# पॉलिसी लेने की रात ही चोरी हो गई बोलेरो, क्लेम अटकाने वाली बीमा कंपनी पर उपभोक्ता अदालत का कड़ा फैसला

> प्रीमियम भुगतान के कुछ ही घंटों बाद वाहन चोरी होने पर बीमा क्लेम खारिज करने वाली कंपनी को उपभोक्ता आयोग ने 9 फीसदी ब्याज, मुआवजा और अदालती खर्च चुकाने का सख्त निर्देश दिया है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/polisi-lene-ki-rata-hi-chori-ho-gai-bolero-klema-atakane-vali-bima-knpani-para-upabhokta-adalata-ka-kara-phaisala-56408 · **Language:** Hindi
**Tags:** उपभोक्ता आयोग, बीमा क्लेम, वाहन चोरी, होशियारपुर, चोलामंडलम इंश्योरेंस, सुप्रीम कोर्ट फैसला

गाड़ी का इंश्योरेंस कराते वक्त कंपनियां तुरंत सुरक्षा और परेशानी मुक्त दावों के बड़े वादे करती हैं, लेकिन नुकसान होते ही तकनीकी पेंच फंसाकर पल्ला झाड़ने की कोशिशें आम बात हो चुकी हैं। पंजाब के होशियारपुर जिले से जुड़ा एक ऐसा ही पेचीदा विवाद सामने आया, जहां पॉलिसी जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर वाहन चोरी हो जाने पर इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम पास करने से साफ मना कर दिया। ग्राहक ने इस मनमाने रवैये के खिलाफ हार मानने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ी और उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए पीड़ित उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया।

## होशियारपुर में बोलेरो पिकअप और इंश्योरेंस का पूरा विवाद
होशियारपुर निवासी जतिंदर कुमार ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी के जरिए अपनी महिंद्रा बोलेरो पिकअप गाड़ी फाइनेंस करवाई थी। वाहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से उन्होंने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 8 सितंबर 2021 से लेकर 7 सितंबर 2022 तक की अवधि के लिए ₹21,103 का प्रीमियम देकर बीमा करवाया। इस पॉलिसी के तहत वाहन का इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू (IDV) ₹3.5 लाख तय किया गया था।

बीमा प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद 7 और 8 सितंबर 2021 की दरमियानी रात करीब 2 बजे जतिंदर कुमार के घर के बाहर खड़ी यह बोलेरो पिकअप चोरी हो गई। सुबह घटना की जानकारी मिलते ही 8 सितंबर को ही पुलिस में विधिवत एफआईआर दर्ज करवाई गई। लंबी छानबीन के बाद भी जब पुलिस वाहन का सुराग लगाने में नाकाम रही, तो अदालत की ओर से अनट्रेस रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई।

## बीमा कंपनी के बहाने और क्लेम खारिज करने का घटनाक्रम
पुलिस की अनट्रेस रिपोर्ट मिलने के बाद जतिंदर कुमार ने नुकसान की भरपाई के लिए इंश्योरेंस कंपनी के समक्ष अपना औपचारिक दावा पेश किया। शुरुआती दौर में कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्रक्रिया में देरी के मौखिक बहाने बनाकर मामले को लटकाए रखा। इसके बाद 17 फरवरी 2022 को कंपनी ने आधिकारिक तौर पर क्लेम को खारिज करते हुए यह आरोप लगा दिया कि ग्राहक ने घटना की तारीख और वास्तविक नुकसान के बारे में गलत जानकारी साझा की है।

अपने वैध अधिकार से वंचित किए जाने पर जतिंदर कुमार ने सेवा में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग में जब मामला पहुंचा तो बीमा कंपनी ने बचाव में एक नई तकनीकी दलील पेश की। कंपनी ने लिखित जवाब में दावा किया कि गाड़ी 8 सितंबर की रात करीब 2 बजे चोरी हुई थी, जबकि उनके सिस्टम के अनुसार पॉलिसी उसी दिन दोपहर 1:58 बजे शुरू हुई दर्ज थी। कंपनी का कहना था कि चूंकि चोरी की घटना पॉलिसी के प्रभावी समय से पहले हुई, इसलिए वे नुकसान की भरपाई के लिए जवाबदेह नहीं हैं।

## आयोग में गवाही और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की नजीर
उपभोक्ता आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान फाइनेंस कंपनी के ब्रांच मैनेजर के बयान और रिकॉर्ड ने बीमा कंपनी के रुख की पोल खोल दी। ब्रांच मैनेजर ने अदालत में स्वीकार किया कि 7 सितंबर को ही गाड़ी का भौतिक सत्यापन कर लिया गया था और प्रीमियम की पूरी रकम नकद में प्राप्त कर ली गई थी। इससे यह साबित हो गया कि ग्राहक ने घटना घटने से पहले ही अपनी तरफ से सारी कानूनी औपचारिकताएं और भुगतान निपटा दिया था।

जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि जब ग्राहक ने घटना से पहले ही प्रीमियम जमा करा दिया था, तो कंपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया या सिस्टम में लेन-देन दर्ज करने में हुई देरी का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के नेशनल इंश्योरेंस बनाम माया देवी मामले का हवाला दिया, जिसमें यह तय किया गया था कि प्रीमियम स्वीकार होते ही बीमा दायित्व शुरू हो जाता है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कंपनी ने 17 फरवरी 2022 के अपने रिजेक्शन लेटर में पॉलिसी के समय को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई थी, लिहाजा बाद में नया आधार गढ़कर मुकरना कानूनन गलत है।

