# पीएफसी और आरईसी विलय के बाद 36.96 प्रतिशत शेयर रहते हुए भी 51 प्रतिशत वोटिंग राइट्स बनाए रखेगी सरकार

> केंद्र सरकार पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और आरईसी के विलय के बाद विशेष वोटिंग अधिकार व्यवस्था के जरिए 51 प्रतिशत वोटिंग नियंत्रण बनाए रखने का खाका तैयार कर रही है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/pfc-aura-rec-vilaya-ke-bada-36-96-pratishata-sheyara-rahate-hue-bhi-51-pratishata-votinga-raitsa-banae-rakhegi-sarakara-23102 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीएफसी, आरईसी, पीएफसी शेयर, शेयर बाज़ार, केंद्रीय बजट 2026, सरकारी शेयर

पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लिमिटेड के प्रस्तावित विलय को लेकर केंद्र सरकार एक विशेष स्वामित्व और वोटिंग ढांचा तैयार कर रही है। इस नए ढांचे के तहत विलय के बाद बनने वाली संयुक्त इकाई में सरकार की साधारण शेयरधारिता घटकर लगभग 36.96 प्रतिशत पर आ सकती है। इसके बावजूद, सरकार विशेष वोटिंग अधिकारों के माध्यम से कंपनी में 51 प्रतिशत की बहुमत वोटिंग नियंत्रण बनाए रखने की योजना पर काम कर रही है। केंद्रीय बजट 2026 में घोषित इस विलय प्रक्रिया के तहत आरईसी का पूरी तरह से पीएफसी में विलय कर दिया जाएगा।

## स्पेशल वोटिंग राइट्स से बहुमत नियंत्रण बनाए रखने का खाका
प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विलय के बाद सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे गिरने पर भी कंपनी के महत्वपूर्ण फैसलों में सरकार का नियंत्रण बना रहे। इसके लिए अधिकारी सुपीरियर वोटिंग राइट्स (एसवीआर) शेयरों और प्रेफरेंस शेयरों के संयोजन का अध्ययन कर रहे हैं। साधारण इक्विटी शेयरों में आमतौर पर एक शेयर पर एक वोट का नियम लागू होता है, लेकिन सुपीरियर वोटिंग राइट्स वाले शेयरों के मामले में मताधिकार की ताकत कई गुना अधिक होती है।

योजना के तहत एक एसवीआर शेयर पर 10 वोटिंग अधिकार दिए जा सकते हैं। इस व्यवस्था के लागू होने से साधारण इक्विटी शेयरधारिता 50 प्रतिशत से कम रहने के बाद भी केंद्र सरकार के पास बोर्ड में निदेशकों की नियुक्ति और बड़े कॉर्पोरेट फैसलों पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा। किसी भी विलय सौदे में जब अधिग्रहित कंपनी के शेयरधारकों को नए शेयर जारी किए जाते हैं, तो मौजूदा शेयरधारकों का कुल इक्विटी प्रतिशत और वोटिंग अधिकार स्वाभाविक रूप से घट जाता है। इसी स्थिति से निपटने के लिए यह विशेष शेयर ढांचा तैयार किया जा रहा है।

## प्रस्तावित शेयर संरचना और तरजीही शेयर जारी करने की योजना
प्रस्तावित वित्तीय ढांचे के तहत लगभग 7 करोड़ सुपीरियर वोटिंग राइट्स (एसवीआर) शेयर प्रीमियम दर पर जारी करने का विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही 10 रुपये के अंकित मूल्य (फेस वैल्यू) वाले लगभग 63 करोड़ रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर (आरपीएस) भी जारी किए जाने की संभावना है। इन विशेष वित्तीय उपकरणों की मदद से सरकार साधारण इक्विटी में आधी से ज्यादा हिस्सेदारी रखे बिना भी कंपनी के नीतिगत निर्णयों पर अपनी पकड़ मजबूत रख पाएगी।

