पोल्ट्री फार्मिंग में आया 'बाहुबली पंखा', जानिए नीदरलैंड की तकनीक से 10 हजार मुर्गियों के शेड का पूरा बजट और बिजली बचत का गणित आधुनिक क्लोज्ड पोल्ट्री फार्म में तापमान और हवा का सही संतुलन बनाए रखने के लिए 1.5 HP की क्षमता वाले विशेष एक्जॉस्ट पंखों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। नीदरलैंड से आयातित यह उपकरण मुर्गियों की मृत्यु दर घटाने और बिजली खपत कम करने में मददगार साबित हो रहा है। मुर्गी पालन के व्यवसाय में मौसम की स्थिति और तापमान का उतार चढ़ाव मुर्गियों के स्वास्थ्य और उत्पादन पर गहरा असर डालता है। भारत में भीषण गर्मी के दौरान तापमान में बढ़ोतरी से मुर्गियों में तनाव और बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, जबकि कड़ाके की ठंड में उनके शरीर को सही गर्मी देना जरूरी होता है। इस मौसम संबंधी चुनौती से निपटने के लिए देश भर के मुर्गी पालक अब पारंपरिक शेड छोड़कर एन्वायरमेंट कंट्रोल तकनीक वाले बंद फार्म तैयार कर रहे हैं। इस आधुनिक प्रणाली में शेड के भीतर के तापमान, नमी और हवा के दबाव को नियंत्रित किया जाता है। इस पूरी व्यवस्था को कारगर बनाने में बड़े आकार के विशेष निकासी पंखों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, जिन्हें किसान अपनी भाषा में 'बाहुबली पंखा' कहकर पुकारते हैं। आधुनिक शेड में तापमान नियंत्रण की आवश्यकता पारंपरिक पोल्ट्री फार्मों में बाहरी मौसम का सीधा असर पक्षियों की सेहत पर पड़ता था। चूजों की उम्र के अनुसार उनके लिए अलग-अलग तापमान की आवश्यकता होती है। शुरुआती दिनों में अधिक गर्मी की जरूरत होती है, जबकि मुर्गियों के बड़े होने पर शेड का तापमान कम रखना पड़ता है। खुले फार्मों में इस संतुलन को बनाए रखना बेहद मुश्किल काम था, जिसके कारण गर्मी के दिनों में मुर्गियों की अचानक मौत से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता था। पर्यावरण नियंत्रित व्यवस्था यानी क्लोज्ड पोल्ट्री फार्म के जरिए अब मुर्गियों की उम्र के हिसाब से शेड के भीतर का माहौल पूरी तरह नियंत्रित किया जाता है। कैसे काम करता है 'बाहुबली पंखा' और कूलिंग सिस्टम? आधुनिक क्लोज्ड पोल्ट्री फार्म की बनावट इस तरह की जाती है कि हवा का प्रवाह एक ही दिशा में रहे। फार्म की दोनों तरफ पक्की दीवारें बनाई जाती हैं। शेड के एक सिरे पर ठंडक देने वाले विशेष पैड लगाए जाते हैं, जबकि दूसरे सिरे पर बड़े आकार के 'बाहुबली' एक्जॉस्ट पंखे स्थापित किए जाते हैं। जब यह भारी क्षमता वाला पंखा चलता है, तो वह शेड के अंदर की गर्म, नमी वाली और खराब हवा को तेजी से बाहर खींच लेता है। इससे शेड के अंदर एक तरह का वैक्यूम बनता है, जिसके कारण दूसरी तरफ लगे कूलिंग पैड से होकर ठंडी और ताजा हवा अंदर प्रवेश करती है। इस प्रकार पूरे फार्म में हवा का निरंतर बहाव बना रहता है और अंदर का तापमान बाहर की तुलना में काफी कम और सुखद हो जाता है। 