## आयोग का आदेश: 45 दिनों में भुगतान की समयसीमा
उपभोक्ता आयोग ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह जतिंदर कुमार को ₹3.5 लाख का पूरा बीमा क्लेम 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा ग्राहक को मानसिक तनाव और उत्पीड़न झेलने के एवज में ₹25,000 का हर्जाना और कानूनी खर्च के रूप में ₹10,000 अलग से देने का निर्देश दिया गया। अदालत ने सख्त हिदायत दी कि यह पूरी वित्तीय देनदारी 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।

## इसका आप पर असर
यह फैसला उन सभी वाहन स्वामियों के लिए एक मजबूत मिसाल है जिनकी गाड़ियां बीमा प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद दुर्घटना या चोरी का शिकार हो जाती हैं।

- **भारत में:** यदि आपने बीमा प्रीमियम का भुगतान नकद या ऑनलाइन माध्यम से कर दिया है, तो कंपनी आंतरिक कागजी कार्रवाई या सिस्टम में समय दर्ज करने में हुई देरी का बहाना बनाकर आपका दावा खारिज नहीं कर सकती। उपभोक्ता किसी भी गलत रिजेक्शन के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में चुनौती देकर ब्याज सहित हर्जाना हासिल कर सकते हैं।
- **होशियारपुर में:** स्थानीय अदालत और उपभोक्ता आयोग के इस सख्त रुख से पंजाब के वाहन स्वामियों को बीमा कंपनियों की मनमानी के खिलाफ त्वरित कानूनी राहत का भरोसा मिला है। फाइनेंस कराने वाले ग्राहकों के पास यह अधिकार है कि वे ब्रांच मैनेजर की रसीद और गवाही को कानूनी सबूत के तौर पर इस्तेमाल करें।
- **पॉलिसीधारकों के लिए:** जब भी नई या पुरानी गाड़ी का इंश्योरेंस कराएं, तो प्रीमियम रसीद और वाहन के फिजिकल वेरिफिकेशन का लिखित प्रमाण संभालकर रखें। किसी भी चोरी के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज कराएं और पुलिस की अनट्रेस रिपोर्ट अदालत से मंजूर होते ही दावे की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
- **वित्तीय सुरक्षा पर:** बीमा कंपनियों द्वारा पहले दिए गए रिजेक्शन लेटर में जो कारण दर्ज नहीं हैं, उन्हें वे बाद में अदालत में नए बहाने के तौर पर नहीं जोड़ सकती हैं। किसी भी अनुचित देरी या इनकार पर 9 फीसदी ब्याज के साथ मुआवजे का कानूनी दावा किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बीमा कंपनी ने यह दावा इसलिए खारिज किया था क्योंकि वाहन चोरी पॉलिसी के डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज शुरुआत समय से कुछ घंटे पहले हुई थी। हालांकि, ग्राहक द्वारा समय पर प्रीमियम चुकाए जाने और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित नियमों के चलते कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया गया।

- **समय का तकनीकी विवाद:** बीमा कंपनी के सिस्टम में पॉलिसी शुरू होने का समय 8 सितंबर 2021 को दोपहर 1:58 बजे दर्ज था, जबकि चोरी उसी तारीख की रात लगभग 2 बजे हो गई थी। कंपनी ने इसी समय के अंतर को ढाल बनाकर दावा अमान्य करार दिया।
- **प्रीमियम का पूर्व भुगतान:** फाइनेंस कंपनी के स्थानीय कार्यालय में 7 सितंबर को ही गाड़ी का भौतिक सत्यापन कर नकद प्रीमियम ले लिया गया था। कानूनी तौर पर प्रीमियम स्वीकार होते ही अनुबंध प्रभावी माना जाता है, भले ही सिस्टम में पॉलिसी बाद में दर्ज हुई हो।
- **सर्वोच्च न्यायालय की नजीर:** आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के नेशनल इंश्योरेंस बनाम माया देवी फैसले का उल्लेख किया, जिसमें तय हुआ था कि प्रीमियम भुगतान के बाद आंतरिक देरी के आधार पर कंपनी दायित्व से बच नहीं सकती। इसके अतिरिक्त, रिजेक्शन पत्र में समय का उल्लेख न होने से कंपनी का बाद का तर्क खारिज हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. जतिंदर कुमार की बोलेरो पिकअप कब और कहां से चोरी हुई थी?
गाड़ी 7 और 8 सितंबर 2021 की दरमियानी रात करीब 2 बजे जतिंदर कुमार के होशियारपुर स्थित घर के बाहर से चोरी हुई थी।

### 2. बीमा कंपनी ने शुरुआत में क्लेम क्यों खारिज किया था?
कंपनी ने 17 फरवरी 2022 को यह आरोप लगाते हुए क्लेम रिजेक्ट किया था कि ग्राहक ने घटना की तारीख और नुकसान की गलत जानकारी दी है।

### 3. अदालत में बीमा कंपनी ने क्या दलील दी थी?
कंपनी ने दलील दी कि चोरी 8 सितंबर की रात 2 बजे हुई जबकि पॉलिसी दोपहर 1:58 बजे शुरू हुई, इसलिए घटना के वक्त कवर प्रभावी नहीं था।

### 4. उपभोक्ता आयोग ने किस कानूनी नजीर के आधार पर फैसला सुनाया?
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के नेशनल इंश्योरेंस बनाम माया देवी फैसले की नजीर दी, जिसमें कहा गया कि प्रीमियम लेते ही पॉलिसी प्रभावी हो जाती है।

### 5. उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को क्या आदेश दिया?
आयोग ने कंपनी को ₹3.5 लाख का क्लेम 9 फीसदी ब्याज के साथ, ₹25,000 मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना और ₹10,000 अदालती खर्च 45 दिनों में देने का आदेश दिया।

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