# राजधानी के प्रमुख बाजारों में धरने-प्रदर्शनों से सन्नाटा, खान मार्केट और कनॉट प्लेस में रोज करोड़ों का नुकसान

> दिल्ली में राजनीतिक आंदोलनों और सुरक्षा घेराबंदी के चलते खान मार्केट और कनॉट प्लेस के व्यापारियों का कारोबार चरमरा गया है, जिससे रोजाना 50 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/rajdhani-ke-pramukh-bazaron-mein-dharne-pradarshanon-se-sannata-khan-market-aur-connaught-place-mein-roz-crodon-ka-nuksan-48349 · **Language:** Hindi
**Tags:** कनॉट प्लेस, खान मार्केट, दिल्ली व्यापार, व्यापारी नुकसान, अतुल भार्गव, दिल्ली पुलिस, धरना प्रदर्शन, खुदरा बाजार

देश की राजधानी के सबसे व्यस्त और महंगे कारोबारी केंद्रों में शुमार खान मार्केट और कनॉट प्लेस इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली पुलिस की कड़ी बैरिकेडिंग की वजह से सामान्य खरीदारों ने इन बाजारों की तरफ रुख करना छोड़ दिया है। इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित वे दुकानदार हैं, जो त्योहारों के सीजन में अच्छी बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे थे। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, ग्राहकों की गैर-मौजूदगी के कारण इस अकेले बाजार को प्रतिदिन लगभग 50 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक घाटा सहना पड़ रहा है। लगातार घटती आमदनी और बढ़ते खर्चों को लेकर कारोबारियों ने अब प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर दखल देने की गुहार लगाई है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी व्यथा सुने जाने की मांग की है।

## भारी-भरकम किराया और रोजमर्रा के खर्चे निकालना हुआ मुश्किल
खान मार्केट अपने महंगे ब्रांड्स और प्रीमियम लोकेशन के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन वर्तमान हालात ने यहां के व्यवसायियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यहां दुकानों का दैनिक किराया ही करीब 3 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। जब सुबह से शाम तक बाजार में खरीदारों की आवाजाही ठप रहती है, तब कर्मचारियों के वेतन, बिजली के बिल और इस भारी-भरकम किराए का भुगतान करना दुकानदारों की क्षमता से बाहर हो जाता है। व्यापारियों का तर्क है कि जब भी शहर में किसी बड़े मुद्दे पर विरोध होता है, उसका सबसे पहला और सीधा वार व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसी वजह से वे चाहते हैं कि देश की शीर्ष अदालत इस मामले में व्यापारियों के पक्ष को भी सुने और उनके आर्थिक अधिकारों की रक्षा करे।

## कनॉट प्लेस में बिक्री सामान्य से महज दस फीसदी तक सिमटी
ऐसी ही चिंताजनक तस्वीर ऐतिहासिक कनॉट प्लेस से भी सामने आ रही है। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रमुख अतुल भार्गव ने बताया कि बीते करीब एक हफ्ते से जारी प्रदर्शनों और रास्तों की नाकेबंदी ने बाजार की कमर तोड़कर रख दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान यहां का कुल कारोबार गिरकर सामान्य दिनों के महज 10 प्रतिशत के स्तर पर आ गया था। व्यापारी अभी उस झटके से संभलने का प्रयास ही कर रहे थे कि विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक के धरने शुरू हो गए। राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लगातार होते इन कार्यक्रमों से व्यापारी वर्ग बुरी तरह घबराया हुआ है, क्योंकि उन्हें आने वाले दिनों में और ज्यादा नुकसान होने की आशंका सता रही है।

## त्योहारी सीजन के लिए जुटाया गया भारी स्टॉक फंसा
खुदरा व्यापारियों के दृष्टिकोण से साल की अंतिम तिमाही यानी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर सबसे ज्यादा कमाई वाले महीने माने जाते हैं। दीपावली और शादियों के आगामी सीजन को ध्यान में रखकर दुकानदारों ने महीनों पहले से गोदामों में सामान का बड़ा भंडार जमा कर रखा है। इसके लिए अधिकांश व्यापारियों ने बैंक कर्ज और देनदारियों का सहारा लिया है। अब जब ग्राहक सड़कों की नाकेबंदी और जाम के डर से दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो पूरा निवेश फंसने के कगार पर पहुंच गया है। कनॉट प्लेस के व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो महीने उनके लिए बेहद निराशाजनक रहे हैं और अगर मौजूदा दौर जल्द नहीं थमा, तो कई संस्थान दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

## सेंट्रल पार्क बंद, पालिका और शंकर मार्केट पर भी संकट
कनॉट प्लेस और उसके नजदीकी इलाकों में कारोबार का एक विशाल नेटवर्क फैला हुआ है। पूरे कनॉट प्लेस परिसर में लगभग 2000 व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं, जिनमें से 1300 से 1400 दुकानें इसके इनर, मिडिल और आउटर सर्कल में स्थित हैं। इसके अलावा यहां सैकड़ों दफ्तर, मशहूर कैफे और रेस्टोरेंट भी संचालित होते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 16 और 17 तारीख को सेंट्रल पार्क को पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया गया है, जिससे आम लोगों की आवाजाही और रुक जाएगी। कनॉट प्लेस से ही सटा हुआ पालिका बाजार है, जिसमें करीब 300 भूमिगत दुकानें हैं। इसी तरह शंकर मार्केट में लगभग 200 दुकानें हैं। इन सभी बाजारों के कारोबारी 16 और 17 तारीख को लेकर बेहद चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि ग्राहकों के न आने से कारोबार 25 प्रतिशत और नीचे फिसल जाएगा।

