कर हानिरहित और अनुकूल गैसों में बदल देते हैं। यूब्रीद ने इसी कुदरती चक्र को अपनी ब्रीदिंग रूट्स तकनीक के माध्यम से एक नियंत्रित मशीन के रूप में ढाला है। कंपनी का दावा है कि इस विशेष तकनीक के कारण एक अकेला पौधा इतना प्रभावी हो जाता है कि वह लगभग 500 साधारण पौधों के बराबर हवा को अकेले ही साफ करने में सक्षम हो जाता है। शुरुआती बूटस्ट्रैपिंग से 12 करोड़ के मूल्यांकन तक पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस आधुनिक उद्यम को जमीन पर उतारने की यात्रा आसान नहीं थी। संजय मौर्य ने शुरुआती 4 वर्षों तक अपनी इस कंपनी को बिना किसी बाहरी फंडिंग के पूरी तरह बूटस्ट्रैप मॉडल पर संचालित किया। कठिन दौर के बाद व्यवसाय ने रफ्तार पकड़ी और पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 2 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज किया। वर्तमान वित्त वर्ष में कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ते हुए करीब 3 से 4 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। कंपनी के विकास में एक बड़ा मोड़ तब आया जब इस स्टार्टअप को टेलीविजन बिजनेस शो शार्क टैंक इंडिया के मंच पर अपनी तकनीक पेश करने का अवसर मिला। शो के दौरान निवेशकों ने इस हरित विचार को सराहा और यूब्रीद को 12 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही प्रसिद्ध निवेशक और शार्क नमिता थापर ने इस उद्यम में व्यक्तिगत निवेश करके कंपनी के विस्तार को नई दिशा दी। उत्पाद श्रेणियां, कीमतें और उपलब्धता ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों और बजट को ध्यान में रखते हुए यूब्रीद ने बाजार में तीन अलग-अलग श्रेणियों के प्यूरीफायर उतारे हैं। पहली श्रेणी आम उपभोक्ताओं और छोटे कमरों के लिए रखी गई है, जिसकी कीमत 5,000 रुपये निर्धारित की गई है। दूसरी श्रेणी मध्यम स्तर के उपयोग के लिए है, जिसमें आने वाले मॉडल्स की कीमत 10,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये के दायरे में रखी गई है। वहीं बड़े स्थानों और प्रीमियम उपयोग के लिए तैयार की गई तीसरी श्रेणी के प्यूरीफायर की कीमत करीब 40,000 रुपये है। खरीदारी के लिए उपभोक्ताओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की सुविधा दी गई है। यह उत्पाद यूब्रीद की आधिकारिक वेबसाइट के अलावा फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देश भर के उपभोक्ता आसानी से इन्हें ऑर्डर कर सकें। इसका आप पर असर घर के भीतर रासायनिक फिल्टर की जगह जैविक तरीकों से स्वच्छ हवा पाने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए यह तकनीक एक नया पर्यावरण-अनुकूल विकल्प देती है। • लागत और विकल्प: बजट के हिसाब से तीन अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक 5,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक के मॉडल चुन सकते हैं। • आसान उपलब्धता: उत्पाद खरीदने के लिए किसी विशेष डीलरशिप पर जाने की आवश्यकता नहीं है। इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ अमेज़न और फ्लिपकार्ट से ऑनलाइन मंगाया जा सकता है। • शहरी घरों के लिए समाधान: मेट्रो शहरों में रहने वाले लोग कम जगह में 500 पौधों जितनी शुद्ध हवा हासिल कर सकते हैं। यह तकनीक घर के भीतर प्राकृतिक रूप से कार्बनिक वायु शोधन की सुविधा प्रदान करती है। • स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा: नए उद्यमियों के लिए बूटस्ट्रैप से संस्थागत फंडिंग तक की राह का यह व्यावहारिक उदाहरण है। चार साल तक सीमित संसाधनों में काम करने के बाद 12 करोड़ रुपये का मूल्यांकन हासिल किया गया। ऐसा क्यों हुआ महानगरों में घर के भीतर दूषित वायु की समस्या और भारी