पुश्तैनी हुनर को चमकाने का मौका, सरकार दे रही है 10 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद पारंपरिक और आधुनिक कामों से जुड़े कारीगरों को सरकार की तरफ से स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दस लाख रुपये तक का कर्ज दिया जा रहा है। पारंपरिक कला और हुनर से जुड़े लोगों को खुद का कारोबार शुरू करने के लिए सरकार की ओर से बड़ी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे हुनरमंद लोग जो सरकारी योजनाओं के तहत अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं, वे अपना काम जमाने के लिए दस लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। इस पहल का मुख्य मकसद पुश्तैनी कामगारों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना और उनके कारोबार को नए मुकाम पर पहुंचाना है। ट्रेनिंग पूरी करने वालों को मिलेगा लाभ आजमगढ़ के सहायक आयुक्त उद्योग जितेंद्र यादव के मुताबिक, जो लोग विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना या पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत अपनी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं और जिनके पास प्रमाण पत्र है, वे इस ऋण के हकदार हैं। यह आर्थिक मदद उन्हें अपना खुद का उद्योग या दुकान स्थापित करने में मदद करती है, जिससे वे पारंपरिक कार्यों को आधुनिक स्तर पर आगे बढ़ा सकें। सब्सिडी और ब्याज में राहत का प्रावधान इस वित्तीय सहायता योजना के तहत लाभार्थियों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। उत्तर प्रदेश की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को दस लाख रुपये तक की ऋण राशि मुहैया कराई जाती है। इसके अलावा परियोजना की लागत पर पंद्रह प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सब्सिडी भी दी जाती है। ऋण पर लगने वाले ब्याज और गारंटी से जुड़ी शर्तों में भी विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। पारंपरिक और आधुनिक ट्रेडों को किया गया है शामिल इस योजना के दायरे में सिर्फ पुराने पारंपरिक काम ही नहीं बल्कि कई नए तकनीकी कार्य भी जोड़े गए हैं। पारंपरिक कामगारों में लोहार, कुम्हार, बढ़ई, दर्जी, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, मोची और टोकरी बनाने वाले कारीगर शामिल हैं। इसके साथ ही योजना के नए संस्करण में मोबाइल रिपेयरिंग, प्लंबर, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर रिपेयरिंग जैसे आधुनिक तकनीकी कामों को भी जगह दी गई है ताकि युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकें। इतना देना होगा खुद का अंशदान ऋण प्राप्त करने वाले लाभार्थी को कुल परियोजना लागत का एक निश्चित हिस्सा खुद वहन करना होता है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को कुल लागत का दस प्रतिशत हिस्सा जमा करना पड़ता है। वहीं अन्य श्रेणियों के लोगों के लिए यह अंशदान पांच प्रतिशत रखा गया है, जिसमें महिलाएं, थर्ड जेंडर, दिव्यांगजन और पूर्व सैनिक शामिल हैं। जरूरी दस्तावेजों की सूची इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ अहम कागजातों की जरूरत होती है। इनमें मुख्य रूप से आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर, जाति प्रमाण पत्र, जन्मतिथि या शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र, शपथ पत्र और ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र शामिल हैं। इसके अलावा कारोबार का खाका तैयार करने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी जरूरी होती है। हालांकि दस्तावेजों की सटीक और अंतिम सूची के लिए संबंधित उद्योग विभाग से संपर्क करना बेहतर रहता है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर तय होगी ऋण प्रक्रिया कारोबार की योजना यानी प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर ही ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। यदि परियोजना की लागत दस लाख रुपये से कम है तो कंप्यूटर के जरिए भी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा सकती है। वहीं बड़े बजट की परियोजनाओं के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए या विषय विशेषज्ञ की मदद लेनी पड़ सकती है। ऋण का पास होना बैंक और संबंधित विभाग के नियमों और प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। इसका आप पर असर यह योजना पारंपरिक और आधुनिक कारीगरों के लिए अपना खुद का कारोबार शुरू करने का एक बड़ा अवसर लेकर आई है। • वित्तीय सहायता: पात्र कारीगरों को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए दस लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है। इससे उन्हें पैसों की कमी के बिना काम शुरू करने में मदद मिलती है। • सब्सिडी का लाभ: परियोजना की कुल लागत पर पंद्रह प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे कर्ज का बोझ कम होता है। • ब्याज में छूट: ऋण पर लगने वाले ब्याज और गारंटी की शर्तों में विशेष छूट दी जाती है, जिससे छोटे कामगारों के लिए कर्ज चुकाना आसान हो जाता है। • विस्तृत दायरा: इसमें लोहार और बढ़ई जैसे पारंपरिक कामों के साथ मोबाइल और कंप्यूटर रिपेयरिंग जैसे आधुनिक ट्रेड भी शामिल किए गए हैं। • विभिन्न श्रेणियां: महिलाओं, दिव्यांगजनों और अन्य आरक्षित वर्गों के लिए खुद का अंशदान केवल पांच प्रतिशत रखा गया है। ऐसा क्यों हुआ सरकार ने देश के पारंपरिक कारीगरों और आधुनिक तकनीकी कामगारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। इस पहल के पीछे का मुख्य कारण हुनरमंद लोगों को वित्तीय बाधाओं से उबारकर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। • पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा: देश की पारंपरिक कलाओं और पुश्तैनी पेशों को जीवित रखने और उन्हें आधुनिक समय के अनुकूल बनाने के लिए यह वित्तीय सहायता दी जाती है। • बेरोजगारी में कमी: स्थानीय स्तर पर युवाओं और कामगारों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के वास्ते इस योजना का दायरा बढ़ाया गया है। • आर्थिक समावेशिता: समाज के पिछड़े वर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नियमों में विशेष रियायतें दी गई हैं। सवाल-जवाब 1. इस योजना के तहत अधिकतम कितना ऋण मिल सकता है? पात्र लाभार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की ऋण सहायता मिल सकती है। 2. ऋण पर कितनी मार्जिन मनी सब्सिडी दी जाती है? परियोजना लागत पर 15 प्रतिशत की मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। 3. इस योजना में कौन-कौन से नए ट्रेड जोड़े गए हैं? नई योजना 2.0 में मोबाइल रिपेयरिंग, प्लंबर, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर रिपेयरिंग जैसे आधुनिक काम जोड़े गए हैं। 4. सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को कितना अंशदान देना होगा? सामान्य वर्ग के पुरुष लाभार्थियों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा खुद जमा करना होगा। 5. आवेदन के लिए कौन-से मुख्य दस्तावेज जरूरी हैं? आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, मोबाइल नंबर, जाति प्रमाण पत्र और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। https://trendkia.com/business/pushtaini-hunara-ko-chamakane-ka-mauka-sarakara-de-rahi-hai-10-lakha-rupaye-taka-ki-vittiya-madada-58099 TrendKia — Har trend, sabse pehle.