# राजस्थान में आम की वैज्ञानिक खेती से होगी बंपर पैदावार, कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह ने बताए मिट्टी और सिंचाई के उपाय

> राजस्थान में मानसून के दौरान आम का नया बाग लगाना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के अनुसार सही मिट्टी, ड्रिप सिंचाई और संतुलित खाद प्रबंधन से प्रति हेक्टेयर 20 टन तक उत्पादन लिया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/rajasthan-men-ama-ki-vaijnanika-kheti-se-hogi-bnpara-paidavara-krishi-visheshajna-bajrang-singh-ne-batae-mitti-aura-sinchai-ke-upa-16996 · **Language:** Hindi
**Tags:** आम की खेती, बागवानी, ड्रिप सिंचाई, कृषि तकनीक, राजस्थान कृषि, किसान आय

उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में आम की बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहद मजबूत माध्यम बन चुकी है। विशेष रूप से राजस्थान जैसे क्षेत्रों में, जहाँ वर्षा की अनिश्चितता और सीमित जल संसाधन चुनौतियाँ पैदा करते हैं, सही समय पर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर आम के बाग से भारी मुनाफा कमाया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह के अनुसार जून से सितंबर के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश आम के नए बगीचे स्थापित करने के लिए सबसे उपयुक्त समय मानी जाती है। हालांकि, पौध रोपण के बाद फल और फूल आने की पूरी प्रक्रिया में मौसम का साफ रहना बेहद अनिवार्य है। आम के पौधों की अच्छी वानस्पतिक वृद्धि और स्वस्थ विकास के लिए 24 से 28 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे आदर्श माना जाता है।

 

## रोपाई की सही विधि और मिट्टी का चुनाव

आम का नया बगीचा लगाने से पहले भूमि का चयन और मिट्टी की गुणवत्ता जांचना सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है। आम की फसल के लिए जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे सर्वोत्तम होती है। इस प्रकार की हल्की दोमट मिट्टी में पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं और फसल का विकास तेजी से होता है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के मध्य होना चाहिए, जो पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए अनुकूल रहता है। ध्यान रहे कि खेत में जलभराव की स्थिति बिल्कुल न बने, क्योंकि जड़ों के पास पानी जमा रहने से जड़ गलन की समस्या होती है और पौधा नष्ट हो सकता है। इसलिए बगीचे की स्थापना हमेशा ढलानयुक्त या अच्छे जल निकास वाली जमीन पर ही की जानी चाहिए।

पौध रोपण से लगभग एक महीना पूर्व खेत में 1×1×1 मीटर आकार के गड्ढे खोदकर खुले छोड़ देने चाहिए ताकि धूप से हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाएं। आम के सामान्य बगीचे में एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 10×10 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। लेकिन यदि किसान आम्रपाली जैसी सघन किस्म की खेती कर रहे हैं, तो सघन बागवानी के अंतर्गत 5×5 मीटर की दूरी का नियम अपनाना चाहिए। गड्ढों को भरने के लिए प्रति गड्ढा 25 किलोग्राम गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद और 1 किलोग्राम सुपर फॉस्फेट को उपजाऊ मिट्टी के साथ मिलाकर गड्ढे को जमीन की सतह से थोड़ा ऊपर तक भर देना चाहिए।

 

## जलवायु के आधार पर आम की प्रमुख किस्मों का चयन

किसान अपनी स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुरूप उपयुक्त किस्मों का चयन कर सकते हैं। पकाने की अवधि के आधार पर किस्मों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। अगेती किस्मों में बॉम्बे ग्रीन, तोतापुरी और केशर सबसे लोकप्रिय और उपयुक्त मानी जाती हैं। मध्यम समय में पकने वाली किस्मों में लंगड़ा, दशहरी, मल्लिका और आम्रपाली शामिल हैं, जिनकी बाजार में हमेशा उच्च मांग रहती है। वहीं पछेती किस्मों में चौसा और फजली प्रमुख हैं, जो सीजन के अंत में अच्छा मुनाफा देती हैं।

इन पारंपरिक किस्मों के अतिरिक्त, राजस्थान की विशेष जलवायु परिस्थितियों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित कई उन्नत किस्में भी बहुत सफल सिद्ध हुई हैं। इनमें पूसा अरुणिमा, पूसा सूर्या, पूसा लालिमा, पूसा श्रेष्ठा, पूसा प्रतिभा और पूसा पीतांबर शामिल हैं। साथ ही दशहरी-51, अंबिका और अरुणिका जैसी आधुनिक संकर किस्में भी व्यावसायिक दृष्टि से अत्यधिक लाभदायक पाई गई हैं।

 