10 पंखों का काम करेंगे 7 पंखे, होगी बिजली की बचत एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स से जुड़े विशेषज्ञ साहिल रजा के अनुसार, इस विशेष पंखे की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक हवा खींचने की क्षमता है। इसमें डेढ़ एचपी (1.5 HP) की शक्तिशाली मोटर लगाई गई है। पंखों की कार्यक्षमता का मूल्यांकन सीएफएम (Cubic Feet per Minute) पैमाने पर किया जाता है, जिससे यह पता चलता है कि पंखा प्रति मिनट कितनी घन फीट हवा बाहर निकाल सकता है। सामान्य पंखों की तुलना में इसकी हवा खींचने की शक्ति बहुत अधिक है। जहां एक बड़े शेड में आमतौर पर 10 सामान्य पंखों की जरूरत पड़ती थी, वहीं इस उच्च क्षमता वाले मॉडल के केवल 7 पंखे लगाकर ही वही काम लिया जा सकता है। पंखों की संख्या घटने से फार्म में बिजली का बिल कम आता है और बैकअप के लिए आवश्यक जनरेटर का आकार व ईंधन खपत भी काफी घट जाती है। नीदरलैंड से उपकरण आयात करने की वजह बाजार में उपलब्ध सामान्य पंखों और इस विशेष उपकरण के निर्माण में गुणवत्ता का बड़ा अंतर होता है। साहिल रजा ने बताया कि उनकी फर्म एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स इस खास बाहुबली पंखे को नीदरलैंड की प्रसिद्ध कंपनियों से सीधे आयात करती है। यूरोपीय तकनीक से बने इन पंखों के ब्लेड, मोटर और बॉडी की बनावट ऐसी होती है कि वे लगातार बिना रुके काम कर सकते हैं और भारतीय मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी सालों तक खराब नहीं होते। देशी या कम गुणवत्ता वाले पंखों के मुकाबले नीदरलैंड के बने उपकरण अधिक टिकाऊ और ऊर्जा कुशल साबित हो रहे हैं। 10 हजार मुर्गियों के क्लोज्ड फार्म का कुल बजट पर्यावरण नियंत्रित पोल्ट्री फार्म तैयार करने के आर्थिक पहलू पर बात करते हुए साहिल रजा ने बताया कि लगभग 10,000 मुर्गियों की क्षमता वाला आधुनिक क्लोज्ड फार्म स्थापित करने में कुल खर्च 25 से 30 लाख रुपये के बीच आता है। इस लागत में केवल पंखे या कूलिंग पैड ही शामिल नहीं हैं, बल्कि पक्का सिविल निर्माण कार्य, शेड का ढांचा, स्वचालित दाना-पानी देने की प्रणाली, विद्युत वायरिंग और ठंडी के मौसम के लिए आवश्यक गैस ब्रूडर का खर्च भी शामिल होता है। हालांकि शुरुआत में यह निवेश पारंपरिक फार्म की तुलना में अधिक लगता है, लेकिन मुर्गियों की शून्य मृत्यु दर, त्वरित वजन बढ़ोतरी और बेहतर एफसीआर के कारण किसान कुछ ही वर्षों में अपनी पूरी लागत वसूल कर लेते हैं। ठंड के मौसम में गैस ब्रूडर की भूमिका क्लोज्ड फार्म का मतलब केवल गर्मी में ठंडक देना नहीं है, बल्कि यह साल के 12 महीने काम करने वाली एक बहुआयामी व्यवस्था है। गर्मी के मौसम में जहां एक्जॉस्ट पंखे और कूलिंग पैड मिलकर तापमान को नीचे लाते हैं, वहीं सर्दियों के दिनों में शेड के भीतर गैस ब्रूडर चालू किए जाते हैं। गैस ब्रूडर से निकलने वाली गर्मी नवजात चूजों को ठंड से बचाती है और शेड में सही तापमान बनाए रखती है। इस तरह बाहर का मौसम चाहे कितना भी प्रतिकूल हो, फार्म के अंदर मुर्गियों के लिए अनुकूल वातावरण बना रहता है। बिहार के आरा जिले से प्राप्त कर सकते हैं तकनीकी जानकारी जो किसान भाई आधुनिक तकनीक से मुर्गी पालन की शुरुआत करना चाहते हैं या अपने पुराने शेड को क्लोज्ड फार्म में बदलना चाहते हैं, वे इसके लिए परामर्श ले सकते हैं। एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स कंपनी बिहार के आरा जिले में स्थित है। साहिल रजा के अनुसार, फार्म के डिजाइन, उपकरणों के चयन और स्थापना से संबंधित किसी भी सवाल के लिए किसान सीधे संपर्क नंबर 8789765545 पर फोन करके पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसका आप पर असर आधुनिक एन्वायरमेंट