सिंथेटिक फिल्टर पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पौधों पर आधारित इस तकनीक का निर्माण हुआ। संजय मौर्य ने प्रकृति के स्वयं स्वच्छ होने के चक्र को शहरी फ्लैटों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह अध्ययन शुरू किया था। • वैज्ञानिक समाधान की खोज: पारंपरिक पौधों की वायु शोधन क्षमता को छोटे स्थानों में अधिकतम करने की आवश्यकता थी। शोध में फाइटो रेमेडिएशन प्रक्रिया सामने आई, जिसके तहत पौधों की जड़ों के सूक्ष्मजीव विषैली गैसों को उपयोगी तत्वों में तोड़ देते हैं। • ब्रीदिंग रूट्स तकनीक का विकास: साधारण पौधा अकेले बड़े कमरे की हवा साफ करने में धीमा होता है। कंपनी ने ऐसी तकनीक तैयार की जिससे एक पौधे की शोधन क्षमता बढ़कर 500 पौधों के बराबर पहुंच गई। • वित्तीय स्थिरता और विस्तार: चार वर्षों तक लगातार बूटस्ट्रैप संचालन ने उत्पाद की उपयोगिता को सिद्ध किया। इसके बाद शार्क टैंक इंडिया के मंच पर नमिता थापर का निवेश मिलने से कंपनी के उत्पादन और बाजार तक पहुंच में तेजी आई। सवाल-जवाब 1. यूब्रीद के संस्थापक कौन हैं? यूब्रीद के संस्थापक संजय मौर्य हैं, जिन्होंने पौधों की जड़ों पर आधारित एयर प्यूरीफायर बनाया है। 2. ब्रीदिंग रूट्स तकनीक कैसे काम करती है? यह तकनीक फाइटो रेमेडिएशन पर आधारित है, जहां पौधों की जड़ों के पास मौजूद सूक्ष्मजीव दूषित हवा की हानिकारक गैसों को हानिरहित गैसों में तोड़ देते हैं। 3. यूब्रीद का एक पौधा कितने पौधों के बराबर हवा साफ करता है? कंपनी के अनुसार, उनकी तकनीक की मदद से एक पौधा 500 पौधों जितनी हवा साफ करने की क्षमता रखता है। 4. संजय मौर्य की कंपनी को शार्क टैंक इंडिया में कितना वैल्यूएशन मिला? शार्क टैंक इंडिया में यूब्रीद को 12 करोड़ रुपये का वैल्यूएशन मिला और शार्क नमिता थापर ने इसमें निवेश किया। 5. यूब्रीद का टर्नओवर कितना है? कंपनी ने पिछले साल 2 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया था और इस साल 3 से 4 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर होने का अनुमान है। 6. यूब्रीद एयर प्यूरीफायर की कीमतें क्या हैं? इनकी तीन श्रेणियां हैं जिनकी कीमतें 5,000 रुपये, 10,000 से 15,000 रुपये के बीच और करीब 40,000 रुपये हैं। 7. यह प्यूरीफायर कहां से खरीदा जा सकता है? यह प्यूरीफायर यूब्रीद की वेबसाइट के अलावा फ्लिपकार्ट और अमेज़न से ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। प्रेरणा और सबक संजय मौर्य की यह यात्रा साबित करती है कि विज्ञान और धैर्य के दम पर बूटस्ट्रैप्ड विचारों को भी बड़े लाभदायक उद्यमों में बदला जा सकता है। • धैर्य और बूटस्ट्रैपिंग: शुरुआती 4 साल तक बिना किसी बड़े निवेशक के टिके रहना स्टार्टअप की नींव मजबूत करता है। बाहरी पूंजी जुटाने से पहले उत्पाद और तकनीक को पूरी तरह परखना फायदेमंद साबित होता है। • प्रकृति आधारित नवाचार: जटिल समस्याओं का हल हमेशा महंगे रासायनिक तंत्र में नहीं, बल्कि कुदरती प्रक्रियाओं में छिपा हो सकता है। फाइटो रेमेडिएशन जैसी जैविक प्रणालियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर टिकाऊ उत्पाद बनाए जा सकते हैं। • मंच और निवेश का सही उपयोग: शार्क टैंक इंडिया जैसे राष्ट्रीय मंच पर 12 करोड़ रुपये का मूल्यांकन हासिल कर सही मेंटर चुनना विकास की गति बढ़ाता है। नमिता थापर के जुड़ने से कंपनी को 3 से 4 करोड़ रुपये के टर्नओवर लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिली। https://trendkia.com/business/paudhon-ki-jaron-se-pradushana-khatma-karane-vala-anokha-pyuriphayara-shark-tank-phema-sanjay-maurya-ka-bijanesa-modala-40546 TrendKia — Har trend, sabse pehle.