## शेयर स्वैप अनुपात और विलय की मंजूरियां
विलय सौदे को शेयर स्वैप व्यवस्था के आधार पर डिजाइन किया गया है, जिसमें कोई नकद भुगतान शामिल नहीं है। तय अनुपात के अनुसार, आरईसी के शेयरधारकों को रिकॉर्ड तिथि पर उनके पास मौजूद प्रत्येक 100 आरईसी शेयरों के बदले पीएफसी के 88 शेयर दिए जाएंगे। हालांकि, इस विलय के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड तिथि की घोषणा अभी तक नहीं की गई है। पीएफसी और आरईसी दोनों कंपनियों के निदेशक मंडलों ने जून के महीने में ही विलय योजना और इस शेयर स्वैप अनुपात को अपनी मंजूरी दे दी थी। आवश्यक नियामक और वैधानिक स्वीकृतियां मिलने के बाद विलय की प्रक्रिया पूरी होगी।

## शेयर बाजार में पीएफसी के शेयरों की स्थिति
प्रस्तावित विलय और वोटिंग संरचना की खबरों के बीच भारतीय शेयर बाजार में पीएफसी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर गुरुवार को पीएफसी का शेयर 2.73 प्रतिशत यानी 9.95 रुपये की कमजोरी के साथ 354.15 रुपये पर कारोबार कर रहा था। ट्रेडिंग सत्र के दौरान पीएफसी का शेयर 361.75 रुपये पर खुला और 362.30 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं सत्र के दौरान शेयर का निचला स्तर 352.35 रुपये दर्ज किया गया।

## इसका आप पर असर
इस विलय और शेयर पुनर्गठन का पीएसयू क्षेत्र के निवेशकों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के शेयरधारकों पर सीधा वित्तीय प्रभाव पड़ेगा।

- **भारत में:** सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों में निवेश करने वाले शेयरधारकों को नई वोटिंग संरचना और शेयर अनुपात का स्पष्ट विचार मिलेगा। सरकारी नियंत्रण बने रहने से कंपनी के दीर्घकालिक नीतिगत फैसलों में स्थिरता बनी रहेगी।
- **शेयरधारकों के लिए:** आरईसी के शेयरधारकों को उनके 100 शेयरों के बदले पीएफसी के 88 शेयर मिलेंगे। इससे बिना नकद लेनदेन के निवेशकों को नई एकीकृत कंपनी का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
- **बाजार भावना:** सुपीरियर वोटिंग अधिकारों के प्रयोग से पीएसयू विनिवासात्मक नीतियों में नया मॉडल स्थापित हो सकता है। इससे अन्य पीएसयू विलय सौदों में भी सरकारी नियंत्रण बनाए रखने का नया रास्ता खुलेगा।
- **ट्रेडिंग प्रभाव:** पीएफसी के शेयर में गुरुवार को हुई 2.73 प्रतिशत की गिरावट अल्पकालिक बाजार प्रतिक्रिया को दर्शाती है। लंबी अवधि के निवेशक आधिकारिक रिकॉर्ड तिथि की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. आरईसी के शेयरधारकों को विलय के बाद पीएफसी के कितने शेयर मिलेंगे?
आरईसी के शेयरधारकों को उनके पास मौजूद प्रत्येक 100 आरईसी शेयरों के बदले पीएफसी के 88 शेयर मिलेंगे।

### 2. 36.96 प्रतिशत शेयर रहने के बावजूद सरकार 51 प्रतिशत वोटिंग अधिकार कैसे रखेगी?
सरकार सुपीरियर वोटिंग राइट्स (एसवीआर) शेयरों का उपयोग करेगी, जिसमें एक एसवीआर शेयर पर 10 वोटिंग अधिकार मिलेंगे।

### 3. क्या इस विलय सौदे में कोई नकद भुगतान शामिल है?
नहीं, यह पूरा विलय विशुद्ध रूप से शेयर स्वैप व्यवस्था पर आधारित है और इसमें कोई नकद भुगतान शामिल नहीं है।

### 4. गुरुवार को पीएफसी के शेयर का प्रदर्शन कैसा रहा?
एनएसई पर पीएफसी का शेयर 2.73 प्रतिशत यानी 9.95 रुपये गिरकर 354.15 रुपये पर बंद हुआ।

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