पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उठाए सवाल, तकनीक और सप्लाई चेन पर छिड़ी जंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि आज दुनिया में सप्लाई चेन, एनर्जी और तकनीक को दबाव और दबदबे का हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने भारत के डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप इकोसिस्टम और समावेशी विकास मॉडल को दुनिया के सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए वैश्विक स्तर पर चल रहे शक्ति संघर्ष और बदलते समीकरणों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऊर्जा, खनिज और तकनीक जैसी जरूरी चीजें नियंत्रण और दबाव का जरिया बन चुकी हैं। वैश्विक मंच पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि 21वीं सदी का यह दशक कई बड़ी चुनौतियों से घिरा हुआ है, जिसमें महामारी से लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में छिड़े युद्ध और व्यापारिक बाधाएं शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो माध्यम कभी देशों को आपस में जोड़ते थे, वे अब संघर्ष और वर्चस्व के हथियार के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं। सप्लाई चेन और तकनीक पर नियंत्रण की जंग समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विककरण के दौरान जिन रास्तों और तंत्रों का निर्माण हुआ था, वे अब सप्लाई चेन की रुकावटें और अड़चनें बन चुके हैं। एनर्जी सप्लाई, क्रिटिकल मिनरल्स, पेमेंट गेटवे और आधुनिक तकनीक पर कब्जे की होड़ मची हुई है। दुनिया जब एक संकट से बाहर निकलने का रास्ता खोजती है, तब तक एक और नया संकट सामने आ जाता है। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर क्षेत्र में कार्यप्रणाली को बदल रहा है और कई देश उम्रदराज होती आबादी की समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे में वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत और सवाल भरोसे का बन गया है, जहां संकट के समय आपूर्ति जारी रहने और समझौतों के पालन की गारंटी की आवश्यकता है। डिजिटल भुगतान और समावेशी विकास की मिसाल भारत की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने विदेशी मेहमानों को देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अनुभव लेने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह देश में एक सामान्य स्ट्रीट वेंडर और एक बड़े कार शोरूम का पैमाना भले ही अलग हो, लेकिन दोनों एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। यह समावेशी तकनीक की असली ताकत को दर्शाता है, जो समाज के हर वर्ग को समान अवसर प्रदान कर रही है। स्टार्टअप्स और लोकतंत्र की अनूठी ताकत देश में नवाचार और उद्यमिता के बढ़ते दायरे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले भारत में कुछ सौ स्टार्टअप हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर ढाई लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से उभरकर सामने आए हैं और करीब 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर की मौजूदगी है। इसके अलावा, भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं, लगभग 80,000 रजिस्टर्ड अखबार और प्रकाशन, तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल मौजूद हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में देश में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब और इंस्टाग्राम यूजर्स हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं और चर्चा करते हैं। सत्ता और तकनीक का उद्देश्य मानवीय मूल्यों और गवर्नेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सशक्त करने की यह भावना केवल उपदेश देने के लिए नहीं है, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा ने हमें यही सिखाया है। इस वर्ष ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया में नई ताकतें उभर रही हैं। आज के इस दौर में डेटा, ज्ञान और नवाचार ही असली ताकत हैं। हालांकि, मुख्य सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कैसे किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण आयोजन को पहली बार भारत में सफलतापूर्वक आयोजित करने और सही समय पर सही मंच चुनने के लिए बधाई दी। इसका आप पर असर यह वैश्विक आर्थिक चर्चा और भारत की नीतियों का सीधा असर देश के तकनीकी परिदृश्य और कारोबारी माहौल पर पड़ता है। • भारत में: डिजिटल पेमेंट और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार से छोटे शहरों और महिला उद्यमियों को रोजगार और वित्त पोषण के नए अवसर मिल रहे हैं। • आम नागरिकों के लिए: वैश्विक सप्लाई चेन के दबाव के बीच घरेलू स्तर पर डिजिटल बुनियादी ढांचा मजबूत होने से दैनिक वित्तीय लेनदेन और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान हो रही है। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक मंचों पर इस प्रकार के बयानों के पीछे वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भू-राजनीतिक तनाव और संसाधनों पर नियंत्रण की बढ़ती होड़ मुख्य कारण है। • सप्लाई चेन में व्यवधान: हाल के वर्षों में महामारी और युद्ध जैसी वैश्विक घटनाओं के कारण ऊर्जा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापार में लगातार रुकावटें आई हैं। • विश्वास का संकट: देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौतों और समय पर आपूर्ति को लेकर बढ़ रहे अविश्वास ने वैश्विक नेताओं को इस मुद्दे पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित किया है। सवाल-जवाब 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भाषण कहां दिया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संबोधन ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में दिया। 2. फोरम में किन प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई? फोरम में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीक और सप्लाई चेन पर बढ़ते नियंत्रण और वैश्विक दबाव के मुद्दों पर चर्चा हुई। 3. भारत में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर कितनी हो गई है? भारत में स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 2.5 लाख से अधिक हो गई है। 4. कितने प्रतिशत स्टार्टअप्स में महिला डायरेक्टर या पार्टनर हैं? लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स में एक महिला डायरेक्टर या पार्टनर शामिल हैं। 5. भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या क्या है? भारत में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब यूजर्स और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। https://trendkia.com/business/pm-narendra-modi-at-bloomberg-new-economy-forum-highlights-global-control-over-energy-minerals-and-tech-47268 TrendKia — Har trend, sabse pehle.