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  "title": "फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां: जान जोखिम में डालकर 1 घंटे में 320 कटिंग, हाथ आते हैं सिर्फ 50 रुपए",
  "summary": "फिरोजाबाद के कारीगर ग्राइंडर पर कांच की चूड़ियां काटते हुए हर रोज जान का जोखिम उठाते हैं, लेकिन इस मेहनत के बदले उन्हें बेहद मामूली मजदूरी ही नसीब होती है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद शहर कांच की चूड़ियों की चमक के लिए देशभर में पहचाना जाता है। यहां की गलियों से लेकर कारखानों तक चूड़ियों की खनक हर तरफ गूंजती रहती है, और लगभग हर घर किसी न किसी रूप में इस कारोबार से जुड़ा हुआ है। मगर जिस चमक को बाजार में सजा देखकर खरीदार मोहित होते हैं, उसके पीछे की मेहनत और जोखिम पर शायद ही किसी की नजर जाती है।\n\nचमक के पीछे का जोखिम भरा काम\nएक चूड़ी के बाजार तक पहुंचने से पहले कई हाथों से होकर गुजरती है। कारखाने में बनने के बाद सादा चूड़ियों को कटिंग के लिए लाया जाता है, और यही कटिंग का चरण सबसे खतरनाक माना जाता है। कटाई पूरी होने के बाद ही इन्हें सजाने और बाजार भेजने की बारी आती है। दिक्कत यह है कि इतने जोखिम भरे काम के बदले कारीगरों के हाथ बेहद कम कमाई आती है।\n\nग्राइंडर पर चलती है नाजुक मेहनत\nफिरोजाबाद के रसूलपुर इलाके में चूड़ियों की कटिंग करने वाले कारीगर मोहम्मद अशरफ ने TrendKia से बातचीत में बताया कि यह काम बेहद रिस्की है। सबसे पहले कारखाने से सादा चूड़ियां कटिंग के लिए मंगाई जाती हैं, फिर कारीगर उन्हें तराशने का काम शुरू करते हैं।\n\nकांच की इन चूड़ियों को ग्राइंडर की मदद से काटकर नई-नई डिजाइनों में ढाला जाता है। कारीगर ग्राइंडर चलाते हुए हर चूड़ी पर अलग-अलग नक्काशी उकेरते हैं। इस दौरान कई बार नाजुक कांच टूट भी जाता है, फिर भी कारीगर जोखिम उठाकर लगातार यह काम करते रहते हैं। कटिंग पूरी हो जाने के बाद ही ये चूड़ियां बाजार में सजने के लायक बनती हैं। इसके बाद दूसरे कारीगर कटे हुए हिस्सों पर गोल्डन रंग की पॉलिश चढ़ाते हैं, जिससे इनकी चमक और भी निखर उठती है।\n\nएक घंटे में 320 चूड़ियां\nकारीगर ने बताया कि हर रोज चूड़ियों के गुच्छे इस अड्डे पर लाए जाते हैं और यहीं पर इनकी कटाई होती है। कारीगर पूरे दिन इसी काम में जुटे रहते हैं। रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक घंटे में 320 चूड़ियां कटकर तैयार हो जाती हैं।\n\nमेहनत ज्यादा, मजदूरी मामूली\nइतनी बारीकी और खतरे वाले काम के बावजूद कारीगरों को सिर्फ ₹50 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक की मजदूरी मिल पाती है। अगर काम अच्छा चलता रहे तो एक कारीगर दिनभर में ज्यादा से ज्यादा ₹300 तक कमा पाता है, और इतनी कमाई में उसका घर-गृहस्थी चलाना भी मुश्किल हो जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nआपके लिए इसका क्या मतलब है:\n\n• भारत में: जो हस्तशिल्प उत्पाद आप खरीदते हैं उनके पीछे अक्सर बेहद कम मजदूरी पर खतरनाक हालात में काम करने वाले कारीगर होते हैं, जिनकी रोजी-रोटी इसी असंगठित काम पर टिकी है।\n• फिरोजाबाद में: यहां के चूड़ी कारीगरों को दिनभर जान जोखिम में डालकर भी ज्यादा से ज्यादा ₹300 ही मिल पाते हैं, जिससे उनके परिवार का गुजारा करना तक मुश्किल है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियों की कटिंग खतरनाक क्यों मानी जाती है?\nक्योंकि कारीगर ग्राइंडर से नाजुक कांच की चूड़ियां काटते हैं, जो कई बार टूट जाती हैं और कारीगरों को जान का जोखिम उठाना पड़ता है।\n\n2. एक घंटे में कितनी चूड़ियां कट कर तैयार होती हैं?\nएक कुशल कारीगर करीब एक घंटे में 320 चूड़ियां काटकर तैयार कर लेता है।\n\n3. इस काम के लिए कारीगरों को कितनी मजदूरी मिलती है?\nकारीगरों को ₹50 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक मजदूरी मिलती है, और अच्छा काम चलने पर एक दिन में अधिकतम ₹300 तक की कमाई हो पाती है।\n\n4. कटिंग के बाद चूड़ियों पर और क्या किया जाता है?\nकटिंग के बाद दूसरे कारीगर कटे हुए हिस्सों पर गोल्डन रंग की पॉलिश लगाते हैं, जिससे चूड़ियों की चमक और बढ़ जाती है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/phirojabada-ki-kancha-ki-churiyan-jana-jokhima-men-dalakara-1-ghnte-men-320-kati-1505",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-17",
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    "फिरोजाबाद चूड़ी उद्योग",
    "कांच की चूड़ियां",
    "चूड़ी कारीगर मजदूरी",
    "रसूलपुर फिरोजाबाद",
    "चूड़ी कटिंग",
    "उत्तर प्रदेश हस्तशिल्प"
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  "site": "TrendKia"
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