# मुर्गियों के दाने के कारोबार से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, सरकार दे रही है 35 प्रतिशत तक सब्सिडी

> उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए पोल्ट्री फीड का कारोबार कमाई का नया जरिया बन रहा है। इस योजना के तहत सरकार 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है, जिससे किसान घर पर ही दाना तैयार कर अपनी लागत कम कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/poultry-feed-business-can-boost-farmers-income-with-up-to-35-percent-government-subsidy-17911 · **Language:** Hindi
**Tags:** पोल्ट्री फीड, किसानों की आय, कृषि व्यवसाय, सरकारी सब्सिडी, मुरादाबाद समाचार, पोल्ट्री फार्मिंग

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए खेती के अलावा कमाई के नए और आधुनिक रास्ते तेजी से खुल रहे हैं। अब किसान भाई पोल्ट्री फीड यानी मुर्गियों के दाने का व्यवसाय अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। देश और प्रदेश में पोल्ट्री फार्मों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिसके चलते बाजार में मुर्गियों के चारे की मांग हमेशा बनी रहती है। शुरुआत करने के लिए किसान चाहें तो तैयार फीड की खरीद-बिक्री के जरिए इस क्षेत्र में कदम रख सकते हैं और अनुभव होने के बाद अपनी खुद की छोटी फीड निर्माण इकाई भी लगा सकते हैं। मुरादाबाद क्षेत्र में यह व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।

## सरकारी सब्सिडी और क्षेत्र में चल रही इकाइयां
उद्यान विभाग में डीआरपी के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे विमल कुमार तोमर ने इस व्यवसाय की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने जानकारी दी कि उनके कार्यक्षेत्र में पहले से ही कई पोल्ट्री फीड यूनिट्स सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी योजना का हिस्सा बन सकें और अपनी आय में इजाफा कर सके। वर्तमान समय में इस क्षेत्र में लगभग पांच पोल्ट्री फीड इकाइयां पूरी तरह से सक्रिय हैं और सुचारू रूप से चल रही हैं।

## दाना तैयार करने में लगने वाला कच्चा माल
एक बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाला पोल्ट्री फीड तैयार करने के लिए कई तरह के कच्चे माल की आवश्यकता पड़ती है। इसमें मुख्य रूप से मक्का, सोयाबीन, गेहूं, चोकर, डीओआरबी, मिनरल मिक्सचर और विभिन्न प्रकार के विटामिन जैसे जरूरी पोषक तत्व शामिल होते हैं। इन सभी सामग्रियों को एक निश्चित और सही अनुपात में मिलाया जाता है, जिसके बाद ही मुर्गियों के लिए एक संतुलित और पौष्टिक आहार तैयार होता है। जो किसान पहले से ही पोल्ट्री फार्म का संचालन कर रहे हैं, उन्हें अपने मुर्गियों के लिए हर दिन इस फीड की निरंतर जरूरत पड़ती है।

## लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने का गणित
यदि पोल्ट्री फीड को खुले बाजार या बाहर की बड़ी कंपनियों से खरीदा जाता है, तो उसमें भारी भरकम भाड़ा और परिवहन खर्च जुड़ जाता है। इस वजह से किसानों को दाना काफी महंगा पड़ता है, जिसका सीधा असर उनकी मेहनत और मुनाफे पर पड़ता है। इसी बड़ी समस्या का समाधान निकालते हुए किसान अब अपने स्तर पर ही अपने फार्म के लिए दाना तैयार कर सकते हैं। खुद फीड बनाने से किसानों को दोतरफा फायदा मिलता है। एक तरफ जहां उन्हें समय पर एकदम ताजा और शुद्ध फीड मिल जाती है, वहीं दूसरी तरफ उनके उत्पादन खर्च में भारी कमी आती है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के इस उद्देश्य के तहत सरकार इस पूरी परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** पोल्ट्री फार्म चलाने वाले देश भर के किसानों को अपनी उत्पादन लागत घटाने और पशुपालन से अधिक मुनाफा कमाने का नया विकल्प मिलेगा।,**उत्तर प्रदेश में:** मुरादाबाद और आसपास के जिलों के किसानों को 35 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ उठाकर खुद की फीड यूनिट लगाने और आत्मनिर्भर बनने का सीधा मौका मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पोल्ट्री फीड तैयार करने के लिए मुख्य रूप से किन चीजों की आवश्यकता होती है?
पोल्ट्री फीड बनाने के लिए मक्का, सोयाबीन, गेहूं, चोकर, डीओआरबी, मिनरल मिक्सचर और विभिन्न विटामिनों का उपयोग किया जाता है।

### 2. इस व्यवसाय के लिए सरकार द्वारा कितनी सब्सिडी दी जा रही है?
सरकार इस योजना के तहत कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान कर रही है।

### 3. खुद पोल्ट्री फीड तैयार करने से किसानों को क्या फायदा मिलता है?
खुद फीड बनाने से परिवहन खर्च बचता है, समय पर ताजा दाना मिलता है और उत्पादन लागत कम होने से मुनाफा बढ़ता है।

### 4. वर्तमान में मुरादाबाद क्षेत्र में कितनी पोल्ट्री फीड इकाइयां सक्रिय हैं?
उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग पांच पोल्ट्री फीड इकाइयां पूरी तरह सक्रिय रूप से चल रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
स्थानीय संसाधनों और कच्चे माल जैसे मक्का और सोयाबीन का सही अनुपात में उपयोग करके अपने उत्पादन खर्च को काफी हद तक कम किया जा सकता है।,बाहरी ट्रांसपोर्ट और भाड़े के खर्च से बचने के लिए व्यवसाय के जरूरी घटकों को खुद तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।,सरकार द्वारा दी जाने वाली योजनाओं और सब्सिडी का पूरा लाभ उठाकर अपने छोटे व्यवसाय को बड़े पैमाने पर स्थापित करें।

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