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  "title": "राजस्थान ने रची इतिहास, इंटरनेशनल सोलर अलायंस संग करार कर सौर ऊर्जा में बनी दुनिया की नई धुरी",
  "summary": "राजस्थान इंटरनेशनल सोलर अलायंस के साथ फ्रेमवर्क फॉर एक्शन समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस साझेदारी से राज्य में एआई और आधुनिक तकनीक के जरिए सौर ऊर्जा के विस्तार और बिजली वितरण प्रणाली में क्रांतिकारी सुधार किए जाएंगे।",
  "content": "जयपुर में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत राजस्थान ने अक्षय ऊर्जा के वैश्विक परिदृश्य पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। राज्य अब देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने 128 देशों के समूह इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के साथ 'फ्रेमवर्क फॉर एक्शन-एडवांस क्लीन एनर्जी, ड्रिवन सस्टेनेबल डवलपमेंट' नामक महत्वपूर्ण समझौते पर मुहर लगाई है। इस रणनीतिक साझेदारी से राजस्थान को वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में बुधवार को सीएमओ में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा सचिव आरती डोगरा और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के महानिदेशक आशीष खन्ना ने इस फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए।\n\nऊर्जा बदलाव और भविष्य की रणनीति\nइस समझौते का मुख्य उद्देश्य राजस्थान के लिए वर्ष 2030-35 की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक एनर्जी ट्रांजिशन प्लान तैयार करना है। यह योजना राज्य के अक्षय ऊर्जा पोर्टफोलियो को विस्तार देने के साथ-साथ प्रसारण और वितरण नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित होगी। इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत ग्रिड का आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण क्षमता का विकास और ऊर्जा दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, बिजली मांग का प्रभावी प्रबंधन, निवेश के अनुकूल परियोजनाओं की पहचान, वैज्ञानिक ऊर्जा मॉडलिंग, संस्थागत क्षमता का विकास और नीतिगत ढांचे में सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी काम किया जाएगा।\n\nएआई तकनीक से सुधरेगा बिजली प्रबंधन\nइस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू एआई एंड एनेबल्ड डिजिटाइजेशन का उपयोग है। अजमेर विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत डिजिटल द्विन तकनीक पर आधारित एक विशेष पायलट परियोजना की शुरुआत की जाएगी। इस तकनीक के माध्यम से बिजली की मांग का सटीक आकलन करना आसान होगा, जिससे नेटवर्क की योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी। उपभोक्ता अब नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से पहले से अधिक विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली बिजली प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, इस वैश्विक सहयोग के चलते राज्य के इंजीनियरों और अधिकारियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण के नए अवसर उपलब्ध होंगे।\n\nसौर ऊर्जा का वैश्विक जन-आंदोलन\nमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का ही प्रतिबिंब है, जिसने सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साझेदारी से प्रदेश परंपरागत ऊर्जा स्रोतों से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ तेजी से अग्रसर होगा। इस समग्र योजना से बिजली की सप्लाई में बड़ा सुधार आएगा और अंतिम छोर तक के उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा सुनिश्चित होगी।\n\nअक्षय ऊर्जा में राजस्थान की उपलब्धि\nमुख्यमंत्री ने आगे जानकारी दी कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति इसे अक्षय ऊर्जा के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। राज्य ने अपनी इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के जरिए 125 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में पीएम कुसुम योजना का लाभ उठाते हुए, 4 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता के जरिए प्रदेश के 26 जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।\n\nएआई और आधुनिक नीतियों का प्रभाव\nऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि सरकार का ध्यान राज्य के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर है। आईएसए के साथ हुआ यह फ्रेमवर्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके विद्युत सेवाओं को नई गति देगा। वहीं, इंटरनेशनल सोलर अलायंस के महानिदेशक आशीष खन्ना ने उल्लेख किया कि राजस्थान की प्रगतिशील नीतियों के कारण ही यह प्रदेश सोलर ऊर्जा के मामले में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अब भारत भी विश्व में दूसरे स्थान पर आ चुका है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: अक्षय ऊर्जा के विस्तार से पूरे देश में स्वच्छ और सस्ती बिजली मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।\n\nराजस्थान में: बिजली वितरण में सुधार और एआई आधारित मांग आकलन से राज्य के उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इंटरनेशनल सोलर अलायंस के साथ समझौता करने वाला पहला राज्य कौन बना?\nराजस्थान देश का पहला राज्य बना है जिसने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) के साथ फ्रेमवर्क फॉर एक्शन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।\n\n2. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइसका मुख्य उद्देश्य 2030-35 तक राजस्थान की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए ट्रांजिशन प्लान तैयार करना और सौर ऊर्जा, ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा दक्षता में सुधार करना है।\n\n3. एआई तकनीक से बिजली सेक्टर में क्या बदलाव आएगा?\nएआई और डिजिटल द्विन तकनीक के जरिए बिजली की मांग का सटीक आकलन किया जाएगा, जिससे नेटवर्क योजना बेहतर होगी और उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली मिलेगी।\n\n4. राजस्थान ने स्वच्छ ऊर्जा का क्या लक्ष्य रखा है?\nराजस्थान ने अपनी इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी पॉलिसी के तहत 125 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-09",
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