## उर्वरक प्रबंधन और पोषण की विस्तृत योजना

आम के पौधों की बढ़ती उम्र के साथ उनकी खाद और पोषक तत्वों की खुराक में वार्षिक वृद्धि की जानी चाहिए। रोपण के पहले वर्ष में प्रति पौधा 15 किलोग्राम सड़ी गोबर की खाद देनी चाहिए, जिसे प्रतिवर्ष बढ़ाते हुए पाँचवें वर्ष तक 75 किलोग्राम प्रति पौधा कर देना चाहिए। इसी प्रकार रासायनिक उर्वरकों में सुपर फॉस्फेट की मात्रा पहले साल 250 ग्राम से शुरू करके पाँचवें वर्ष में 1 किलोग्राम प्रति पौधा तक बढ़ाई जाती है।

नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए यूरिया का उपयोग भी इसी क्रम में बढ़ाया जाता है। पहले वर्ष में 250 ग्राम यूरिया दिया जाता है, जिसे पाँचवें वर्ष तक बढ़ाकर 1.25 किलोग्राम प्रति पौधा कर दिया जाता है। यूरिया की कुल निर्धारित खुराक को दो समान भागों में बाँटकर देना चाहिए। आधी मात्रा मार्च के महीने में फल बनने की शुरुआत के समय दें, जबकि बची हुई आधी मात्रा जून में मानसून आने के समय मिट्टी में मिलाएँ। यदि पत्तियों में जस्ते की कमी के लक्षण दिखाई दें, तो 0.3 प्रतिशत जिंक सल्फेट के घोल का पर्णीय छिड़काव करना चाहिए।

 

## सिंचाई तकनीक, कीट नियंत्रण और अनुमानित पैदावार

जल संरक्षण और पौधों को नियमित नमी प्रदान करने के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति सबसे प्रभावी मानी जाती है। मानसूनी बारिश के महीनों को छोड़कर, गर्मियों के दिनों में सप्ताह में एक बार और सर्दियों में लगभग 15 दिनों के अंतराल पर ड्रिप द्वारा सिंचाई करनी चाहिए। ड्रिप प्रणाली से पानी सीधा जड़ों के पास पहुँचता है, जिससे पानी की बर्बादी रुकती है और पौधों का विकास संतुलित रहता है। यदि मिट्टी, खाद और पानी का सही प्रबंधन किया जाए तो किसान प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक का बंपर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

बाग में कीटों और रोगों के प्रकोप से बचाव के लिए सतत निगरानी आवश्यक है। आम के वृक्षों में मिली बग और फुदका कीट भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसके अलावा चूर्णी फफूंद रोग के लक्षण दिखाई देने पर घुलनशील गंधक का तुरंत छिड़काव करना चाहिए। यदि तने में छाल भक्षक कीट का प्रकोप हो, तो कीट द्वारा बनाई गई सुरंगों में कीटनाशक दवा डालकर उन्हें पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** किसान ड्रिप सिंचाई और संतुलित खाद प्रबंधन को अपनाकर पानी की भारी बचत के साथ प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक आम की पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

**राजस्थान में:** राज्य की शुष्क और उपोष्ण जलवायु के अनुकूल पूसा और उन्नत संकर किस्मों का चयन करके किसान कम पानी में भी अपनी बागवानी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. आम का नया बगीचा लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?
जून से सितंबर के दौरान मानसूनी बारिश का समय आम के पौधों के रोपण के लिए सबसे आदर्श माना जाता है।

### 2. आम की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी और पीएच मान बेहतर रहता है?
अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी आम के लिए सबसे अच्छी होती है, जिसका पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

### 3. आम के पौधों की रोपाई के दौरान कितनी दूरी रखनी चाहिए?
सामान्य बागवानी में पौधों के बीच 10×10 मीटर की दूरी रखी जाती है, जबकि आम्रपाली जैसी सघन किस्मों में 5×5 मीटर की दूरी रखी जाती है।

### 4. राजस्थान की जलवायु के लिए कौन सी प्रमुख किस्में उपयुक्त हैं?
राजस्थान के लिए पूसा अरुणिमा, पूसा सूर्या, पूसा लालिमा, पूसा श्रेष्ठा, पूसा प्रतिभा, पूसा पीतांबर, दशहरी-51, अंबिका और अरुणिका जैसी किस्मों की सिफारिश की जाती है।

### 5. आम के बाग में सिंचाई किस अंतराल पर करनी चाहिए?
बारिश के मौसम को छोड़कर, ड्रिप सिंचाई द्वारा गर्मियों में सप्ताह में एक बार और सर्दियों में हर 15 दिन में पानी देना चाहिए।

### 6. वैज्ञानिक प्रबंधन से प्रति हेक्टेयर कितना आम का उत्पादन मिल सकता है?
उचित पोषण, सिंचाई और कीट प्रबंधन के साथ किसान प्रति हेक्टेयर 15 से 20 टन तक आम का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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