## प्रशासन से अलग धरना स्थल तय करने की गुहार
बढ़ते संकट को देखते हुए व्यापारिक संगठनों ने एकजुट होकर देश के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। इनमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त शामिल हैं। व्यापारियों ने मांग की है कि कनॉट प्लेस जैसे मुख्य व्यावसायिक और वित्तीय केंद्रों में रैलियों, धरनों और पुलिस बैरिकेडिंग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इससे न सिर्फ रिटेल कारोबार तबाह होता है, बल्कि आम नागरिकों की दिनचर्या और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह बाधित होती हैं। व्यापारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, लेकिन उसके लिए जंतर-मंतर जैसे निर्धारित स्थानों का उपयोग होना चाहिए ताकि लाखों लोगों की आजीविका पर आंच न आए।

## इसका आप पर असर
राजधानी के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में आवाजाही बाधित होने से आम खरीदारों, कर्मचारियों और दुकानदारों पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **दिल्ली-एनसीआर में:** मध्य दिल्ली के खान मार्केट और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में खरीदारी के लिए जाने वाले लोगों को ट्रैफिक डायवर्जन और रास्तों की नाकेबंदी का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप खरीदारी या खान-पान की योजना बना रहे हैं, तो जाने से पहले यातायात परामर्श जरूर जांच लें।
- **त्योहारी खरीदारी पर:** बाजारों में सन्नाटा होने से दुकानदारों की त्योहारी बिक्री अटक गई है और ग्राहकों को जाम के डर से दूर रहना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में शादी-ब्याह और त्योहारों की खरीदारी के लिए लोग स्थानीय मोहल्ला बाजारों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का रुख कर सकते हैं।
- **दुकानदारों और कर्मचारियों पर:** हर दिन करोड़ों रुपये का व्यापार ठप होने से दुकानों के रोजमर्रा के खर्चे और कर्मचारियों के वेतन पर संकट खड़ा हो सकता है। यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं हुई, तो छोटे कर्मचारियों की आजीविका और दैनिक दिहाड़ी पर गंभीर असर पड़ेगा।
- **सार्वजनिक आवागमन पर:** 16 और 17 तारीख को सेंट्रल पार्क बंद रहने और आसपास कड़ी बैरिकेडिंग होने से पैदल यात्रियों और मेट्रो यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ेगी। राजीव चौक और आसपास के स्टेशनों से निकलने वाले मुसाफिरों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह आर्थिक संकट मध्य दिल्ली के प्रमुख खुदरा और वाणिज्यिक केंद्रों में राजनीतिक तथा सामाजिक संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण पैदा हुआ है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा की जाने वाली भारी घेराबंदी ने खरीदारों की पहुंच पूरी तरह रोक दी है।

- **लगातार होते विरोध प्रदर्शन:** राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सीजेपी और इसके बाद इंडिया ब्लॉक के बड़े धरने-प्रदर्शन आयोजित किए गए। इन राजनीतिक आंदोलनों की वजह से पूरे इलाके में सुरक्षा बल तैनात करने पड़े।
- **सुरक्षा बैरिकेडिंग और रास्ते बंद होना:** पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाजारों के मुख्य प्रवेश मार्गों पर सख्त नाकेबंदी कर दी। रास्ते बंद होने से आम ग्राहक जाम और असुविधा के डर से बाजारों से पूरी तरह कट गए।
- **धरना स्थलों का अभाव:** व्यावसायिक क्षेत्रों के आसपास आंदोलनों के कारण कारोबार और जनजीवन बार-बार पटरी से उतरता है। व्यापारियों की मुख्य शिकायत यह है कि शहर में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों का पालन न होने से व्यावसायिक इलाकों को अनावश्यक तनाव झेलना पड़ता है।

## सवाल-जवाब

### 1. खान मार्केट के व्यापारियों को रोज कितना नुकसान हो रहा है?
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के मुताबिक, लगातार प्रदर्शनों और ग्राहकों की कमी की वजह से बाजार को रोजाना करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

### 2. कनॉट प्लेस में बिक्री पर कितना असर पड़ा है?
न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान कारोबार सामान्य दिनों के मुकाबले गिरकर केवल 10 फीसदी रह गया था।

### 3. व्यापारियों ने किन अधिकारियों से मदद मांगी है?
व्यापारियों ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली के उपराज्यपाल को ज्ञापन देकर वाणिज्यिक इलाकों को प्रदर्शनों से मुक्त रखने की मांग की है।

### 4. कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क कब बंद रहेगा?
सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों के चलते कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क 16 और 17 तारीख को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

### 5. कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों में कुल कितनी दुकानें हैं?
कनॉट प्लेस में करीब 2000 दुकानें हैं, जबकि साथ लगते पालिका बाजार में करीब 300 और शंकर मार्केट में लगभग 200 दुकानें स्थित हैं।

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