कंट्रोल पोल्ट्री तकनीक को अपनाने से किसानों के लिए मुर्गियों की मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना और बिजली के बिल में बड़ी बचत करना संभव हो गया है। • भारत भर में: देश भर के पोल्ट्री किसान गर्मी और ठंड के मौसम में होने वाले मुर्गियों के नुकसान से बच सकते हैं, जिससे उनका कुल उत्पादन बढ़ता है और बाजार में अंडे-चिकन की आपूर्ति व दाम स्थिर रहते हैं। • बिहार में: बिहार के आरा जिले की फर्म एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स से संपर्क (8789765545) करके स्थानीय किसान नीदरलैंड तकनीक वाले 1.5 HP के उच्च क्षमता वाले एक्जॉस्ट पंखे और 10 हजार क्षमता के शेड का पूरा सेटअप बनवा सकते हैं। • बिजली बिल पर असर: भारी सीएफएम क्षमता वाले पंखे लगने से जहां 10 पंखों की जरूरत थी वहां 7 से ही काम चल जाता है, जिससे मासिक बिजली खपत और जनरेटर के डीजल का खर्च घट जाता है। • शुरुआती लागत और रिटर्न: 10 हजार मुर्गियों के मॉडर्न शेड में 25 से 30 लाख रुपये का शुरुआती निवेश लगता है, लेकिन बेहतर एफसीआर और कम मृत्यु दर के कारण यह लागत 2 से 3 साल में वसूल हो जाती है। ऐसा क्यों हुआ भारत के विभिन्न राज्यों में अत्यधिक तापमान और पारंपरिक खुले पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की बड़े पैमाने पर होने वाली मौत की वजह से किसानों को नया आधुनिक विकल्प चुनना पड़ा है। • मौसम की अनिश्चितता: गर्मियों में 40 डिग्री से ऊपर तापमान जाने पर खुले शेड में मुर्गियां दम तोड़ने लगती हैं, जिसके कारण किसानों को लाखों रुपये का घाटा उठाना पड़ता था। • कमजोर वेंटिलेशन: साधारण पंखे शेड के भीतर जमा अमोनिया गैस और गर्म हवा को तेजी से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होते, जिससे पक्षी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आते थे। • उच्च क्षमता वाली तकनीक की जरूरत: 1.5 HP मोटर और उच्च CFM रेटिंग वाले 'बाहुबली' पंखे नीदरलैंड से इसलिए मंगाए गए ताकि वे लगातार बंद वातावरण में बिना खराब हुए भारी वायु प्रवाह पैदा कर सकें। सवाल-जवाब 1. पोल्ट्री फार्म में 'बाहुबली पंखा' किसे कहा जाता है? यह 1.5 HP मोटर वाला एक बड़े आकार का उच्च क्षमता वाला एक्जॉस्ट पंखा है, जो क्लोज्ड पोल्ट्री शेड से गर्म हवा को तेजी से बाहर निकालता है। 2. 10 हजार मुर्गियों के एन्वायरमेंट कंट्रोल फार्म की कुल लागत कितनी है? 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाले बंद शेड को पूरी तरह तैयार करने में सिविल वर्क और सभी उपकरणों समेत लगभग 25 से 30 लाख रुपये का खर्च आता है। 3. इस खास पंखे से बिजली की कितनी बचत होती है? इस पंखे की उच्च सीएफएम (CFM) क्षमता के कारण जहां 10 साधारण पंखों की आवश्यकता होती थी, वहां केवल 7 पंखों से ही काम चल जाता है, जिससे बिजली और जनरेटर का खर्च कम होता है। 4. यह उपकरण किस देश से मंगाया जा रहा है? उच्च गुणवत्ता और स्थायित्व के लिए इस विशेष बाहुबली पंखे को नीदरलैंड से आयात किया जा रहा है। 5. बिहार में पोल्ट्री फार्म उपकरण के लिए किससे संपर्क करें? बिहार के आरा जिले में स्थित एसएस पोल्ट्री इक्विपमेंट्स के प्रतिनिधि साहिल रजा से मोबाइल नंबर 8789765545 पर संपर्क कर जानकारी ली जा सकती है। 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