राजस्थान: 70 साल के सोनाराम यादव ने पॉलीहाउस से खीरे की खेती में कमाई का नया फॉर्मूला खोजा जयपुर के 70 वर्षीय किसान सोनाराम यादव ने पॉलीहाउस और जैविक खेती के जरिए कम लागत में लाखों का मुनाफा कमाने का बेहतरीन मॉडल पेश किया है। जयपुर के किशनगढ़ रेनवाल क्षेत्र के रहने वाले 70 वर्षीय किसान सोनाराम यादव ने कृषि के क्षेत्र में एक नया और सफल उदाहरण पेश किया है। उन्होंने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जैविक पद्धतियों का अनूठा मेल करते हुए खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। सोनाराम पॉलीहाउस के माध्यम से खेती करते हैं और अपनी पारम्परिक खेती में भी किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करते हैं। करीब तीन साल पहले उन्होंने लगभग 4048 वर्गमीटर के क्षेत्रफल में पॉलीहाउस स्थापित किया और जैविक तरीके से खीरे की खेती की शुरुआत की। आज उनका यह खेत आसपास के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है। घर पर तैयार किए जाते हैं जैविक घोल और सूक्ष्मजीव फसल की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोनाराम अपने घर पर ही लगभग 15 तरह के कृषि जैविक जीवों और सूक्ष्मजीवों के विशेष घोल तैयार करते हैं। इन घोलों का इस्तेमाल फसलों पर छिड़काव करने के साथ-साथ मिट्टी के प्राकृतिक जैविक चक्र को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। उनका साफ कहना है कि वे खेती में यूरिया या किसी भी अन्य केमिकल खाद और कीटनाशक का उपयोग नहीं करते हैं। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बनाए रखने के लिए वे केंचुआ खाद, वर्मीवॉश, डीकंपोजर और जैविक एनपीके का प्रयोग करते हैं। इसके अलावा फसलों को फफूंद और कीटों से बचाने के लिए वे ट्राइकोडर्मा, ब्युवेरिया बेसियाना, स्यूडोमोनास, माइकोराइजा और पिकोनिया जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग करते हैं। खारे पानी की चुनौती से ऐसे पार पाए सोनाराम सोनाराम के सामने सबसे बड़ी बाधा उनके खेत के पानी का खारा होना था। हालांकि, उन्होंने इस गंभीर समस्या को कभी भी अपनी खेती की राह में रुकावट नहीं बनने दिया। जल संकट से निपटने के लिए उन्होंने अपने खेत में तीन फार्म पौंड का निर्माण करवाया है, जिनमें बारिश के मीठे पानी को बड़े पैमाने पर संरक्षित किया जाता है। इनमें से केवल दो फार्म पौंड का पानी ही पूरे सालभर पॉलीहाउस की सिंचाई के लिए पर्याप्त साबित होता है। पौधों तक पानी पहुंचाने के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे पानी की एक-एक बूंद का सदुपयोग होता है और बर्बादी बिल्कुल नहीं होती है। लागत से कई गुना ज्यादा होती है शानदार कमाई वैज्ञानिक प्रबंधन और जैविक खेती के दम पर सोनाराम महज 90 दिनों के भीतर लगभग 40 टन तक खीरे का बंपर उत्पादन हासिल कर लेते हैं। उनकी एक फसल को तैयार करने में कुल लागत करीब 1.20 लाख रुपए आती है, जबकि बाजार में अच्छी कीमत मिलने पर उन्हें इससे लगभग 13.50 से 15 लाख रुपए तक की शानदार आय प्राप्त होती है। साल भर में दो फसलें लेकर वे अकेले खीरे की खेती से करीब 20 से 30 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे हैं। इस तरह वे बेहद कम लागत में बेहतरीन आर्थिक मुनाफा कमा रहे हैं। डेयरी फार्मिंग से मजबूत होता है खेती का चक्र जैविक खेती के इस मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सोनाराम ने इसके साथ डेयरी फार्मिंग को भी जोड़ा हुआ है। उनके पास वर्तमान में 10 राठी नस्ल की देसी गायें और पांच भैंसें मौजूद हैं। इन पशुओं से मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल पूरी तरह से जैविक खाद तैयार करने में किया जाता है। इससे बाहर से खाद या अन्य कृषि इनपुट खरीदने का खर्च काफी हद तक कम हो जाता है और खेत का जैविक चक्र भी सुदृढ़ होता है। इसके अलावा पशुओं के दूध की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है। कृषि वैज्ञानिकों के बहुमूल्य मार्गदर्शन और अपने लंबे अनुभवों के बल पर सोनाराम ने खारे पानी जैसी बड़ी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलकर रख दिया है। इसका आप पर असर भारत में: यह मॉडल देश भर के किसानों को कम लागत में आधुनिक पॉलीहाउस तकनीक और जैविक खेती अपनाकर अपनी आय कई गुना बढ़ाने की प्रेरणा देता है। जयपुर में: स्थानीय किसानों और खासकर खारे पानी की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों के कृषकों के लिए यह जल संरक्षण और फसल प्रबंधन का एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है। सवाल-जवाब 1. सोनाराम यादव कौन हैं और वे कहाँ खेती करते हैं? सोनाराम यादव 70 वर्ष के एक प्रगतिशील किसान हैं जो राजस्थान के जयपुर जिले के किशनगढ़ रेनवाल क्षेत्र में खेती करते हैं। 2. वे पॉलीहाउस में मुख्य रूप से किस फसल की खेती करते हैं? सोनाराम पॉलीहाउस के भीतर बड़े पैमाने पर जैविक तरीके से खीरे की खेती करते हैं। 3. खीरे की एक फसल से उन्हें कितनी आमदनी हो जाती है? लगभग 1.20 लाख रुपए की लागत वाली एक फसल से उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलने पर करीब 13.50 से 15 लाख रुपए तक की आय हो जाती है। 4. खारे पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने क्या उपाय किया है? खारे पानी की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने खेत में तीन फार्म पौंड बनवाए हैं जिनमें बारिश का पानी संरक्षित किया जाता है। 5. खेती में जैविक चक्र को मजबूत करने के लिए वे क्या करते हैं? वे खेती के साथ डेयरी फार्मिंग भी करते हैं और पशुओं के गोबर व गोमूत्र का उपयोग जैविक खाद तैयार करने में करते हैं। प्रेरणा और सबक सफलता और प्रेरणा के मुख्य सबक: • चुनौती को अवसर बनाना: खारे पानी की गंभीर समस्या को रोड़ा बनने देने के बजाय फार्म पौंड बनाकर जल संरक्षण का सफल विकल्प तैयार किया। • लागत कम करना: घर पर ही जैविक घोल तैयार करने और डेयरी फार्मिंग को जोड़ने से बाहर से महंगे इनपुट खरीदने का खर्च शून्य हो गया। • आधुनिक तकनीक अपनाना: पारंपरिक खेती के साथ पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल कर बंपर पैदावार हासिल की। • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और अपने वर्षों के अनुभव का तालमेल बिठाकर कृषि को एक सफल एग्री-बिजनेस हब बनाया। https://trendkia.com/business/rajasthan-70-saal-ke-sonaram-yadav-ne-polyhouse-se-kheere-ki-kheti-mein-kamai-ka-naya-formula-khoja-21508 TrendKia — Har trend, sabse pehle.