पीतल नगरी मुरादाबाद में कच्चे माल का संकट, सिल्ली के दाम 95 प्रतिशत उछलने से कारोबार सुस्त मुरादाबाद में पीतल की सिल्ली का भाव पिछले एक साल में 500 रुपये से बढ़कर 950 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वैश्विक युद्ध और कच्चे माल की महंगाई के कारण हस्तशिल्प कारोबार में भारी गिरावट आई है। पीतल नगरी के नाम से दुनिया भर में मशहूर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले का हस्तशिल्प उद्योग इन दिनों गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। जिस पीतल की सिल्ली पर पूरा उद्योग और धातु निर्माण टिका होता है, उसी की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले बारह महीनों के दौरान कच्चे माल की दरों में हुई इस तेज वृद्धि ने स्थानीय निर्माताओं और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाज़ार में तैयार माल की मांग घटने से कारीगरों और कारोबारियों के सामने आजीविका का संकट भी गहराने लगा है। एक साल में 95 प्रतिशत तक उछले सिल्ली के भाव मुरादाबाद के स्थानीय पीतल कारोबारी राघव खन्ना ने बताया कि पीतल की सिल्ली के दाम लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यदि पिछले वर्ष के आंकड़ों से तुलना की जाए तो सिल्ली की कीमतों में लगभग 95 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखने को मिली है। महज एक साल पहले जो पीतल की सिल्ली 500 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आसानी से उपलब्ध थी, वर्तमान समय में उसकी कीमत बढ़कर 950 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच चुकी है। इस अचानक आई मूल्य वृद्धि ने पीतल के बर्तन, सजावटी सामान और हस्तशिल्प बनाने वाली विनिर्माण इकाइयों के गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। वैश्विक युद्ध और कॉपर-जिंक की महंगाई बनी मुख्य वजह कच्चे माल के महंगे होने के पीछे अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। पीतल का निर्माण मुख्य रूप से कॉपर (तांबा) और जिंक (जस्ता) जैसी प्राथमिक धातुओं को मिलाकर किया जाता है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी सैन्य संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर और जिंक की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर इनके दाम काफी चढ़ गए हैं। इसके अतिरिक्त, धातु को पिघलाने में लगने वाली ऊर्जा, ढलाई की लागत और कुशल मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने से तैयार सिल्ली की अंतिम लागत बहुत अधिक निकल कर आ रही है। कमजोर ग्राहक मांग से पीतल बाजार में छाया मंदी का सन्नाटा सिल्ली की कीमतें अत्यधिक बढ़ने के कारण मुरादाबाद के निर्माताओं को अपने तैयार पीतल उत्पादों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। बाजार में सामान महंगा होने की वजह से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने ऑर्डर बहुत कम कर दिए हैं। पिछले साल जिस रफ्तार से व्यापार चल रहा था, उसकी तुलना में इस बार कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बिक्री घटने से मुनाफा तो दूर, कारखानों की संचालन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप कई छोटी ढलाई इकाइयां सुस्ती का सामना कर रही हैं और पूरा पीतल उद्योग मंदी की चपेट में आ गया है। इसका आप पर असर पीतल की सिल्ली के दामों में आई भारी तेजी से देश भर में पीतल के बर्तनों और सजावटी सामान की कीमतें बढ़ेंगी, जबकि मुरादाबाद के विनिर्माण क्षेत्र पर मंदी का असर पड़ेगा। • भारत में: पीतल के बर्तन, पूजा सामग्री और सजावटी वस्तुओं के खुदरा दाम में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन के लिए खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को पीतल के सामान के लिए अधिक बजट रखना होगा। • मुरादाबाद में: कारखानों और ढलाई इकाइयों में उत्पादन कम होने से स्थानीय कारीगरों के काम के घंटे घट सकते हैं। छोटे वर्कशॉप में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की दैनिक आय और आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ेगा। • खरीदारों के लिए: पीतल के सामान महंगे होने पर लोग स्टील या एल्युमीनियम जैसे अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे बाजार में पारंपरिक पीतल हस्तशिल्प की मांग में और गिरावट देखने को मिल सकती है। • निर्यातकों के लिए: कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय पीतल उत्पादों की कीमत स्पर्धा कमजोर हो सकती है। विदेशी ऑर्डर घटने से हस्तशिल्प निर्यात से होने वाली आय प्रभावित होगी। ऐसा क्यों हुआ मुरादाबाद में पीतल की सिल्ली महंगी होने के पीछे अंतरराष्ट्रीय तनाव, कच्चे माल की कीमतें और स्थानीय विनिर्माण लागत जैसे कई मुख्य कारण शामिल हैं। इन घटकों ने मिलकर पीतल उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। • वैश्विक युद्ध और आपूर्ति बाधाएं: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी सैन्य संघर्षों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुए हैं। इससे तांबा और जस्ता जैसी बुनियादी धातुओं की वैश्विक आपूर्ति में कमी आई है। • कच्चे माल कॉपर और जिंक के दाम: पीतल का निर्माण कॉपर और जिंक के मिश्रण से किया जाता है। विश्व धातु बाजारों में इन दोनों धातुओं की कीमतें बढ़ने से पीतल की सिल्ली की मूल उत्पादन लागत बहुत बढ़ गई है। • उत्पादन और श्रम लागत में वृद्धि: सिल्ली ढलाई प्रक्रिया में उपयोग होने वाले ईंधन, बिजली और कुशल मजदूरों की दिहाड़ी में वृद्धि हुई है। इन सभी विनिर्माण खर्चों के जुड़ने से तैयार सिल्ली की अंतिम बाजार दर महंगी हो गई है। सवाल-जवाब 1. मुरादाबाद में वर्तमान में पीतल की सिल्ली का भाव क्या है? वर्तमान में मुरादाबाद में पीतल की सिल्ली का भाव लगभग 950 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। 2. एक साल पहले मुरादाबाद में पीतल की सिल्ली किस दर पर बिक रही थी? एक साल पहले मुरादाबाद के बाजार में पीतल की सिल्ली का भाव 500 रुपये प्रति किलोग्राम था। 3. पिछले एक वर्ष में पीतल की सिल्ली के दामों में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है? पिछले वर्ष की तुलना में पीतल की सिल्ली के दामों में लगभग 95 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 4. पीतल की सिल्ली बनाने में किन धातुओं का उपयोग किया जाता है? पीतल का निर्माण मुख्य रूप से कॉपर (तांबा) और जिंक (जस्ता) धातुओं को मिलाकर किया जाता है। 5. पीतल की सिल्ली के दाम बढ़ने का मुख्य कारण क्या है? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्धों के कारण आपूर्ति में रुकावट, कॉपर और जिंक के बढ़ते दाम तथा विनिर्माण व श्रम लागत में वृद्धि इसका मुख्य कारण है। https://trendkia.com/business/pitala-nagari-moradabad-men-kachche-mala-ka-snkata-silli-ke-dama-95-pratishata-uchhalane-se-karobara-susta-29975 TrendKia — Har trend, sabse pehle.