राजस्थान में पशुपालकों को 400 चूजे और क्रेडिट कार्ड लोन दे रही सरकार, जानिए आवेदन का तरीका खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन का दायरा बढ़ रहा है। राजस्थान सरकार राज किसान पोर्टल के जरिए पशुपालकों को चूजे, प्रशिक्षण और कार्यशील पूंजी के लिए लोन सुविधा प्रदान कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिए पशुपालन और पोल्ट्री व्यवसाय एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रहे हैं। कम भूमि और अपेक्षाकृत कम शुरुआती लागत की वजह से छोटे व सीमांत किसानों के लिए मुर्गी पालन एक बेहद व्यावहारिक और लाभदायक विकल्प माना जाता है। हालांकि, इस व्यवसाय से प्राप्त होने वाला वास्तविक मुनाफा उत्पादन मॉडल, मुर्गियों की नस्ल, संतुलित आहार, स्वास्थ्य देखभाल और स्थानीय बाजार में मिलने वाले दामों पर सीधे तौर पर निर्भर करता है। सही दिशा में योजना बनाकर शुरुआत करने पर ग्रामीण किसान इसे छोटे स्तर से चालू करके धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर विकसित कर सकते हैं। सरकारी योजना और 400 चूजों का प्रावधान राजस्थान सरकार ग्रामीण परिवारों में मुर्गी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कुक्कुट विकास कार्यक्रम संचालित कर रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित लाभार्थी को दो अलग-अलग चरणों में कुल 400 एलआईटी (लो इनपुट टेक्नोलॉजी) पक्षियों के चूजे उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। योजना के पहले चरण में लाभार्थी को 200 चूजे दिए जाते हैं। इन चूजों में नर और मादा का अनुपात 50:50 रखा जाता है। इसके बाद दूसरे चरण के 200 चूजों का वितरण 18 महीने की लंबी अवधि बीतने के बाद किया जाता है। इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को शुरुआती स्तर पर बिना किसी बड़े वित्तीय जोखिम के मुर्गी पालन स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है। उत्पादन मॉडल और स्वास्थ्य प्रबंधन का ध्यान पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने से पहले किसानों के लिए अपने नजदीकी क्षेत्र में बाजार की मांग का सटीक आकलन करना बहुत आवश्यक होता है। मांग के अनुसार ही अंडा उत्पादन (लेयर मॉडल) या मांस उत्पादन (ब्रॉयलर मॉडल) के ढांचे का चयन किया जाना चाहिए। फार्म में मुर्गियों के लिए साफ-सुथरा और पर्याप्त हवादार शेड होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, संतुलित पोषण और समय पर टीका देना अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीमारियों के संक्रमण से बचाव और पक्षियों की मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर रखने के लिए पशु चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों से नियमित सलाह लेना लाभदायक साबित होता है। कौशल विकास और किसान क्रेडिट कार्ड से लोन राज्य में सरकारी सहायता केवल चूजों के मुफ्त वितरण तक ही सीमित नहीं है। राज्य के राज किसान पोर्टल पर पशुपालन विभाग के तहत कई जनकल्याणकारी योजनाएं सूचीबद्ध हैं। इनमें मुर्गीपालन कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं विस्तार योजना शामिल हैं, जिनके माध्यम से किसानों को आधुनिक पोल्ट्री तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, आवर्ती लागत और दैनिक परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए पशुपालकों व पोल्ट्री किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से जोड़ा गया है। इसके जरिए किसानों को दाना और दवाइयों जैसी कार्यशील पूंजी के लिए अल्पकालीन ऋण आसानी से उपलब्ध कराया जाता है। क्लस्टर आधारित विकास और आवेदन की प्रक्रिया राजस्थान सरकार के कुक्कुट विकास कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में लघु व सीमांत किसानों के भीतर उद्यमिता की भावना जगाना और उनकी वार्षिक आय में वृद्धि करना है। राज्य के चयनित जिलों में ग्रामीण परिवारों के समूह बनाकर यानी क्लस्टर स्तर पर पोल्ट्री विकास का कार्य संपादित किया जाता है। योजना में लाभार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले एलआईटी पक्षी प्रदान करने के लिए मदर यूनिट की व्यवस्था की गई है। भीलवाड़ा सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों के ग्रामीण किसान खेती के साथ इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इच्छुक आवेदक वर्तमान पात्रता, जिलावार उपलब्ध सुविधाओं और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी के लिए राज किसान साथी पोर्टल पर जा सकते हैं अथवा अपने नजदीकी पशुपालन विभाग कार्यालय से संपर्क करके ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। इसका आप पर असर यह योजना ग्रामीण पशुपालकों और छोटे किसानों को बिना किसी भारी वित्तीय दबाव के नियमित अतिरिक्त आय अर्जित करने का सीधा अवसर प्रदान करती है। • भारत भर के पशुपालकों के लिए: कृषि से इतर आय के स्रोतों को मजबूत करने और किसान क्रेडिट कार्ड से कार्यशील पूंजी प्राप्त करने का एक सफल मॉडल प्रस्तुत होता है। • राजस्थान में ग्रामीण परिवारों के लिए: भीलवाड़ा और अन्य जिलों के चयनित लाभार्थियों को 400 एलआईटी चूजों का मुफ़्त आवंटन और तकनीकी प्रशिक्षण मिलता है। • लघु एवं सीमांत किसानों के लिए: कम जमीन और सीमित बजट में पोल्ट्री फार्म स्थापित करके हर महीने स्थिर वित्तीय सहायता जुटाई जा सकती है। • कार्यशील पूंजी प्रबंधन: दाना, दवा और रखरखाव के दैनिक खर्चों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से रियायती अल्पकालीन लोन की सुविधा मिलती है। सवाल-जवाब 1. राजस्थान मुर्गी पालन योजना के तहत कितने चूजे दिए जाते हैं? योजना के तहत कुल 400 एलआईटी चूजे दिए जाते हैं, जो 200-200 के दो बैचों में 18 महीने के अंतराल पर वितरित होते हैं। 2. क्या मुर्गी पालन के खर्चों के लिए लोन सुविधा उपलब्ध है? हाँ, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से दाना और रखरखाव जैसी आवर्ती लागतों के लिए अल्पकालीन कार्यशील पूंजी लोन दिया जाता है। 3. मुर्गी पालन योजना के लिए आवेदन कहाँ करना होगा? पात्र किसान राज किसान पोर्टल या राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं अथवा स्थानीय पशुपालन कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। 4. पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? बाजार की मांग के अनुसार अंडा या मांस उत्पादन मॉडल चुनना, हवादार शेड बनाना, संतुलित आहार देना और नियमित टीकाकरण कराना जरूरी है। https://trendkia.com/business/rajasthan-men-pashupalakon-ko-400-chuje-aura-kredita-karda-lona-de-rahi-sarakara-janie-avedana-ka-tarika-22905 TrendKia — Har trend, sabse pehle.